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Panipat News: बीमा कंपनी ने क्लेम किया खारिज आयोग ने दिया चुकाने का आदेश
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पानीपत। जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने नील गाय आने पर क्षतिग्रस्त कार का क्लेम न देने के एक मामले में बीमा कंपनी को तगड़ा झटका दिया है। पानीपत-जींद रोड पर नीलगाय के सामने आने से क्षतिग्रस्त हुई कार के मामले में आयोग ने बीमा कंपनी की दलीलों को सिरे से खारिज कर दिया है।
आयोग ने इसे सीधे तौर पर सेवा में कमी मानते हुए कंपनी को 4.53 लाख रुपये का क्लेम दो प्रतिशत वार्षिक ब्याज के साथ शिकायतकर्ता को चुकाने के सख्त आदेश दिए हैं। शोंधापुर के मुकेश ने जिला उपभोक्ता आयोग में न्याय की गुहार लगाते हुए एक याचिका दाखिल की थी। शिकायतकर्ता ने बताया कि उनके पास महिंद्रा एक्सयूवी-500 कार थी।
इसका वर्ष 2019 तक का पूर्ण बीमा था। 10 फरवरी 2019 को जब वह पानीपत-जींद रोड से गुजर रहे थे तभी अचानक एक नीलगाय उनकी कार के सामने आ गई। इस अप्रत्याशित घटना में उनकी कार बुरी तरह दुर्घटनाग्रस्त हो गई। हादसे के बाद मुकेश ने बीमा कंपनी को सूचना दी और कार की मरम्मत की प्रक्रिया शुरू कराई। बीमा कंपनी ने बाद में उनका क्लेम देने से साफ इनकार कर दिया। उनको जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग में याचिका दायर की।
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सुनवाई के दौरान बीमा कंपनी ने तर्क दिया गया कि दुर्घटना की सूचना उन्हें समय पर नहीं दी गई। साथ ही, इस हादसे की कोई पुलिस एफआईआर भी दर्ज नहीं कराई गई थी। यह पॉलिसी के नियमों और शर्तों का स्पष्ट उल्लंघन है।
इसी आधार पर कंपनी ने क्लेम खारिज करने की कार्रवाई को सही ठहराया।जिला उपभोक्ता आयोग ने दोनों पक्षों की विस्तृत बहस सुनने और पेश किए गए सभी दस्तावेजों का गहराई से अवलोकन करने के बाद अपना अहम फैसला सुनाया।
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आयोग ने इसे सीधे तौर पर सेवा में कमी मानते हुए कंपनी को 4.53 लाख रुपये का क्लेम दो प्रतिशत वार्षिक ब्याज के साथ शिकायतकर्ता को चुकाने के सख्त आदेश दिए हैं। शोंधापुर के मुकेश ने जिला उपभोक्ता आयोग में न्याय की गुहार लगाते हुए एक याचिका दाखिल की थी। शिकायतकर्ता ने बताया कि उनके पास महिंद्रा एक्सयूवी-500 कार थी।
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इसका वर्ष 2019 तक का पूर्ण बीमा था। 10 फरवरी 2019 को जब वह पानीपत-जींद रोड से गुजर रहे थे तभी अचानक एक नीलगाय उनकी कार के सामने आ गई। इस अप्रत्याशित घटना में उनकी कार बुरी तरह दुर्घटनाग्रस्त हो गई। हादसे के बाद मुकेश ने बीमा कंपनी को सूचना दी और कार की मरम्मत की प्रक्रिया शुरू कराई। बीमा कंपनी ने बाद में उनका क्लेम देने से साफ इनकार कर दिया। उनको जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग में याचिका दायर की।
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सुनवाई के दौरान बीमा कंपनी ने तर्क दिया गया कि दुर्घटना की सूचना उन्हें समय पर नहीं दी गई। साथ ही, इस हादसे की कोई पुलिस एफआईआर भी दर्ज नहीं कराई गई थी। यह पॉलिसी के नियमों और शर्तों का स्पष्ट उल्लंघन है।
इसी आधार पर कंपनी ने क्लेम खारिज करने की कार्रवाई को सही ठहराया।जिला उपभोक्ता आयोग ने दोनों पक्षों की विस्तृत बहस सुनने और पेश किए गए सभी दस्तावेजों का गहराई से अवलोकन करने के बाद अपना अहम फैसला सुनाया।