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देश की साख बचाना हमारा फर्ज, सरकार बॉयलर को पीएनजी पर शिफ्ट करने के लिए दे एक साल का वक्त- रमन

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sun, 02 Oct 2022 11:30 PM IST
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It is our duty to save the reputation of the country, the government should give one year time to shift the boiler to PNG: Raman
पानीपत। कमीशन फॉर एयर क्वालिटी मैनेजमेंट ने 30 सितंबर के बाद कोयला संचालित उद्योगों को बंद करने के निर्देश जारी कर दिए। 500 डाइंग यूनिट और 100 कंबल प्लांट बंद हो गए। इससे पानीपत का निर्यात ठप हो गया। केमिकल, पैकेजिंग, धागा और बेडशीट समेत तमाम उद्योग प्रभावित हो रहे हैं। ये सभी उद्योग डाइंग यूनिट पर निर्भर हैं। ऐसे में आने वाले समय में पानीपत में चल रहे 20 हजार उद्योग पूरी तरह प्रभावित होंगे। इससे आहत यंग इंटरप्रेन्योर सोसायटी ने रविवार शाम को सेक्टर 25 स्थित होटल में आपात बैठक बुलाई। उद्यमियों ने सरकार से मांग की कि वे इस मामले में हस्तक्षेप करें। उद्योगों को चलने की अनुमति दी जाए। बॉयलर को पीएनजी पर शिफ्ट करने के लिए दो साल तक का वक्त दिया जाए। सोसायटी ने यहां सीएक्यूएम को चेताते हुए कहा कि 13 अक्तूबर के बाद सोसायटी भी आंदोलन में शामिल होगी। सभी औद्योगिक संगठन एक मंच पर आकर फैसले का विरोध करेंगे। उद्यमियों ने देश की साख पर सवाल उठाते हुए कहा कि देश की साख बचाना उनका फर्ज है, इसलिए विदेशियों को समय पर उनका माल मिलना चाहिए। इसलिए उद्योगों को बंद न किया जाए।
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यस के अध्यक्ष रमन छाबड़ा ने कहा कि पूरा विश्व आर्थिक मंदी से गुजर रहा है। अमेरिका में यहां का 10 हजार करोड़ का एक्सपोर्ट होता है। यूरोपियन देशों में भी पानीपत का माल जाता है। वहां माल के खरीदार नहीं मिल रहे हैं। इसलिए वे आर्थिक मंदी के दौर से गुजर रहे हैं। उनके लिए हर एक ऑर्डर महत्वपूर्ण है। उनको देश की साख की भी चिंता है। इसलिए उन्हें उद्योग चलाने की अनुमति दी जाए। लाखों लोग बेरोजगारी के कगार पर हैं।
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यस के सचिव मनीष गर्ग ने कहा कि बॉयलर को पीएनजी पर शिफ्ट करने में 50 लाख से अधिक का खर्च आएगा। उद्यमी पहले ही आर्थिक मंदी के दौर से गुजर रहे हैं। पीएनजी बॉयलर के बर्नर नहीं मिल रहे हैं। इनकी एक-एक साल की वेटिंग है। ऐसे में वो पीएनजी पर बॉयलर कैसे लेकर आएं। उन्हें एसपीएम में छूट दी जाए। एसपीएम 300 निर्धारित किया जाए। 80 एसपीएम अभी संभव नहीं है। वे जल्द ही इस संबंध में सांसद व विधायक से भी मिलेंगे।
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उप प्रधान राजेश गुप्ता ने कहा कि पानीपत को जल्द एनसीआर से बाहर करना चाहिए। एनसीआर में होना पानीपत का सबसे बड़ा नुकसान है। अगर सरकार उनकी मांगें नहीं मानती है तो 13 अक्तूबर के बाद सभी औद्योगिक संगठन एक मंच पर आकर आंदोलन शुरू करेंगे। बैठक में राहुल जैन, गौरव गुप्ता व सिद्धार्थ धमीजा मुख्य रूप से मौजूद रहे।
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