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चार बसों में ठूसी 600 सवारियां, 1800 रुपये प्रति टिकट और अंदर भयंकर उमस और गर्मी से घुटने लगा दम
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शहर में रोजी रोटी कमाने आए प्रवासी मजदूर लॉकडाउन लगने के डर और बेरोजगारी से परेशान होकर अपनी जिंदगी दांव पर लगाकर घर पलायन कर रहे हैं। कुछ लोग उनकी इस मजबूरी का फायदा भी उठा रहे हैं। यूपी-बिहार जाने के लिए इन मजदूरों को 1800 रुपये तक का बस का टिकट खरीदना पड़ रहा है। इनको बस में बैठाया नहीं जा रहा, बल्कि ठूसा जा रहा है। बस के अंदर भयंकर गर्मी और उमस होने के कारण छोटे बच्चे और महिलाओं का बुरा हाल हो रहा है। सेक्टर-25 के मोड़, मलिक पेट्रोल पंप के पास और ट्रांसपोर्ट नगर में चार बसों में मजदूर बैठाए जाते मिले। इन चार बसों में करीब 600 सवारियों को ठूस-ठूस कर भरा गया था। तीन गुणा किराया भी वसूला जा रहा था।
प्रवासी मजदूरों के पलायन की शनिवार को लाइव रिपोर्ट की गई। बस में इतने ज्यादा लोग हैं कि उनका दम घुट रहा था। जिला प्रशासन, पुुलिस और आरटीए की नाक के नीचे कोविड गाइडलाइन की धज्जियां उड़ाते हुए बसों को चलाया जा रहा है। इस लापरवाही से न जाने कितने लोग कोरोना संक्रमण की जद में आ रहे हैं। निजी बस संचालक महज अपने फायदे के चक्कर में लोगों को मौत के मुंह में डाल रहे हैं। यहां एसी तो दूर की बात इनको पीने तक पानी नहीं मिला, फिर भी मजबूरी में लोग चुपचाप बैठे रहे।
किराया लेने के बाद फरार हो गए, मजदूर करते रह गए बस का इंतजार
यहां धोखाधड़ी भी चल रही है। लाइव रिपोर्ट के दौरान कुछ मजदूर ऐसे मिले, जिनसे बिहार जाने के लिए 1800 रुपये का किराया लिया गया और उन्हें एक टिकट भी दे गई, लेकिन टिकट काटने के बाद बस का पता न ही टिकट देने वाले परिचालक का। मजदूर उन्हें खोजते रह गए। कुछ लोग उन्हें ठगकर फरार हो गए।
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600 की टिकट 1800 में ली
श्रमिकों ने बताया कि आमतौर पर उन्हें सरकारी बस से घर जाने के लिए 600 रुपये की टिकट खरीदना होता है, लेकिन अब मजबूरी में 1800 रुपये की टिकट खरीदना पड़ रहा है। तीन गुना ज्यादा किराया देना पड़ रहा है।
यहां रहेंगे तो वैसे ही भूख से मर जाएंगे, जाने दो
मजदूरों ने बताया कि कोरोना के हालातों को देखते हुए लगता है कि फिर से लॉकडाउन लग जाएगा। वे बेरोजगार तो वैसे ही हो गए हैं। अगर यहां और दिन रहे तो वैसे ही भूख से मर जाएंगे। इससे अच्छा है वे अपने घरों को लौट जाएं।
रास्ते में ही छोड़ देते हैं बस वाले
मजदूरों ने बताया कि वे इनकी शिकायत भी नहीं कर सकते। अगर शिकायत की तो बस संचालक उन्हें या उनके परिवार या उनके परिचितों को रास्ते में ही छोड़ कर भाग जाते हैं और टिकट के नाम पर पैसे भी ले जाते हैं।
9 बजे टिकट काटी, 4 बजे आई बस
मजदूरों ने बताया कि उन्होंने बस की टिकट सुबह 9 बजे ही ले ली थी। इसके बाद लगातार सात घंटे तक तेज धूप में बस का इंतजार करते रहे, इसके बाद शाम 4 बजे बस आई।
खस्ता हाल देखकर पहुंचे प्रधान ने रुकवाई बसें
ट्रांसपोर्ट नगर के प्रधान आमेंद्र मलिक ने ट्रांसपोर्ट नगर में ऐसी तीन बसों और एक कमर्शियल वाहन को रुकवाया। इनमें से करीब साढ़े 450 लोग निकले। जब बस संचालकों का पता किया गया तो वे फरार हो गए। पुलिस प्रशासन को इसकी सूचना दी गई, लेकिन कार्रवाई के लिए मौके पर कोई भी नहीं आया।
रात भर ड्यूटी पर थी टीम, क्या करें हम
इस बारे में आरटीए सह सचिव इंस्पेक्टर राकेश शर्मा से बात की गई तो उन्होंने बताया कि उनकी टीम रात भर ड्यूटी पर थी। अब वे क्या कर सकते हैं। वे पहले भी बसों का चालान कर चुके हैं, लेकिन ये लोग मान ही नहीं रहे हैं।
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प्रवासी मजदूरों के पलायन की शनिवार को लाइव रिपोर्ट की गई। बस में इतने ज्यादा लोग हैं कि उनका दम घुट रहा था। जिला प्रशासन, पुुलिस और आरटीए की नाक के नीचे कोविड गाइडलाइन की धज्जियां उड़ाते हुए बसों को चलाया जा रहा है। इस लापरवाही से न जाने कितने लोग कोरोना संक्रमण की जद में आ रहे हैं। निजी बस संचालक महज अपने फायदे के चक्कर में लोगों को मौत के मुंह में डाल रहे हैं। यहां एसी तो दूर की बात इनको पीने तक पानी नहीं मिला, फिर भी मजबूरी में लोग चुपचाप बैठे रहे।
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किराया लेने के बाद फरार हो गए, मजदूर करते रह गए बस का इंतजार
यहां धोखाधड़ी भी चल रही है। लाइव रिपोर्ट के दौरान कुछ मजदूर ऐसे मिले, जिनसे बिहार जाने के लिए 1800 रुपये का किराया लिया गया और उन्हें एक टिकट भी दे गई, लेकिन टिकट काटने के बाद बस का पता न ही टिकट देने वाले परिचालक का। मजदूर उन्हें खोजते रह गए। कुछ लोग उन्हें ठगकर फरार हो गए।
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600 की टिकट 1800 में ली
श्रमिकों ने बताया कि आमतौर पर उन्हें सरकारी बस से घर जाने के लिए 600 रुपये की टिकट खरीदना होता है, लेकिन अब मजबूरी में 1800 रुपये की टिकट खरीदना पड़ रहा है। तीन गुना ज्यादा किराया देना पड़ रहा है।
यहां रहेंगे तो वैसे ही भूख से मर जाएंगे, जाने दो
मजदूरों ने बताया कि कोरोना के हालातों को देखते हुए लगता है कि फिर से लॉकडाउन लग जाएगा। वे बेरोजगार तो वैसे ही हो गए हैं। अगर यहां और दिन रहे तो वैसे ही भूख से मर जाएंगे। इससे अच्छा है वे अपने घरों को लौट जाएं।
रास्ते में ही छोड़ देते हैं बस वाले
मजदूरों ने बताया कि वे इनकी शिकायत भी नहीं कर सकते। अगर शिकायत की तो बस संचालक उन्हें या उनके परिवार या उनके परिचितों को रास्ते में ही छोड़ कर भाग जाते हैं और टिकट के नाम पर पैसे भी ले जाते हैं।
9 बजे टिकट काटी, 4 बजे आई बस
मजदूरों ने बताया कि उन्होंने बस की टिकट सुबह 9 बजे ही ले ली थी। इसके बाद लगातार सात घंटे तक तेज धूप में बस का इंतजार करते रहे, इसके बाद शाम 4 बजे बस आई।
खस्ता हाल देखकर पहुंचे प्रधान ने रुकवाई बसें
ट्रांसपोर्ट नगर के प्रधान आमेंद्र मलिक ने ट्रांसपोर्ट नगर में ऐसी तीन बसों और एक कमर्शियल वाहन को रुकवाया। इनमें से करीब साढ़े 450 लोग निकले। जब बस संचालकों का पता किया गया तो वे फरार हो गए। पुलिस प्रशासन को इसकी सूचना दी गई, लेकिन कार्रवाई के लिए मौके पर कोई भी नहीं आया।
रात भर ड्यूटी पर थी टीम, क्या करें हम
इस बारे में आरटीए सह सचिव इंस्पेक्टर राकेश शर्मा से बात की गई तो उन्होंने बताया कि उनकी टीम रात भर ड्यूटी पर थी। अब वे क्या कर सकते हैं। वे पहले भी बसों का चालान कर चुके हैं, लेकिन ये लोग मान ही नहीं रहे हैं।