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जिनको भारत में डर लगता है.. तालिबान ने दावत देकर, उन्हें अपने यहां बुलाया है

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Tue, 31 Aug 2021 01:44 AM IST
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jinako bhaarat mein dar lagata hai.. taalibaan ne daavat dekar, unhen apane yahaan bulaaya hai
पानीपत।जीवन एक बहता दरिया साहित्यिक समूह के सौजन्य से ऑनलाइन कवि सम्मेलन आयोजित किया गया। जिसमें देश के चुनिंदा कवियों ने सम्मिलित होकर प्रभावी कविताओं के माध्यम से समा बांधा। इस कवि सम्मेलन की अध्यक्षता पानीपत के वरिष्ठ कवि हरगोबिंद झाम्ब कमल ने की। मुख्य अतिथि केसर कमल शर्मा कमल पानीपत रहे। सानिध्य अतिथि की भूमिका में शामली के ओजस्वी कवि प्रीतम सिंह प्रीतम रहे। कार्यक्रम का संचालन असंध करनाल के वरिष्ठ कवि भारत भूषण वर्मा ने किया।
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हर गोबिंद झांब ने सुनाया- जिनको भारत में डर लगता है, मौका सुनहरा आया है। तालिबानी ने दावत दे कर, उन्हें अपने यहां बुलाया है। कौड़ी-भाव मकान मिल रहे, ना डर, ना खौफ का साया है। अवार्ड वापसी-गैंग विद्वानों का, ऊंचा मोल लगाया है। केसर कमल शर्मा ने रचना पढ़ी- तुम पर खुदा की होगी रहमत, यकीन है। चमकेगी एक दिन यह किस्मत, यकीन है। दामन में आप सबके खुशियों के फूल होंगे, रंग लाएगी तुम्हारी, मेहनत, यकीन है। इसी प्रकार प्रीतम सिंह ने सुनाया- जिस बगिया की टहनी- टहनी, शूलों- मंडित होती है। उसके तिनके- तिनके से, मानवता खंडित होती है।
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भारत भूषण वर्मा ने रचना सुनाई- कुछ की मंजिल है दूर बड़ी, कुछ की मंजिल है पास खड़ी। कुछ जीवन हैं रस की लहरें, कुछ में अवसाद भरे गहरे। सब भाग्य कर्म का लेखा है, जो लिखा वही बस पाना है । जीवन एक बहता दरिया है, सागर में बहते जाना है। आभा मुकेश साहनी ने सुनाया- कान्हा जी खेल रहे होली, गोपियां मंद-मंद मुस्काए। प्रीत से भर पिचकारी को, कान्हा जी अबीर गुलाल गुलाल उड़ाए। सोनिया अक्स पानीपत ने कहा- ‘तनहा- तनहा दिन कटा करवट रात। झर- झर नैना बरस उठे कैसी यह बरसात। शीला गहलावत ने सुनाया- धरती मां है हरी-भरी, सघन सुगंधित वात। छाया दें- फल- फूल, है प्रभु की खैरात।
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बी सोनी ने रचना सुनाई- कैसा हो जीवन आग़ाज, कैसा अंजाम होगा। क्या जमीं को छोड़, आसमां पर मुकाम होगा। खुशफहमियां न पाल, ना फक्र कर खाक पर, कब थम जाए सांस, आखिरी पैगाम होगा। हरिनाथ शुक्ल ने सुनाया- खींचकर पाप से, मुक्त कर शाप से, मीत जीवन करें पवित्र जो मन को महका दे मित्र जो, मेरी नजरों में है मित्र वो। आशा दिनकर ने रचना सुनाई- तजकर माया मोह को सदा रहो खुशहाल। भाव प्रेम का राखिए , दुख में दीनदयाल। इसी क्रम में प्रेमलता साहू ने सुनाया- प्रदूषित करता जलता कोयला, निकलता हुआ धुआं, ढेर तेरे किनारे कूड़ा करकट गंदगी का ,फिर भी तू क्षमामयी है, मोक्ष प्रदायिनी है।
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