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यह खेल भावना है, मैंने नदीम से भाला फेंकने के लिए लिया था : नीरज चोपड़ा
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पाकिस्तानी खिलाड़ी नदीम से भाला लेने को गलत न समझें, यह खेल भावना है। नदीम ने अभ्यास करने के लिए मेरा भाला लिया था, फिर मैंने अपने थ्रो के लिए भाला उनसे वापस ले लिया था। जो कोई बड़ी बात नहीं है। इस बात को मेरा नाम लेकर ज्यादा न बढ़ाएं। यह शब्द ओलंपिक में स्वर्ण पदक जीतने वाले भाला फेंक खिलाड़ी नीरज चोपड़ा ने कहे। वे रविवार को गांव पसीना खुर्द में उत्तराखंड के डीजीपी और गांव कुराना खुर्द निवासी अशोक कुमार द्वारा आयोजित स्वागत कार्यक्रम में पहुंचे थे।
नीरज चोपड़ा इस दौरान कुछ मिनटों के लिए स्टेज पर आए और लोगों को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि गांव वासियों को अशोक कुमार से सीख लेनी चाहिए, जो छोटे से गांव में जन्म लेने के बाद उत्तराखंड के डीजीपी के पद पर रहकर हरियाणा के साथ ही उत्तराखंड में भी अपनी अलग पहचान बना चुके हैं।
रविवार को भी मां से नहीं मिल पाए नीरज
ओलंपिक में स्वर्ण पदक जीतने के बाद नीरज चोपड़ा दूसरी बार पानीपत आए, लेकिन इस बार भी वह अपने घर नहीं जा पाए। नीरज पहली बार अपने गांव के स्वागत कार्यक्रम में ही आए थे, जहां उनकी तबीयत खराब होने के कारण उन्हें गांव से जल्दी जाना पड़ा था। इस कारण वे न तो अपने घर जा पाए थे और न ही मां सरोज चोपड़ा से मिल पाए थे। रविवार को उनके पिता सतीश चोपड़ा और चाचा भीम चोपड़ा ही गांव कुराना खुर्द पहुंचे, मां से एक बार फिर मुलाकात नहीं हो सकी।
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नीरज चोपड़ा इस दौरान कुछ मिनटों के लिए स्टेज पर आए और लोगों को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि गांव वासियों को अशोक कुमार से सीख लेनी चाहिए, जो छोटे से गांव में जन्म लेने के बाद उत्तराखंड के डीजीपी के पद पर रहकर हरियाणा के साथ ही उत्तराखंड में भी अपनी अलग पहचान बना चुके हैं।
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रविवार को भी मां से नहीं मिल पाए नीरज
ओलंपिक में स्वर्ण पदक जीतने के बाद नीरज चोपड़ा दूसरी बार पानीपत आए, लेकिन इस बार भी वह अपने घर नहीं जा पाए। नीरज पहली बार अपने गांव के स्वागत कार्यक्रम में ही आए थे, जहां उनकी तबीयत खराब होने के कारण उन्हें गांव से जल्दी जाना पड़ा था। इस कारण वे न तो अपने घर जा पाए थे और न ही मां सरोज चोपड़ा से मिल पाए थे। रविवार को उनके पिता सतीश चोपड़ा और चाचा भीम चोपड़ा ही गांव कुराना खुर्द पहुंचे, मां से एक बार फिर मुलाकात नहीं हो सकी।
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