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विधायक प्रमोद विज ने विधानसभा में उठाया सीएलयू प्रक्रिया में ढील देने का मुद्दा
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MLA Pramod Vij raised issue of relaxation in CLU process in Vidhan Sabha
- फोटो : Panipat
विधायक प्रमोद विज ने बजट सत्र में पानीपत के उद्योग का बड़ा मुद्दा उठाया है। उन्होंने विधानसभा में मांग की कि पानीपत के स्थापित हो चुके उद्योगों के लिए सीएलयू लेने की प्रक्रिया में ढील बरती जाए। नए उद्योगों को स्थापित करने के लिए भूमि का दाम साढ़े 5 हजार रुपये गज किया जाए। विधायक विज की मांगों पर डिप्टी सीएम दुष्यंत चौटाला ने स्वीकृति जताते हुए अधिकारियों को इस संबंध में कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।
विधायक प्रमोद विज ने विधानसभा में कहा कि एचएसआईआईडीसी का गठन 1967 में और एचएसवीपी का गठन 1977 में हुआ था। पानीपत नगर निगम क्षेत्र व कंट्रोल एरिया में 1960 में उद्योग कारखाने विकसित हो गए थे। अब काबड़ी फाटक जैसे क्षेत्रों में न केवल उद्योगों में भारी मात्रा में उत्पादन हो रहा है, घनी आबादी भी बस गई है। इस उद्योग क्षेत्र के लोग सीएलयू की शर्तों को किसी सूरत पूरा करने में सक्षम नहीं हैं। पानीपत हाई पोटेंशियल एरिया में शामिल है। इसलिए पानीपत में नया उद्योग लगाना एक विकट समस्या है। इसलिए इसका समाधान एक ही बनता है कि पानीपत के पुराने व स्थापित हो चुके उद्योगों को सीएलयू में ढील दी जाए।
विधायक प्रमोद विज ने विधानसभा में मांग की कि डीटीपी किसी भी स्थापित उद्योग को नुकसान नहीं पहुंचाएं, न ही सीएलयू के संबंध में कोई नोटिस जारी करें। इस पर डिप्टी सीएम दुष्यंत चौटाला ने स्वीकृति देते हुए अधिकारियों को उद्योगों को नुकसान नहीं पहुंचाने के निर्देश जारी किए।
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विधायक प्रमोद विज ने विधानसभा में कहा कि एचएसआईआईडीसी का गठन 1967 में और एचएसवीपी का गठन 1977 में हुआ था। पानीपत नगर निगम क्षेत्र व कंट्रोल एरिया में 1960 में उद्योग कारखाने विकसित हो गए थे। अब काबड़ी फाटक जैसे क्षेत्रों में न केवल उद्योगों में भारी मात्रा में उत्पादन हो रहा है, घनी आबादी भी बस गई है। इस उद्योग क्षेत्र के लोग सीएलयू की शर्तों को किसी सूरत पूरा करने में सक्षम नहीं हैं। पानीपत हाई पोटेंशियल एरिया में शामिल है। इसलिए पानीपत में नया उद्योग लगाना एक विकट समस्या है। इसलिए इसका समाधान एक ही बनता है कि पानीपत के पुराने व स्थापित हो चुके उद्योगों को सीएलयू में ढील दी जाए।
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विधायक प्रमोद विज ने विधानसभा में मांग की कि डीटीपी किसी भी स्थापित उद्योग को नुकसान नहीं पहुंचाएं, न ही सीएलयू के संबंध में कोई नोटिस जारी करें। इस पर डिप्टी सीएम दुष्यंत चौटाला ने स्वीकृति देते हुए अधिकारियों को उद्योगों को नुकसान नहीं पहुंचाने के निर्देश जारी किए।
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