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भगवान की लीला को जानना ही सच्चा धर्म परमार्थ : धीरेंद्र शास्त्री
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पानीपत। बागेश्वर धाम सरकार पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री मंगलवार को अंसल सिटी स्थित बांके बिहारी श्री ज्ञानेश्वर मंदिर पहुंचे। इस अवसर पर बांके बिहारी श्री ज्ञानेश्वर मंदिर समिति ने उनका अभिनंदन किया। यहां पहुंचने पर भाजपा प्रत्याशी पूर्व मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने उनका स्वागत किया। पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने धार्मिक आधार पर वोट की अपील की। उन्होंने कहा कि हमें उनको वोट करनी चाहिए जो सनातन को बढ़ावा दें। जिनके हाथ में सनातन सुरक्षित हो उनको वोट देनी चाहिए। यहां पहुंचने पर पूर्व मुख्यमंत्री मनोहर लाल काफी उत्साहित दिखे।
शास्त्री ने कहा कि भगवान की लीला को जानना ही सच्चा धर्म परमार्थ है। जो लीला का स्वरूप पहले था, वो सार्वजनिक नहीं था। उन्हाेंने कहा कि कृष्ण के स्वरूप में बड़ी सामर्थ्य है। उस स्वरूप में ही सामर्थ्य है। बड़ी मर्यादा के साथ पहले लीला होती थी। उन्होंने कहा कि जब प्यास लगती है, तभी पानी का महत्व समझ में आता है। ठीक उसी प्रकार भगवान के श्रीचरणों में स्थान प्राप्त करने के लिए हृदय से प्रभु को स्मरण करने की आवश्यकता है। किसी ने भगवान को देखा तो नहीं है, लेकिन भगवान की कथा सुनने मात्र से ही मन के सारे विकार नष्ट हो जाते हैं। शास्त्रों में कहा गया है कि प्रारब्ध अवश्यमेव भोक्तव्यम। ईश्वर की भक्ति अथवा संत-सद्गुरु के प्रभाव से प्रारब्ध की तीक्ष्णता को कम किया जा सकता है।
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शास्त्री ने कहा कि भगवान की लीला को जानना ही सच्चा धर्म परमार्थ है। जो लीला का स्वरूप पहले था, वो सार्वजनिक नहीं था। उन्हाेंने कहा कि कृष्ण के स्वरूप में बड़ी सामर्थ्य है। उस स्वरूप में ही सामर्थ्य है। बड़ी मर्यादा के साथ पहले लीला होती थी। उन्होंने कहा कि जब प्यास लगती है, तभी पानी का महत्व समझ में आता है। ठीक उसी प्रकार भगवान के श्रीचरणों में स्थान प्राप्त करने के लिए हृदय से प्रभु को स्मरण करने की आवश्यकता है। किसी ने भगवान को देखा तो नहीं है, लेकिन भगवान की कथा सुनने मात्र से ही मन के सारे विकार नष्ट हो जाते हैं। शास्त्रों में कहा गया है कि प्रारब्ध अवश्यमेव भोक्तव्यम। ईश्वर की भक्ति अथवा संत-सद्गुरु के प्रभाव से प्रारब्ध की तीक्ष्णता को कम किया जा सकता है।
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