फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Haryana ›   Panipat News ›   Lives are being ruined due to family conflict, lives are hanging in the balance.

Panipat News: गृह क्लेश से जीवन हो रहा तबाह, फंदे पर झूल रही जिंदगियां

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Tue, 10 Sep 2024 05:39 AM IST
विज्ञापन
Lives are being ruined due to family conflict, lives are hanging in the balance.
पानीपत। गृह क्लेश में जीवन तबाह हो रहा है। जिंदगियां फंदे पर झूल रही हैं। जिले में हर दूसरे दिन एक व्यक्ति या महिला आत्महत्या कर लेती हैं। हर माह ऐसे 10 मामले सामने आ रहे हैं जब मामूली कहासुनी या अवैध संबंधों के कारण पत्नी या पति यह कदम उठा लेते हैं। पिछले आठ माह में जिले में 90 महिला व पुरुष आत्महत्या कर चुके हैं।
विज्ञापन

मनोरोग विशेषज्ञों के अनुसार सबसे अधिक आत्महत्या 18 से 30 वर्ष की आयु के बीच होती है। इस अवस्था में सहनशीलता बेहद कम होती है। इसके चलते युवक मानसिक रोग के शिकार हो जाते हैं। इसके अलावा बदलता परिवेश और भाग दौड़ भरा जीवन विद्यार्थियों के जीवन पर भारी पड़ रहा है। एक दूसरे से तुलना, पढ़ाई के बाद बेहतर भविष्य की चिंता छात्र-छात्राओं को तनाव में धकेल रही है। यही तनाव उन्हें आत्महत्या जैसे बेहद खतरनाक कदम की ओर खींचकर ले जा रहा है। अभिभावकों के लिए अपने बच्चों को तनाव से बचाना बड़ी चुनौती बन चुकी है। छोटी-छोटी बातों पर छात्र-छात्राएं जान देने से नहीं हिचक रहे। उनमें तनाव के लक्षण तो पहले ही दिख जाते हैं, लेकिन अभिभावक इन्हें पहचान नहीं पाते।
विज्ञापन


बॉक्स


प्रदेश में पिछले छह साल में 1500 से अधिक आत्महत्या
पिछले छह साल में प्रदेश में लगभग 1300 छात्र-छात्राएं आत्महत्या कर चुके हैं। 2017 से 2024 तक छात्र-छात्राओं के आत्महत्या करने के मामले 70 प्रतिशत तक बढ़े हैं। 2020 व 2021 में कोरोना ने भी युवाओं को मानसिक रूप से परेशान कर दिया। इन दो वर्षों में 510 विद्यार्थियों ने मौत को गले लगाया था। पिछले सात साल में प्रदेश में 1500 से अधिक युवा आत्महत्या कर चुके हैं। इस दौर ने बड़े ही नहीं, पांच से 10 साल तक के बच्चों को भी मानसिक रोगी बना दिया। दूसरी ओर बुजुर्ग बेटे-बहू का साथ छूटने से तनाव में घिर रहे हैं। प्रदेश में महिलाओं के मुकाबले तीन गुना पुरुष आत्महत्या करते हैं। महिलाएं पुरुषों के मुकाबले अधिक सहनशील पाई गई हैं। पानीपत के जिला नागरिक अस्पताल में पिछले एक साल में साढ़े तीन हजार से अधिक लोग अपना इलाज कराने पहुंचे हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन





बॉक्स
क्या कहते हैं विशेषज्ञ
मनोरोग विशेषज्ञ डाॅ. मोना नागपाल ने बताया कि इस समय हर आयु वर्ग के लोग मानसिक विकारों से ग्रस्त हैं। गृह क्लेश के कारण सबसे अधिक जिंदगियां फंदे पर झूल रही हैं। लोगों में सहनशीलता न होना आत्महत्या का सबसे बड़ा कारण है। मानसिक रोगों से विद्यार्थी बहुत अधिक प्रभावित हैं। एक-दूसरे से तुलना, उच्च शिक्षा के बाद रोजगार न मिलना। भविष्य की चिंता या प्रेम में असफल होने पर वे तनाव का शिकार हो रहे हैं। बच्चे मोबाइल का अधिक प्रयोग करने से इस विकार की चपेट में आ रहे हैं। बुजुर्ग अकेलेपन का शिकार होकर इस भयंकर बीमारी में घिर रहे हैं। इसके लक्षण पहले ही दिख जाते हैं। अधिसंख्य लोगों को काउंसिलिंग के जरिए ठीक किया जा सकता है। बीमारी पुरानी होने पर दवा देनी पड़ती है। परिवार में बच्चा, युवा, बुजुर्ग, किसी भी आयु का व्यक्ति है तो उससे बातचीत करते रहें। उसकी बातों को सुनें, ताकि उसे अपनापन लगे। बच्चों पर न ज्यादा गुस्सा करें न ज्यादा प्यार दिखाएं। दखलअंदाजी व बार-बार कमेंट न करें।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed