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Panipat News: कार चोरी पर बीमा कंपनी को 4.15 लाख रुपये देने के आदेश
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माई सिटी रिपोर्टर
पानीपत। जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने कार चोरी होने के बाद बीमा क्लेम नहीं देने पर ओरिएंटल इंश्योरेंस कंपनी को सेवा में कोताही का दोषी ठहराया है। आयोग ने कंपनी को शिकायतकर्ता को 4,15,861 रुपये की बीमित राशि नौ प्रतिशत सालाना ब्याज सहित अदा करने के आदेश दिए हैं। ब्याज की गणना शिकायत दर्ज करने की तारीख से भुगतान होने तक की जाएगी।
समालखा के शास्त्री नगर निवासी दिनेश कुमार ने आयोग में शिकायत दर्ज कराई थी कि उनकी ग्रैंड आई10 नियोस कार 25 फरवरी 2025 की शाम दिल्ली के नरेला में माता मनसा मंदिर रोड के पास से चोरी हो गई थी। उन्होंने नरेला थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई और बीमा कंपनी को भी सूचना दी। कार खरीदते समय उन्होंने 2495 रुपये अतिरिक्त प्रीमियम देकर रिटर्न टू इनवॉइस कवर भी लिया था। इसके बावजूद कंपनी ने पूरा बीमा क्लेम देने से इनकार कर दिया।
कंपनी को 45 दिन में भुगतान के निर्देश
आयोग ने बीमा कंपनी को नोटिस जारी कर जवाब मांगा, लेकिन उसकी ओर से कोई प्रतिनिधि पेश नहीं हुआ। इसके बाद आयोग ने 19 मार्च को एकतरफा कार्रवाई शुरू की। जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग के अध्यक्ष डॉ. आरके डोगरा, सदस्य डॉ. रेखा चौधरी और विनीत कौशिक की पीठ ने कंपनी को बीमित राशि के अलावा मानसिक उत्पीड़न के लिए 11 हजार रुपये मुआवजा और 5500 रुपये मुकदमा खर्च देने के निर्देश दिए हैं। आयोग ने आदेश के पालन के लिए कंपनी को 45 दिन का समय दिया है। निर्धारित अवधि में भुगतान नहीं करने पर कंपनी को शिकायतकर्ता को 12 प्रतिशत सालाना ब्याज देना होगा।
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पानीपत। जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने कार चोरी होने के बाद बीमा क्लेम नहीं देने पर ओरिएंटल इंश्योरेंस कंपनी को सेवा में कोताही का दोषी ठहराया है। आयोग ने कंपनी को शिकायतकर्ता को 4,15,861 रुपये की बीमित राशि नौ प्रतिशत सालाना ब्याज सहित अदा करने के आदेश दिए हैं। ब्याज की गणना शिकायत दर्ज करने की तारीख से भुगतान होने तक की जाएगी।
समालखा के शास्त्री नगर निवासी दिनेश कुमार ने आयोग में शिकायत दर्ज कराई थी कि उनकी ग्रैंड आई10 नियोस कार 25 फरवरी 2025 की शाम दिल्ली के नरेला में माता मनसा मंदिर रोड के पास से चोरी हो गई थी। उन्होंने नरेला थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई और बीमा कंपनी को भी सूचना दी। कार खरीदते समय उन्होंने 2495 रुपये अतिरिक्त प्रीमियम देकर रिटर्न टू इनवॉइस कवर भी लिया था। इसके बावजूद कंपनी ने पूरा बीमा क्लेम देने से इनकार कर दिया।
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कंपनी को 45 दिन में भुगतान के निर्देश
आयोग ने बीमा कंपनी को नोटिस जारी कर जवाब मांगा, लेकिन उसकी ओर से कोई प्रतिनिधि पेश नहीं हुआ। इसके बाद आयोग ने 19 मार्च को एकतरफा कार्रवाई शुरू की। जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग के अध्यक्ष डॉ. आरके डोगरा, सदस्य डॉ. रेखा चौधरी और विनीत कौशिक की पीठ ने कंपनी को बीमित राशि के अलावा मानसिक उत्पीड़न के लिए 11 हजार रुपये मुआवजा और 5500 रुपये मुकदमा खर्च देने के निर्देश दिए हैं। आयोग ने आदेश के पालन के लिए कंपनी को 45 दिन का समय दिया है। निर्धारित अवधि में भुगतान नहीं करने पर कंपनी को शिकायतकर्ता को 12 प्रतिशत सालाना ब्याज देना होगा।
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