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शुभ संयोग में एक साथ हुई मां चंद्रघंटा और कूष्मांडा की पूजा
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पानीपत। देवी मंदिर में मां के दर्शन कर मन्नत मागती हुए बच्चे सहित अन्य श्रद्धालु।
- फोटो : Panipat
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शनिवार को मां दुर्गा के तीसरे व चौथे स्वरूप मां चंद्रघंटा व मां कूष्मांडा की पूजा की गई। भक्तों ने मंदिरों में जाकर पूजा की और माता का आशीर्वाद लिया। भक्तों ने जयकारों और माता के भजनों के साथ माता का स्वागत किया। मंदिरों में सुबह से ही श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी रही, घरों में हवन हुआ। पानीपत का ऐतिहासिक देवी मंदिर प्रधान काकू बंसल ने बताया कि देवी मंदिर में मास्क, सेनेटाइजर, थर्मल स्क्रीनिंग, सोशल डिस्टेंसिंग जैसी सावधानियों के साथ ही माता के दर्शन-पूजन की व्यवस्था की गई है।
नवरात्रि के तीसरे दिन मां दुर्गा की तृतीय शक्ति चंद्रघंटा देवी की आराधना का विधान है। मां चंद्रघंटा ने राक्षसों के संहार के लिए अवतार लिया था। इनमें ब्रह्मा, विष्णु और महेश तीनों देवों की शक्तियां समाहित हैं। ये अपने हाथों में तलवार, त्रिशूल, धनुष व गदा धारण करती हैं। इनके माथे पर घंटे के आकार में अर्द्ध चंद्र विराजमान है। इसलिए ये चंद्रघंटा कहलाती हैं।
नवरात्रि के चौथे दिन मां दुर्गा के चतुर्थ स्वरूप कूष्मांडा देवी की पूजा का विधान हैं, लेकिन इस बार हिंदी तिथि के अनुसार एक ही दिन तिथि बदलने के कारण इनका पूजन तीसरे दिन ही किया गया। इनकी आठ भुजाएं है, इसलिए इन्हें अष्टभुजा देवी के नाम से भी जाना जाता है। ये अपनी अष्ट भुजाओं में कमंडल, धनुष, बाण, कमल-पुष्प, अमृतपूर्ण कलश, चक्र तथा गदा धारण आदि सभी चीजें करती हैं। पौराणिक कथाओं के अनुसार जब चारों ओर अंधकार था तो इन्हीं के द्वारा ब्रह्मांड की उत्पत्ति हुई थी। इन्हीं के प्रकाश व तेज से दसों दिशाएं प्रकाशित होती हैं। यही सृष्टि की आदिस्वरुपा मां आदिशक्ति हैं।
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खिले व्यापारियों के चेहरे
कोरोना काल में लॉकडाउन से गुजरे व्यापारियों के चेहरे शारदीय नवरात्र पर खिल गए। अपेक्षा से अधिक भीड़ देख दुकानदार उत्साहित नजर आए। माला, फूल व प्रसाद के साथ ही खिलौने व अन्य सामानों से दुकानें सजीं रहीं। मां के दर्शन व पूजनकर वापस लौटने वाले श्रद्धालुओं व बच्चों की भीड़ दुकानों पर दिखी।
पांचवें दिन मां दुर्गा के पंचम स्वरूप मां स्कंदमाता का होगा पूजन
भगवान स्कंद (कार्तिकेय) की माता होने के कारण देवी के इस पांचवें स्वरूप को स्कंदमाता के नाम से जाना जाता है। यह कमल के आसान पर विराजमान हैं। इसलिए इन्हें पद्मासन देवी भी कहा जाता है। स्कंदमाता की साधना से साधकों को आरोग्य, बुद्धिमता तथा ज्ञान की प्राप्ति होती है।
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नवरात्रि के तीसरे दिन मां दुर्गा की तृतीय शक्ति चंद्रघंटा देवी की आराधना का विधान है। मां चंद्रघंटा ने राक्षसों के संहार के लिए अवतार लिया था। इनमें ब्रह्मा, विष्णु और महेश तीनों देवों की शक्तियां समाहित हैं। ये अपने हाथों में तलवार, त्रिशूल, धनुष व गदा धारण करती हैं। इनके माथे पर घंटे के आकार में अर्द्ध चंद्र विराजमान है। इसलिए ये चंद्रघंटा कहलाती हैं।
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नवरात्रि के चौथे दिन मां दुर्गा के चतुर्थ स्वरूप कूष्मांडा देवी की पूजा का विधान हैं, लेकिन इस बार हिंदी तिथि के अनुसार एक ही दिन तिथि बदलने के कारण इनका पूजन तीसरे दिन ही किया गया। इनकी आठ भुजाएं है, इसलिए इन्हें अष्टभुजा देवी के नाम से भी जाना जाता है। ये अपनी अष्ट भुजाओं में कमंडल, धनुष, बाण, कमल-पुष्प, अमृतपूर्ण कलश, चक्र तथा गदा धारण आदि सभी चीजें करती हैं। पौराणिक कथाओं के अनुसार जब चारों ओर अंधकार था तो इन्हीं के द्वारा ब्रह्मांड की उत्पत्ति हुई थी। इन्हीं के प्रकाश व तेज से दसों दिशाएं प्रकाशित होती हैं। यही सृष्टि की आदिस्वरुपा मां आदिशक्ति हैं।
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खिले व्यापारियों के चेहरे
कोरोना काल में लॉकडाउन से गुजरे व्यापारियों के चेहरे शारदीय नवरात्र पर खिल गए। अपेक्षा से अधिक भीड़ देख दुकानदार उत्साहित नजर आए। माला, फूल व प्रसाद के साथ ही खिलौने व अन्य सामानों से दुकानें सजीं रहीं। मां के दर्शन व पूजनकर वापस लौटने वाले श्रद्धालुओं व बच्चों की भीड़ दुकानों पर दिखी।
पांचवें दिन मां दुर्गा के पंचम स्वरूप मां स्कंदमाता का होगा पूजन
भगवान स्कंद (कार्तिकेय) की माता होने के कारण देवी के इस पांचवें स्वरूप को स्कंदमाता के नाम से जाना जाता है। यह कमल के आसान पर विराजमान हैं। इसलिए इन्हें पद्मासन देवी भी कहा जाता है। स्कंदमाता की साधना से साधकों को आरोग्य, बुद्धिमता तथा ज्ञान की प्राप्ति होती है।