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सालाना लाखों का नुकसान और खतरे में 44 की जान
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पानीपत। नगर निगम की चूक और लापरवाही से उसे हर साल 70 से 80 लाख रुपये का वित्तीय नुकसान हो रहा है। साथ ही काम करने वाले 44 लोगों की जान का खतरा भी है। ये वे लोग हैं जो स्ट्रीट लाइटों की रिपेयरिंग का काम कर रहे हैं।
दरअसल, यह मामला नगर निगम की ओर से 17000 स्ट्रीट लाइटों की रिपेयरिंग के लिए लगाए गए रिपेयर और मेंटेनेंस टेंडर और मटेरियल परचेज से जुड़ा है। निगम ने इस टेंडर के लिए 47 कर्मचारियों को हायर किया है। इनमें से सिर्फ तीन कर्मचारी जेई के पद पर हैं, जबकि 44 कर्मचारी हेल्पर हैं। इन हेल्परों से ही इलेक्ट्रिशियन का काम करवाया जा रहा है जबकि इनके पास कोई डिप्लोमा नहीं है। खंभे पर चढ़ाकर इनसे लाइट ठीक कराने का काम करवाया जा रहा है।
हैरानी की बात यह है कि जिस एजेंसी के माध्यम से इन हेल्परों को लगाया गया है, उसके पास भी चीफ इलेक्ट्रिकल इंजीनियर का लाइसेंस नहीं है। अब बड़ा सवाल यह है कि अगर इनमें से किसी भी कर्मचारी के साथ कोई दुर्घटना हो जाती है तो जिम्मेदार कौन होगा? इन कर्मचारियों के वेतन के लिए निगम हर माह करीब 10 लाख रुपये का भुगतान भी करता है। यह सालाना करीब 1.20 करोड़ रुपये है।
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खराब लाइटों को रिपेयर करने के लिए निगम हर साल मटेरियल परचेज के लिए 60 से 70 लाख रुपये खर्च कर रहा है। कुल मिलाकर एक साल में 17000 लाइटों की रिपेयर और मेंटेनेंस पर पौने दो करोड़ रुपये तक खर्च हो रहे हैं जबकि इससे पहले ये काम प्रति प्वॉइंट टेंडर के हिसाब से किया जाता रहा है। जिसमें 17000 स्ट्रीट लाइटों की मेंटेनेंस और रिपेयरिंग का सालाना खर्च करीब 90 लाख रुपये था, जो अब दोगुना हो चुका है।
सदन में उठाएंगे आवाज
मामला संज्ञान में है। इसके खिलाफ सदन में आवाज उठाई जाएगी। अधिकारियों से सवाल जवाब तलब किए जाएंगे। निगम को वित्तीय नुकसान नहीं होने दिया जाएगा। वहीं, पार्षदों और अधिकारियों से भी इस पर विचार विमर्श कर इस प्रक्रिया को दुरुस्त करवाया जाएगा। -रविंद्र भाटिया, पार्षद वार्ड नंबर 10
गलत हो रहा काम, करवाएंगे सुधार
ये गलत तरीके से काम करवाया जा रहा है। इसमें सुधार करने की गुंजाइश है। इसके लिए विधायक समेत निगम आयुक्त से भी बातचीत की जाएगी। इसके बाद प्रति प्वाइंट के हिसाब से ही टेंडर लगवाया जाएगा। ताकि निगम को भी वित्तीय नुकसान न हो और किसी भी कर्मचारी पर जान की भी आफत न बन सके। -दुष्यंत भट्ट, सीनियर डिप्टी मेयर, पानीपत।
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दरअसल, यह मामला नगर निगम की ओर से 17000 स्ट्रीट लाइटों की रिपेयरिंग के लिए लगाए गए रिपेयर और मेंटेनेंस टेंडर और मटेरियल परचेज से जुड़ा है। निगम ने इस टेंडर के लिए 47 कर्मचारियों को हायर किया है। इनमें से सिर्फ तीन कर्मचारी जेई के पद पर हैं, जबकि 44 कर्मचारी हेल्पर हैं। इन हेल्परों से ही इलेक्ट्रिशियन का काम करवाया जा रहा है जबकि इनके पास कोई डिप्लोमा नहीं है। खंभे पर चढ़ाकर इनसे लाइट ठीक कराने का काम करवाया जा रहा है।
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हैरानी की बात यह है कि जिस एजेंसी के माध्यम से इन हेल्परों को लगाया गया है, उसके पास भी चीफ इलेक्ट्रिकल इंजीनियर का लाइसेंस नहीं है। अब बड़ा सवाल यह है कि अगर इनमें से किसी भी कर्मचारी के साथ कोई दुर्घटना हो जाती है तो जिम्मेदार कौन होगा? इन कर्मचारियों के वेतन के लिए निगम हर माह करीब 10 लाख रुपये का भुगतान भी करता है। यह सालाना करीब 1.20 करोड़ रुपये है।
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खराब लाइटों को रिपेयर करने के लिए निगम हर साल मटेरियल परचेज के लिए 60 से 70 लाख रुपये खर्च कर रहा है। कुल मिलाकर एक साल में 17000 लाइटों की रिपेयर और मेंटेनेंस पर पौने दो करोड़ रुपये तक खर्च हो रहे हैं जबकि इससे पहले ये काम प्रति प्वॉइंट टेंडर के हिसाब से किया जाता रहा है। जिसमें 17000 स्ट्रीट लाइटों की मेंटेनेंस और रिपेयरिंग का सालाना खर्च करीब 90 लाख रुपये था, जो अब दोगुना हो चुका है।
सदन में उठाएंगे आवाज
मामला संज्ञान में है। इसके खिलाफ सदन में आवाज उठाई जाएगी। अधिकारियों से सवाल जवाब तलब किए जाएंगे। निगम को वित्तीय नुकसान नहीं होने दिया जाएगा। वहीं, पार्षदों और अधिकारियों से भी इस पर विचार विमर्श कर इस प्रक्रिया को दुरुस्त करवाया जाएगा। -रविंद्र भाटिया, पार्षद वार्ड नंबर 10
गलत हो रहा काम, करवाएंगे सुधार
ये गलत तरीके से काम करवाया जा रहा है। इसमें सुधार करने की गुंजाइश है। इसके लिए विधायक समेत निगम आयुक्त से भी बातचीत की जाएगी। इसके बाद प्रति प्वाइंट के हिसाब से ही टेंडर लगवाया जाएगा। ताकि निगम को भी वित्तीय नुकसान न हो और किसी भी कर्मचारी पर जान की भी आफत न बन सके। -दुष्यंत भट्ट, सीनियर डिप्टी मेयर, पानीपत।