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संपदा अधिकारी की आईडी का इस्तेमाल कर प्लॉट रिज्यूम करने का मामला-
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पानीपत। तत्कालीन एस्टेट ऑफिसर की आईडी का इस्तेमाल कर आवंटियों से वापस लिए गए प्लॉटों को बहाल करने के मामले में फंसे हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण के पांच अधिकारियों समेत छह पर लोकायुक्त ने आपराधिक कार्रवाई का आदेश दिया है। इस संबंध में रोहतक प्रशासक की ओर से पानीपत संपदा अधिकारी को पत्र जारी किया गया है, जिसमें तत्कालीन एईओ, सहायक, उपाधीक्षक, सिस्टम ऑफिसर, अकाउंटेंट और एक अन्य के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही एक्शन टेकन रिपोर्ट भी मांगी गई है। मामले में लोकायुक्त ने सुनवाई के लिए अगली तारीख 11 अप्रैल 2022 तय की है।
जानकारी के अनुसार 10 नवंबर 2008 को एचएसवीपी की ओर से प्लॉट नंबर-1972 आवंटित किया गया था। नौ दिसंबर 2008 तक आवंटी 412760 रुपये जमा नहीं करा सका। इस पर 2012 में सरकार ने प्लॉट आवंटन रद्द कर उसे रिज्यूम (वापस लिया) कर लिया। आरोप है कि आवंटी संजय मान ने अधिकारियों एवं कर्मचारियों से साठगांठ कर प्लॉट को दोबारा आवंटित कराने की साजिश की। इसके तहत सिस्टम ऑपरेटर तरुण अरोड़ा ने तत्कालीन एस्टेट ऑफिसर सुभिता ढाका की आईडी का इस्तेमाल कर प्लॉट नंबर 1972 का स्टेटस बदल दिया और उसे अलॉट दिखा दिया। इसके बाद इस प्लॉट को दोबारा संजय मान को आवंटित कर दिया गया, जबकि रिज्यूम प्लॉट को बहाल करने की शक्ति सिर्फ सरकार के पास होती है। इसकी शिकायत एक वकील ने मुख्य प्रशासक से की, जिस पर मुख्य प्रशासक ने जांच रोहतक प्रशासक विरेंद्र हुड्डा को सौंपी। उन्होंने जांच में तत्कालीन ईओ सुभिता ढाका, एईओ संतोष मेहता, सिस्टम ऑपरेटर तरुण अरोड़ा, तत्कालीन सहायक कृष्ण चंद, तत्कालीन उप अधीक्षक सुभाष गुलाटी व लेखाकार अनिल चोपड़ा को जांच में शामिल किया। सभी ने पहले तो जांच में खुद को निर्दोष बताया। दो साल तक चली जांच में ईओ सुभिता ढाका को क्लीन चिट दे दी गई, लेकिन तत्कालीन एईओ संतोष मेहता, सिस्टम ऑपरेटर तरुण अरोड़ा, तत्कालीन सहायक कृष्ण चंद, तत्कालीन उप अधीक्षक सुभाष गुलाटी व लेखाकार अनिल चोपड़ा को दोषी माना गया। इस मामले में मुख्य आरोपी सिस्टम ऑपरेटर तरुण अरोड़ा को माना गया। अब प्रशासक ने पानीपत ईओ को आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।
- आईडी का गलत प्रयोग हुआ
तत्कालीन ईओ सुभिता ढाका ने अपने बयान में कहा कि सिस्टम ऑपरेटर ने उनकी आईडी का गलत प्रयोग कर रिज्यूम प्लॉट को बहाल किया था। गलत तरीके से प्लॉट का स्टेटस बदल दिया गया। उनके पास तीन जगहों से फाइल पास होकर आई थी, इसलिए उन्होंने इस पर ध्यान नहीं दिया।
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सोमवार को इस संबंध में रिकॉर्ड चेक कराया जाएगा। मामले में अब तक हुई कार्रवाई के बारे में रिकार्ड देखने के बाद ही कुछ कहा जा सकता है।
- अनुपमा मलिक, संपदा अधिकारी, हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण
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जानकारी के अनुसार 10 नवंबर 2008 को एचएसवीपी की ओर से प्लॉट नंबर-1972 आवंटित किया गया था। नौ दिसंबर 2008 तक आवंटी 412760 रुपये जमा नहीं करा सका। इस पर 2012 में सरकार ने प्लॉट आवंटन रद्द कर उसे रिज्यूम (वापस लिया) कर लिया। आरोप है कि आवंटी संजय मान ने अधिकारियों एवं कर्मचारियों से साठगांठ कर प्लॉट को दोबारा आवंटित कराने की साजिश की। इसके तहत सिस्टम ऑपरेटर तरुण अरोड़ा ने तत्कालीन एस्टेट ऑफिसर सुभिता ढाका की आईडी का इस्तेमाल कर प्लॉट नंबर 1972 का स्टेटस बदल दिया और उसे अलॉट दिखा दिया। इसके बाद इस प्लॉट को दोबारा संजय मान को आवंटित कर दिया गया, जबकि रिज्यूम प्लॉट को बहाल करने की शक्ति सिर्फ सरकार के पास होती है। इसकी शिकायत एक वकील ने मुख्य प्रशासक से की, जिस पर मुख्य प्रशासक ने जांच रोहतक प्रशासक विरेंद्र हुड्डा को सौंपी। उन्होंने जांच में तत्कालीन ईओ सुभिता ढाका, एईओ संतोष मेहता, सिस्टम ऑपरेटर तरुण अरोड़ा, तत्कालीन सहायक कृष्ण चंद, तत्कालीन उप अधीक्षक सुभाष गुलाटी व लेखाकार अनिल चोपड़ा को जांच में शामिल किया। सभी ने पहले तो जांच में खुद को निर्दोष बताया। दो साल तक चली जांच में ईओ सुभिता ढाका को क्लीन चिट दे दी गई, लेकिन तत्कालीन एईओ संतोष मेहता, सिस्टम ऑपरेटर तरुण अरोड़ा, तत्कालीन सहायक कृष्ण चंद, तत्कालीन उप अधीक्षक सुभाष गुलाटी व लेखाकार अनिल चोपड़ा को दोषी माना गया। इस मामले में मुख्य आरोपी सिस्टम ऑपरेटर तरुण अरोड़ा को माना गया। अब प्रशासक ने पानीपत ईओ को आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।
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- आईडी का गलत प्रयोग हुआ
तत्कालीन ईओ सुभिता ढाका ने अपने बयान में कहा कि सिस्टम ऑपरेटर ने उनकी आईडी का गलत प्रयोग कर रिज्यूम प्लॉट को बहाल किया था। गलत तरीके से प्लॉट का स्टेटस बदल दिया गया। उनके पास तीन जगहों से फाइल पास होकर आई थी, इसलिए उन्होंने इस पर ध्यान नहीं दिया।
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सोमवार को इस संबंध में रिकॉर्ड चेक कराया जाएगा। मामले में अब तक हुई कार्रवाई के बारे में रिकार्ड देखने के बाद ही कुछ कहा जा सकता है।
- अनुपमा मलिक, संपदा अधिकारी, हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण