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Panipat News: क्षतिग्रस्त कार के बीमा दावे पर 45 दिन में लिया जाएगा फैसला
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पानीपत। सड़क हादसे में पूरी तरह क्षतिग्रस्त कार का बीमा दावा वर्षों तक लटकाए रखने का मामला जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग के समक्ष पहुंचा।
आयोग ने बीमा कंपनी एचडीएफसी एग्रो जनरल इंश्योरेंस को एक और अवसर दिया है और निर्देश दिए हैं कि शिकायतकर्ता द्वारा आवश्यक दस्तावेज जमा किए जाने के बाद 45 दिनों के भीतर बीमा दावे पर निर्णय लिया जाए। शिकायतकर्ता अजीत सिंह प्रताप ने आयोग को बताया कि श्री श्याम ओवरसीज का प्रोपराइटर है। उन्होंने अपनी स्विफ्ट कार का बीमा एचडीएफसी एर्गो से कराया था।
वाहन एचडीएफसी बैंक से फाइनेंस था और बीमा पॉलिसी अक्टूबर 2018 से अक्टूबर 2019 तक वैध थी। शिकायत के अनुसार फरवरी 2019 में मुरादाबाद से लौटते समय अचानक सड़क पर नीलगाय आ जाने से कार अनियंत्रित होकर सड़क किनारे खड़ी ट्रॉली से टकरा गई। हादसे में कार पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई और उनको चोट भी आईं। उन्होंने इसकी सूचना पुलिस को दी और अस्पताल में उपचार कराया। बावजूद बीमा कंपनी ने दावा यह कहकर खारिज कर दिया कि आवश्यक दस्तावेज समय पर उपलब्ध नहीं कराए गए।
बीमा कंपनी की और से दलील दी गई कि दुर्घटना की सूचना पांच दिन की देरी से दी गई और सर्वेयर द्वारा मांगे गए कागजात शिकायतकर्ता ने जमा नहीं किए। कंपनी ने चालक की चोटों, मेडिकल रिकॉर्ड और ड्राइविंग लाइसेंस को लेकर भी आपत्तियां उठाईं। बीमा कंपनी का कहना है कि तथ्यों में विरोधाभास के कारण दावा नो क्लेम कर दिया गया।
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वहीं, एचडीएफसी बैंक ने स्पष्ट किया कि ऋण खाता पहले ही निपट चुका है और बैंक के विरुद्ध कोई बकाया विवाद नहीं है।
सुनवाई के दौरान बीमा कंपनी ने यह भी कहा कि यदि शिकायतकर्ता सभी आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत कर देता है तो दावा समयबद्ध तरीके से निपटाया जा सकता है। आयोग ने दोनों पक्षों की दलील सुनने के बाद माना कि मामले का समाधान दस्तावेजों के आधार पर संभव है। आयोग ने शिकायतकर्ता को 15 दिनों के भीतर सभी आवश्यक दस्तावेज जमा करने के निर्देश दिए। साथ ही बीमा कंपनी को आदेश दिया गया कि दस्तावेज मिलने के बाद 45 दिनों में बीमा दावे पर अंतिम निर्णय लिया जाए।
आयोग ने स्पष्ट किया कि उपभोक्ता को अनावश्यक रूप से भटकाया नहीं जाना चाहिए। वहीं बीमा कंपनी को भी नियमों के अनुसार निर्णय लेने का अवसर दिया जाना जरूरी है। आदेश के साथ ही शिकायत का निस्तारण कर दिया गया।
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आयोग ने बीमा कंपनी एचडीएफसी एग्रो जनरल इंश्योरेंस को एक और अवसर दिया है और निर्देश दिए हैं कि शिकायतकर्ता द्वारा आवश्यक दस्तावेज जमा किए जाने के बाद 45 दिनों के भीतर बीमा दावे पर निर्णय लिया जाए। शिकायतकर्ता अजीत सिंह प्रताप ने आयोग को बताया कि श्री श्याम ओवरसीज का प्रोपराइटर है। उन्होंने अपनी स्विफ्ट कार का बीमा एचडीएफसी एर्गो से कराया था।
वाहन एचडीएफसी बैंक से फाइनेंस था और बीमा पॉलिसी अक्टूबर 2018 से अक्टूबर 2019 तक वैध थी। शिकायत के अनुसार फरवरी 2019 में मुरादाबाद से लौटते समय अचानक सड़क पर नीलगाय आ जाने से कार अनियंत्रित होकर सड़क किनारे खड़ी ट्रॉली से टकरा गई। हादसे में कार पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई और उनको चोट भी आईं। उन्होंने इसकी सूचना पुलिस को दी और अस्पताल में उपचार कराया। बावजूद बीमा कंपनी ने दावा यह कहकर खारिज कर दिया कि आवश्यक दस्तावेज समय पर उपलब्ध नहीं कराए गए।
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बीमा कंपनी की और से दलील दी गई कि दुर्घटना की सूचना पांच दिन की देरी से दी गई और सर्वेयर द्वारा मांगे गए कागजात शिकायतकर्ता ने जमा नहीं किए। कंपनी ने चालक की चोटों, मेडिकल रिकॉर्ड और ड्राइविंग लाइसेंस को लेकर भी आपत्तियां उठाईं। बीमा कंपनी का कहना है कि तथ्यों में विरोधाभास के कारण दावा नो क्लेम कर दिया गया।
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वहीं, एचडीएफसी बैंक ने स्पष्ट किया कि ऋण खाता पहले ही निपट चुका है और बैंक के विरुद्ध कोई बकाया विवाद नहीं है।
सुनवाई के दौरान बीमा कंपनी ने यह भी कहा कि यदि शिकायतकर्ता सभी आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत कर देता है तो दावा समयबद्ध तरीके से निपटाया जा सकता है। आयोग ने दोनों पक्षों की दलील सुनने के बाद माना कि मामले का समाधान दस्तावेजों के आधार पर संभव है। आयोग ने शिकायतकर्ता को 15 दिनों के भीतर सभी आवश्यक दस्तावेज जमा करने के निर्देश दिए। साथ ही बीमा कंपनी को आदेश दिया गया कि दस्तावेज मिलने के बाद 45 दिनों में बीमा दावे पर अंतिम निर्णय लिया जाए।
आयोग ने स्पष्ट किया कि उपभोक्ता को अनावश्यक रूप से भटकाया नहीं जाना चाहिए। वहीं बीमा कंपनी को भी नियमों के अनुसार निर्णय लेने का अवसर दिया जाना जरूरी है। आदेश के साथ ही शिकायत का निस्तारण कर दिया गया।