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Panipat News: आपराधिक रिकॉर्ड छिपाने के आरोपों की जांच शुरू
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समालखा। निर्वाचन आयोग के आदेश पर एसडीएम समालखा ने पालिका चेयरमैन अशोक कुच्छल द्वारा चुनाव के दौरान नामांकन फार्म में आपराधिक रिकॉर्ड छिपानों के आरोपों की जांच शुरू कर दी है। राज्य निर्वाचन आयोग ने डीसी डॉ. वीरेंद्र दहिया से पालिका चेयरमैन अशोक कुच्छल द्वारा चुनाव के दौरान नामांकन फॉर्म में आपराधिक रिकॉर्ड छिपाकर चुनाव लड़ने के आरोपों की जांच तलब की है।
डीसी के आदेश पर एसडीएम अमित कुमार ने पालिका चेयरमैन अशोक कुच्छल, शिकायत कर्ता पीपी कपूर व पालिका सचिव को सोमवार को अपने कार्यालय में बुलाकर आरोपों की जांच शुरू की। यह जांच आरटीआई कार्यकर्ता कॉमरेड पीपी कपूर ने तीन वर्ष पहले 11 जून 2022 को राज्य निर्वाचन आयोग को दी गई शिकायत पर उपायुक्त वीरेंद्र दहिया के आदेश पर शुरु की गई है।
आरटीआई कार्यकर्ता कॉमरेड पीपी कपूर ने बताया कि उन्होंने तीन वर्ष पहले चुनाव आयोग को शिकायत देकर अशोक कुच्छल का चुनाव रद्द करने की मांग की थी। पीपी कपूर ने एसडीएम अमित कुमार को बताया कि अशोक कुच्छल ने नगर पालिका प्रधान पद के चुनाव में अपने नामांकन पत्र में अपना आपराधिक रिकॉर्ड जान बूझ कर छिपा लिया।
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वरना इनका नामांकन तभी रद्द हो जाता और यह चुनाव ही न लड़ पाता। क्योंकि आठ वर्ष पहले छह नवंबर 2017 को कुच्छल को समालखा पुलिस एफआईआर नंबर 713 में भारतीय दंड संहिता की धारा 109/115/116/120-बी, 195/211/384/388/389 के तहत गिरफ्तार किया था। मामला अभी कोर्ट में लंबित है। पालिका चुनाव के नियमों के मुताबिक ऐसे संगीन जुर्म का कोई भी आरोपी चेयरमैन और पार्षद तक का चुनाव नहीं लड़ सकता। तीन साल तक सरकार उनकी शिकायत को दबा कर बैठी रही। कोइ जांच नहीं की।
दूसरी तरफ पालिका चेयरमैन अशोक कुच्छल ने बताया कि शिकायत कर्ता पीपी कपूर ने समालखा कोर्ट में उनका चुनाव रद्द कराने के लिए केस डाला था। जिस पर उन्होंने हाई कोर्ट से स्टे ले लिया था।
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डीसी के आदेश पर एसडीएम अमित कुमार ने पालिका चेयरमैन अशोक कुच्छल, शिकायत कर्ता पीपी कपूर व पालिका सचिव को सोमवार को अपने कार्यालय में बुलाकर आरोपों की जांच शुरू की। यह जांच आरटीआई कार्यकर्ता कॉमरेड पीपी कपूर ने तीन वर्ष पहले 11 जून 2022 को राज्य निर्वाचन आयोग को दी गई शिकायत पर उपायुक्त वीरेंद्र दहिया के आदेश पर शुरु की गई है।
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आरटीआई कार्यकर्ता कॉमरेड पीपी कपूर ने बताया कि उन्होंने तीन वर्ष पहले चुनाव आयोग को शिकायत देकर अशोक कुच्छल का चुनाव रद्द करने की मांग की थी। पीपी कपूर ने एसडीएम अमित कुमार को बताया कि अशोक कुच्छल ने नगर पालिका प्रधान पद के चुनाव में अपने नामांकन पत्र में अपना आपराधिक रिकॉर्ड जान बूझ कर छिपा लिया।
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वरना इनका नामांकन तभी रद्द हो जाता और यह चुनाव ही न लड़ पाता। क्योंकि आठ वर्ष पहले छह नवंबर 2017 को कुच्छल को समालखा पुलिस एफआईआर नंबर 713 में भारतीय दंड संहिता की धारा 109/115/116/120-बी, 195/211/384/388/389 के तहत गिरफ्तार किया था। मामला अभी कोर्ट में लंबित है। पालिका चुनाव के नियमों के मुताबिक ऐसे संगीन जुर्म का कोई भी आरोपी चेयरमैन और पार्षद तक का चुनाव नहीं लड़ सकता। तीन साल तक सरकार उनकी शिकायत को दबा कर बैठी रही। कोइ जांच नहीं की।
दूसरी तरफ पालिका चेयरमैन अशोक कुच्छल ने बताया कि शिकायत कर्ता पीपी कपूर ने समालखा कोर्ट में उनका चुनाव रद्द कराने के लिए केस डाला था। जिस पर उन्होंने हाई कोर्ट से स्टे ले लिया था।