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Panipat News: डेंगू के इलाज का क्लेम खारिज करने पर बीमा कंपनी पर जुर्माना
Sun, 07 Jun 2026 12:52 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, पानीपत
संवाद न्यूज एजेंसी, पानीपत
Updated Sun, 07 Jun 2026 12:52 AM IST
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पानीपत। डेंगू के इलाज का बीमा क्लेम खारिज करना बीमा कंपनी को महंगा पड़ गया। जिला उपभोक्ता आयोग ने कंपनी को क्लेम राशि ब्याज सहित लौटाने और मानसिक उत्पीड़न के लिए मुआवजा देने का आदेश दिया है।
मामले के अनुसार, शिकायतकर्ता संदीप ने वर्ष 2020 में करीब 20,813 रुपये प्रीमियम देकर मेडिकल इंश्योरेंस पॉलिसी ली थी, जिसमें उनके परिवार के सदस्य भी शामिल थे। नवंबर 2021 में उन्हें डेंगू हो गया, जिसके बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया और इलाज पर कुल 88,831 रुपये खर्च हुए।
इलाज के बाद संदीप ने बीमा कंपनी से क्लेम किया, लेकिन कंपनी ने दिसंबर 2021 में दस्तावेजों में कथित विसंगतियों का हवाला देते हुए दावा खारिज कर दिया। कई बार संपर्क और नोटिस भेजने के बावजूद भुगतान नहीं होने पर उन्होंने उपभोक्ता आयोग का दरवाजा खटखटाया।
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सुनवाई के दौरान बीमा कंपनी ने तर्क दिया कि अस्पताल रिकॉर्ड और दस्तावेजों में समय तथा अन्य विवरणों में अंतर है, इसी आधार पर क्लेम अस्वीकार किया गया। हालांकि आयोग ने कंपनी के तर्कों को अस्वीकार कर दिया।
आयोग ने आदेश दिया कि बीमा कंपनी को 88,831 रुपये की राशि 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज सहित अदा करनी होगी। इसके अलावा मानसिक उत्पीड़न के लिए 11,000 रुपये और मुकदमे के खर्च के रूप में 5,000 रुपये भी देने होंगे।
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मामले के अनुसार, शिकायतकर्ता संदीप ने वर्ष 2020 में करीब 20,813 रुपये प्रीमियम देकर मेडिकल इंश्योरेंस पॉलिसी ली थी, जिसमें उनके परिवार के सदस्य भी शामिल थे। नवंबर 2021 में उन्हें डेंगू हो गया, जिसके बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया और इलाज पर कुल 88,831 रुपये खर्च हुए।
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इलाज के बाद संदीप ने बीमा कंपनी से क्लेम किया, लेकिन कंपनी ने दिसंबर 2021 में दस्तावेजों में कथित विसंगतियों का हवाला देते हुए दावा खारिज कर दिया। कई बार संपर्क और नोटिस भेजने के बावजूद भुगतान नहीं होने पर उन्होंने उपभोक्ता आयोग का दरवाजा खटखटाया।
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सुनवाई के दौरान बीमा कंपनी ने तर्क दिया कि अस्पताल रिकॉर्ड और दस्तावेजों में समय तथा अन्य विवरणों में अंतर है, इसी आधार पर क्लेम अस्वीकार किया गया। हालांकि आयोग ने कंपनी के तर्कों को अस्वीकार कर दिया।
आयोग ने आदेश दिया कि बीमा कंपनी को 88,831 रुपये की राशि 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज सहित अदा करनी होगी। इसके अलावा मानसिक उत्पीड़न के लिए 11,000 रुपये और मुकदमे के खर्च के रूप में 5,000 रुपये भी देने होंगे।