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Panipat News: बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर न होना चुनौती, सरकार करे समाधान
Wed, 17 Sep 2025 12:49 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, पानीपत
संवाद न्यूज एजेंसी, पानीपत
Updated Wed, 17 Sep 2025 12:49 AM IST
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भीम राणा।
- फोटो : दीवानी कचेहरी परिसर में आयोजित हिंदी दिवस सप्ताह कार्यक्रम में मौजूद जिला जज व अन्य।
एमएसएमई फॉर भारत मंथन में उद्यमियों ने बताई परेशानियां, ऊर्जा एवं श्रम मंत्री अनिल विज ने समस्या के समाधान का दिया आश्वासन
संवाद न्यूज एजेंसी
पानीपत। अमर उजाला के एमएसएमई फॉर भारत मंथन में उद्यमियों ने उद्योगों के सामने आने वाली चुनौतियों पर चर्चा की। उद्यमियों ने कहा कि बाजार में आने से पहले उद्योग लगाने में भी कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता है। इन्हीं छोटी-छोटी समस्याओं के चलते अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मंडी में पिछड़ जाते हैं। इनका समाधान सरकार के स्तर पर ही हो सकता है। उद्यमी कई बार सरकार के सामने अपनी बात रख चुके हैं मगर अभी इनका समाधान बाकी है। अमेरिका के 50 प्रतिशत टैरिफ लगाने के बाद उद्यमियों के सामने चुनौती और बढ़ गई है। इस समय उद्यमियों को सरकार से और उम्मीद बढ़ गई हैं।
एमएसएमई कॉन्क्लेव में ऊर्जा एवं श्रम मंत्री अनिल विज वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से जुड़े। उन्होंने उद्यमियों के काम की सराहना की और उनकी सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योगों से संबंधित समस्याओं को सरकार तक पहुंचाने और समाधान का आश्वासन दिया। उद्योगपतियों ने अपनी समस्याओं को उनके सामने रखा। औद्याेगिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने अपनी बात प्रमुखता से रखी। मौके पर हरियाणा चैंबर ऑफ कॉमर्स के प्रदेशाध्यक्ष विनोद खंडेलवाल, निर्यातक अतुल मित्तल, राकेश चुघ, रामनिवास गुप्ता, नीलांबर सिंह, नवनीत गोयल, अश्वनी शर्मा, गुलशन मल्होत्रा मौजूद रहे।
एमएसएमई में स्वीकृति का काम धीमा
हरियाणा चैंबर ऑफ कॉमर्स पानीपत चैप्टर के प्रधान विनोद धमीजा ने कहा कि एमएसएमई में स्वीकृति का काम धीमे से होता है। यह उद्यमियों की मुख्य समस्या है। इसे गति देने की जरूरत है। बिजली और इंफ्रास्ट्रक्चर उद्योगों की जरूरत है, इसलिए सरकार को प्रदेश में बिजली 100 किलोवाट तक करनी चाहिए। निर्यातकों के सामने अमेरिका के 50 प्रतिशत टैरिफ लगाने के बाद एक और बड़ी चुनौती आ गई है। सरकार उनको मूलभूत सुविधा बेहतर तरीके से दे तो उनको काफी सहयोग मिल सकता है।
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बाजार की जरूरत पर अध्ययन जरूरी
इंडस्टि्रल एस्टेट एसोसिएशन सेक्टर-29-एक के प्रधान श्रीभगवान अग्रवाल ने एमएसएमई फंडिंग और फ्यूचर विषय पर अपनी बात कही। उन्होंने कहा कि भारत चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन चुका है। इसके दो कारक हैं। एक आत्मनिर्भर भारत और दूसरा मेक इन इंडिया। एक उद्योग लगाने से बाजार तक पहुंचने में बड़ी मेहनत लगती है। बाजार में सामान बेचना एक छोटा सा हिस्सा है। उद्योग स्थापित करने से पहले उस पर अध्ययन, लागत, वस्तु तय करना बड़ा विषय है। बाजार की जरूरत पर अध्ययन करना जरूरी है। उद्योग लगाने से पहले समय, स्थान, बाजार और ब्रांड का अध्ययन करना जरूरी है। लॉन्च क्षेत्र के बारे में उस चीज की उपयोगिता, जरूरत का पता होना चाहिए। एमएसएमई को सरकार को प्रोत्साहन देना चाहिए।
हमारी चुनौती चीन से है, सहयोग करे सरकार
हरियाणा एनवायरमेंट मैनेजमेंट सोसायटी के प्रदेशाध्यक्ष भीम राणा ने रिटेल अपडेट और इंडस्ट्री विषय पर अपनी बात कही। उन्होंने कहा कि हमें कुछ करने से पहले देखना चाहिए कि हमारे सामने क्या है? हमारी चुनौती चीन से है। जिस प्रकार चीन की सरकार उद्योगपतियों को सहयोग करती है, उसी प्रकार देश में सरकार को उद्योगपतियों का सहयोग करना चाहिए। सरकार को सड़क, पानी, भवन निर्माण, बिजली में सहयोग करना चाहिए। इसके साथ ही उद्योगपतियों के साथ समन्वय कर उनकी समस्या का हल निकालना चाहिए। यह आज के समय की बड़ी जरूरत है।
कोट्स फोटो-
उत्पादन व गुणवत्ता पर ध्यान रखना जरूरी
पानीपत डायर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष नीतिन अरोड़ा ने इनोवेटिव फाइनेंस पर कहा कि चीन में उद्योगपतियों को बहुत सहयोग मिलता है। वहां इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए ज्यादा इंतजार नहीं करना पड़ता। सरकार अपने स्तर के काम पूरा कर देती है। उद्यमियों को अपने उत्पादन और उसकी गुणवत्ता पर ध्यान रखना होता है। इसी तरह का इंफ्रास्ट्रक्चर यहां भी मिलना चाहिए। सरकार से सहयोग मिलने पर उद्यमी और बेहतर कर सकते हैं। इससे उद्योगपतियों को आगे बढ़ने में सहयोग मिलेगा।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई मंडी तलाशनी होगी
हैंडलूम एक्सपोर्ट मैन्युफैक्चरर एसोसिएशन के प्रधान रमेश वर्मा ने लोकल से ग्लोबल विषय पर बात रखी। उन्होंने कहा कि पानीपत में 95 प्रतिशत से ज्यादा एमएसएमई हैं। अमेरिका के टैरिफ से उनको ज्यादा दिक्कत आ रही है। इस स्थिति में सरकार का सहयोग जरूरी है। इसके बिना उद्योग जल्द बंद होने के कगार पर आ जाएगा। इसको फिर से स्थापित करना या उठाना मुश्किल हो जाएगा। सरकार एमएसएमई के लिए जल्द कोई सकारात्मक कदम उठाए। इसमें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई मंडी तलाशने के साथ व्यापारियों से परिचय कराना भी जरूरी है।
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संवाद न्यूज एजेंसी
पानीपत। अमर उजाला के एमएसएमई फॉर भारत मंथन में उद्यमियों ने उद्योगों के सामने आने वाली चुनौतियों पर चर्चा की। उद्यमियों ने कहा कि बाजार में आने से पहले उद्योग लगाने में भी कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता है। इन्हीं छोटी-छोटी समस्याओं के चलते अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मंडी में पिछड़ जाते हैं। इनका समाधान सरकार के स्तर पर ही हो सकता है। उद्यमी कई बार सरकार के सामने अपनी बात रख चुके हैं मगर अभी इनका समाधान बाकी है। अमेरिका के 50 प्रतिशत टैरिफ लगाने के बाद उद्यमियों के सामने चुनौती और बढ़ गई है। इस समय उद्यमियों को सरकार से और उम्मीद बढ़ गई हैं।
एमएसएमई कॉन्क्लेव में ऊर्जा एवं श्रम मंत्री अनिल विज वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से जुड़े। उन्होंने उद्यमियों के काम की सराहना की और उनकी सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योगों से संबंधित समस्याओं को सरकार तक पहुंचाने और समाधान का आश्वासन दिया। उद्योगपतियों ने अपनी समस्याओं को उनके सामने रखा। औद्याेगिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने अपनी बात प्रमुखता से रखी। मौके पर हरियाणा चैंबर ऑफ कॉमर्स के प्रदेशाध्यक्ष विनोद खंडेलवाल, निर्यातक अतुल मित्तल, राकेश चुघ, रामनिवास गुप्ता, नीलांबर सिंह, नवनीत गोयल, अश्वनी शर्मा, गुलशन मल्होत्रा मौजूद रहे।
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एमएसएमई में स्वीकृति का काम धीमा
हरियाणा चैंबर ऑफ कॉमर्स पानीपत चैप्टर के प्रधान विनोद धमीजा ने कहा कि एमएसएमई में स्वीकृति का काम धीमे से होता है। यह उद्यमियों की मुख्य समस्या है। इसे गति देने की जरूरत है। बिजली और इंफ्रास्ट्रक्चर उद्योगों की जरूरत है, इसलिए सरकार को प्रदेश में बिजली 100 किलोवाट तक करनी चाहिए। निर्यातकों के सामने अमेरिका के 50 प्रतिशत टैरिफ लगाने के बाद एक और बड़ी चुनौती आ गई है। सरकार उनको मूलभूत सुविधा बेहतर तरीके से दे तो उनको काफी सहयोग मिल सकता है।
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बाजार की जरूरत पर अध्ययन जरूरी
इंडस्टि्रल एस्टेट एसोसिएशन सेक्टर-29-एक के प्रधान श्रीभगवान अग्रवाल ने एमएसएमई फंडिंग और फ्यूचर विषय पर अपनी बात कही। उन्होंने कहा कि भारत चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन चुका है। इसके दो कारक हैं। एक आत्मनिर्भर भारत और दूसरा मेक इन इंडिया। एक उद्योग लगाने से बाजार तक पहुंचने में बड़ी मेहनत लगती है। बाजार में सामान बेचना एक छोटा सा हिस्सा है। उद्योग स्थापित करने से पहले उस पर अध्ययन, लागत, वस्तु तय करना बड़ा विषय है। बाजार की जरूरत पर अध्ययन करना जरूरी है। उद्योग लगाने से पहले समय, स्थान, बाजार और ब्रांड का अध्ययन करना जरूरी है। लॉन्च क्षेत्र के बारे में उस चीज की उपयोगिता, जरूरत का पता होना चाहिए। एमएसएमई को सरकार को प्रोत्साहन देना चाहिए।
हमारी चुनौती चीन से है, सहयोग करे सरकार
हरियाणा एनवायरमेंट मैनेजमेंट सोसायटी के प्रदेशाध्यक्ष भीम राणा ने रिटेल अपडेट और इंडस्ट्री विषय पर अपनी बात कही। उन्होंने कहा कि हमें कुछ करने से पहले देखना चाहिए कि हमारे सामने क्या है? हमारी चुनौती चीन से है। जिस प्रकार चीन की सरकार उद्योगपतियों को सहयोग करती है, उसी प्रकार देश में सरकार को उद्योगपतियों का सहयोग करना चाहिए। सरकार को सड़क, पानी, भवन निर्माण, बिजली में सहयोग करना चाहिए। इसके साथ ही उद्योगपतियों के साथ समन्वय कर उनकी समस्या का हल निकालना चाहिए। यह आज के समय की बड़ी जरूरत है।
कोट्स फोटो-
उत्पादन व गुणवत्ता पर ध्यान रखना जरूरी
पानीपत डायर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष नीतिन अरोड़ा ने इनोवेटिव फाइनेंस पर कहा कि चीन में उद्योगपतियों को बहुत सहयोग मिलता है। वहां इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए ज्यादा इंतजार नहीं करना पड़ता। सरकार अपने स्तर के काम पूरा कर देती है। उद्यमियों को अपने उत्पादन और उसकी गुणवत्ता पर ध्यान रखना होता है। इसी तरह का इंफ्रास्ट्रक्चर यहां भी मिलना चाहिए। सरकार से सहयोग मिलने पर उद्यमी और बेहतर कर सकते हैं। इससे उद्योगपतियों को आगे बढ़ने में सहयोग मिलेगा।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई मंडी तलाशनी होगी
हैंडलूम एक्सपोर्ट मैन्युफैक्चरर एसोसिएशन के प्रधान रमेश वर्मा ने लोकल से ग्लोबल विषय पर बात रखी। उन्होंने कहा कि पानीपत में 95 प्रतिशत से ज्यादा एमएसएमई हैं। अमेरिका के टैरिफ से उनको ज्यादा दिक्कत आ रही है। इस स्थिति में सरकार का सहयोग जरूरी है। इसके बिना उद्योग जल्द बंद होने के कगार पर आ जाएगा। इसको फिर से स्थापित करना या उठाना मुश्किल हो जाएगा। सरकार एमएसएमई के लिए जल्द कोई सकारात्मक कदम उठाए। इसमें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई मंडी तलाशने के साथ व्यापारियों से परिचय कराना भी जरूरी है।

भीम राणा।- फोटो : दीवानी कचेहरी परिसर में आयोजित हिंदी दिवस सप्ताह कार्यक्रम में मौजूद जिला जज व अन्य।

भीम राणा।- फोटो : दीवानी कचेहरी परिसर में आयोजित हिंदी दिवस सप्ताह कार्यक्रम में मौजूद जिला जज व अन्य।

भीम राणा।- फोटो : दीवानी कचेहरी परिसर में आयोजित हिंदी दिवस सप्ताह कार्यक्रम में मौजूद जिला जज व अन्य।