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Panipat News: स्टील प्लेट और कंक्रीट लगा बंद की लीकेज, अब होगी पाइपलाइन की निगरानी
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पानीपत। सेक्टर 29 पार्ट-2 में सीईटीपी प्लांट के साथ धंसी जमीन और सीवर लीकेज को सातवें दिन बंद करने में सफलता मिली। इसके बाद नगर निगम व अन्य अधिकारियों ने राहत की सांस ली। निगम ने लीकेज रोकने के लिए स्टील की प्लेट लगाकर कंक्रीट से ढक दिया है। 48 घंटे तक अधिकारी इसकी निगरानी करेंगे ताकि आसपास मिट्टी धंसने या पाइप लाइन लीक होने पर तुरंत कार्रवाई की जा सके।
जमीन धंसने वाली जगह के आसपास 21 फुट की दूरी में नौ छेद मिले थे, जिनकी मरम्मत का कार्य शनिवार रात को शुरू हुआ था। 1996 में बबैल नाके से लेकर सीईटीपी तक डाली गई पाइपलाइन अब पूरी तरह जर्जर हो चुकी है। फैक्ट्री संचालकों के द्वारा किए गए अवैध कनेक्शनाें और केमिकलयुक्त पानी बहाने के कारण सरिया गल गया है, जिससे आरसीसी सीमेंट की पाइप की मजबूती लगभग खत्म होने वाली है। 26 जून को सेक्टर-29 में सीवरेज लीक हो गया था।
पाइपलाइन की मरम्मत होने के बाद लोगों ने राहत की सांस ली। इस पाइपलाइन से रेलवे लाइन से पूर्व दिशा की ओर वाले पूरे शहर की निकासी निर्भर है। वार्ड नंबर एक से 14 तक की कॉलोनियों तक का सीवरेज पानी सीटीपी तक भेजा जाता है।
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अगर घटनास्थल या इसके आसपास की पाइपलाइन में दोबारा लीकेज होती है, या जमीन धंसती है तो निगम अधिकारियों की परेशानी बढ़ जाएगी। जर्जर हो चुकी इस पाइपलाइन को बदलने के लिए टेंडर निकालने और कामकाज पूरा कराने में कई महीने लग सकते हैं। आधे शहर की निकासी व्यवस्था ठप होने का खतरा है।
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जमीन धंसने वाली जगह के आसपास 21 फुट की दूरी में नौ छेद मिले थे, जिनकी मरम्मत का कार्य शनिवार रात को शुरू हुआ था। 1996 में बबैल नाके से लेकर सीईटीपी तक डाली गई पाइपलाइन अब पूरी तरह जर्जर हो चुकी है। फैक्ट्री संचालकों के द्वारा किए गए अवैध कनेक्शनाें और केमिकलयुक्त पानी बहाने के कारण सरिया गल गया है, जिससे आरसीसी सीमेंट की पाइप की मजबूती लगभग खत्म होने वाली है। 26 जून को सेक्टर-29 में सीवरेज लीक हो गया था।
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पाइपलाइन की मरम्मत होने के बाद लोगों ने राहत की सांस ली। इस पाइपलाइन से रेलवे लाइन से पूर्व दिशा की ओर वाले पूरे शहर की निकासी निर्भर है। वार्ड नंबर एक से 14 तक की कॉलोनियों तक का सीवरेज पानी सीटीपी तक भेजा जाता है।
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अगर घटनास्थल या इसके आसपास की पाइपलाइन में दोबारा लीकेज होती है, या जमीन धंसती है तो निगम अधिकारियों की परेशानी बढ़ जाएगी। जर्जर हो चुकी इस पाइपलाइन को बदलने के लिए टेंडर निकालने और कामकाज पूरा कराने में कई महीने लग सकते हैं। आधे शहर की निकासी व्यवस्था ठप होने का खतरा है।