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Panipat News: घुटने टूट गए फिर भी नहीं बना मेडिकल
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संवाद न्यूज एजेंसी
पानीपत। जिला नागरिक अस्पताल में ग्रुप-डी के मेडिकल के लिए उम्मीदवारों के तीन से चार दिन तक लग रहे हैं। इस पर भी उनके मेडिकल नहीं बन पा रहे हैं। ऐसे में उम्मीदवार थक हारकर अस्पताल में नीचे ही बैठने को मजबूर हैं। उम्मीदवारों का कहना है कि सुबह आठ से शाम पांच बजे तक भी नंबर नहीं आता। ऐसे में अगले दिन फिर से आठ बजे से पहले ही अस्पताल पहुंचना पड़ता है। तब भी जांच न होने के कारण चक्कर काटने पड़ रहे हैं।
जिले में 320 उम्मीदवारों काे ग्रुप-डी के मेडिकल जांच के लिए भेजा है। अस्पताल में एक दिन में 40 से 45 की ही मेडिकल जांच हो पा रही है। युवाओं को लगातार तीन-चार दिन अस्पताल व अधिकारियों के चक्कर काटने पड़ रहे हैं। सिवाह गांव की मनीषा ने बताया कि वह अपने पिता सतबीर के साथ शुक्रवार को अस्पताल में ग्रुप-डी के लिए मेडिकल जांच कराने के लिए आई थी। शुक्रवार को जांच नहीं हो पाई। वह शनिवार को अपने पिता के साथ दोबारा अस्पताल में आई। शनिवार को दोपहर दो बजे तक ही चिकित्सक बैठने के चलते चिकित्सकों के हस्ताक्षर आदि ही हो पाए।
रविवार को अस्पताल की छुट्टी होने के कारण उसे सोमवार को तीसरे दिन अस्पताल में मेडिकल जांच के लिए आना पड़ा। वह सोमवार को भी सुबह आठ बजे अस्पताल में आ गए थे।
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दोपहर दो बजे तक मेडिकल नहीं बन पाया। उनको भागदौड़ करने के बाद भी निराशा हाथ लग रही है।
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पानीपत। जिला नागरिक अस्पताल में ग्रुप-डी के मेडिकल के लिए उम्मीदवारों के तीन से चार दिन तक लग रहे हैं। इस पर भी उनके मेडिकल नहीं बन पा रहे हैं। ऐसे में उम्मीदवार थक हारकर अस्पताल में नीचे ही बैठने को मजबूर हैं। उम्मीदवारों का कहना है कि सुबह आठ से शाम पांच बजे तक भी नंबर नहीं आता। ऐसे में अगले दिन फिर से आठ बजे से पहले ही अस्पताल पहुंचना पड़ता है। तब भी जांच न होने के कारण चक्कर काटने पड़ रहे हैं।
जिले में 320 उम्मीदवारों काे ग्रुप-डी के मेडिकल जांच के लिए भेजा है। अस्पताल में एक दिन में 40 से 45 की ही मेडिकल जांच हो पा रही है। युवाओं को लगातार तीन-चार दिन अस्पताल व अधिकारियों के चक्कर काटने पड़ रहे हैं। सिवाह गांव की मनीषा ने बताया कि वह अपने पिता सतबीर के साथ शुक्रवार को अस्पताल में ग्रुप-डी के लिए मेडिकल जांच कराने के लिए आई थी। शुक्रवार को जांच नहीं हो पाई। वह शनिवार को अपने पिता के साथ दोबारा अस्पताल में आई। शनिवार को दोपहर दो बजे तक ही चिकित्सक बैठने के चलते चिकित्सकों के हस्ताक्षर आदि ही हो पाए।
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रविवार को अस्पताल की छुट्टी होने के कारण उसे सोमवार को तीसरे दिन अस्पताल में मेडिकल जांच के लिए आना पड़ा। वह सोमवार को भी सुबह आठ बजे अस्पताल में आ गए थे।
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दोपहर दो बजे तक मेडिकल नहीं बन पाया। उनको भागदौड़ करने के बाद भी निराशा हाथ लग रही है।