{"_id":"5d83e6068ebc3e01586efb04","slug":"industry-water-administration-panipat-news-knl56761103","type":"story","status":"publish","title_hn":"प्रशासन ने अवैध रूप से भूमिगत जल निकालने वाले 47 उद्यमियों से नहीं वसूला जुर्माना","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
प्रशासन ने अवैध रूप से भूमिगत जल निकालने वाले 47 उद्यमियों से नहीं वसूला जुर्माना
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पानीपत। पानीपत टैक्सटाइल इंडस्ट्री।
- फोटो : Panipat
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एनजीटी के बार बार निर्देशों के बाद भी प्रशासन उन 47 औद्योगिक इकाइयों से हर्जाना नहीं वसूल रहा। इन इकाइयों को एनजीटी ने अवैध रूप से भूमिगत जल का दोहन करने पर चिह्नित कर प्रशासन को कार्रवाई करते हुए हर्जाना वसूलने के निर्देश दिए थे। जुलाई माह में एनजीटी ने 15 दिन में इन पर कार्रवाई के निर्देश दिए थे। अब एनजीटी ने मामले की सुनवाई के लिए 12 अक्तूबर की तारीख रखी है। उस दिन मामले में सुनवाई होगी। केंद्रीय भू जल प्राधिकरण ने भूमिगत जल निकालने के लिए 30 सितंबर से पहले एनओसी के लिए अप्लाई करने के निर्देश दिए हैं। 30 सितंबर के बाद जो उद्योग बिना एनओसी के भूमिगत जल का दोहन करते पाया गया तो उसे हर रोज 5 हजार रुपये जुर्माना भरना होगा। इस संबंध में स्थानीय अधिकारी बात करने से बच रहे हैं।
हालांकि केंद्रीय भूजल बोर्ड की सख्ती के बाद शहर के उद्यमियों ने पानी के लिए अनुमति मांगनी शुरू कर दी है। करीब 40 बड़े उद्योगों ने केंद्रीय जल बोर्ड में आवेदन किया है। इनमें 30 इंडस्ट्री टेक्सटाइल की हैं। एक साथ आवेदन आने पर बोर्ड के अधिकारी भी हैरान है। इसके अलावा अब भी जिले में 500 से अधिक उद्योग बिना एनओसी के अवैध रूप से हर रोज 5 करोड़ भूमिगत जल का दोहन कर रहे हैं। इसी कारण पानीपत का भूमिगत जल स्तर लगातार गिर रहा है। पिछले 10 साल में 10 फुट भूमिगत जल स्तर गिरा है। अब तक मात्र 7 उद्योगों के पास ही भूमिगत जल का दोहन करने की परमिशन है।
110 इंडस्ट्री को क्लोजर नोटिस जारी
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और केंद्रीय भूजल बोर्ड इन दिनों जल दोहन और पर्यावरण प्रदूषण फैलाने वाली इंडस्ट्री पर लगातार कार्रवाई कर रहा है। अब तक करीब 110 इंडस्ट्री को खामियां मिलने पर क्लोजर नोटिस थमाए जा चुके हैं। इनमें से 30 प्रतिशत इंडस्ट्री पर अनुमति के बिना जल दोहन के तहत कार्रवाई की गई है। अब एनओसी लेने के लिए मात्र 18 दिन बचे हैं। 30 सितंबर तक उद्यमी ऑनलाइन एनओसी के लिए अप्लाई कर सकते हैं। इसके बाद उद्यमियों को हर रोज 5 हजार रुपये जुर्माना देना होगा। अब उद्यमियों का कहना है कि वो एनओसी के लिए अप्लाई कर रहे हैं उनको पहले इस तरह की अनुमति लेने की जानकारी नहीं थी।
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टेक्सटाइल और कॉटन कंपनी अनुमति लेने में सबसे अधिक
40 में से 30 टेक्सटाइल की इंडस्ट्री हैं। इसके बाद सबसे ज्यादा तीन कॉटन और दो राइस मिलों ने अनुमति मांगी है। अस्पतालों में प्रेम अस्पताल इसके लिए आगे आया है। इसके अलावा फार्मा, डिस्टलरी, स्टील फूड प्रोसेस, प्लाइवुड, पैकेज ड्रिक, रबर, केमिकल, सीमेंट व डेयरी की एक-एक यूनिट हैं। रियल एस्टेट में एक ही कंपनी है। इनमें बापौली नोटिफाइड एरिया की 6 व समालखा की 5 इंडस्ट्री भी शामिल हैं।
रियल एस्टेट और कई बड़ी कंपनी अभी बाकी
पानीपत में करीब 20 हजार छोटी-बड़ी इंडस्ट्री हैं। अब तक सात इंडस्ट्री व रियल एस्टेट कंपनी जल दोहन की अनुमति से चल रही हैं। बड़ी संख्या में इंडस्ट्री अवैध रूप से पानी का दोहन कर रही हैं। इनमें आइओसीएल की पानीपत रिफाइनरी, एनएफएल और थर्मल समेत बड़ी इंडस्ट्री शामिल हैं। सबसे हैरान करने वाला विषय रियल एस्टेट कंपनियों की अनुमति नहीं लेना है। अब तक केवल एक ही कंपनी एनओसी ले पाई है।
500 से अधिक यूनिट निकाल रही बिना परमिशन के भूजल
दिल्ली के शैलेश कुमार की शिकायत पर सीपीसीबी ने पानीपत की 55 इंडस्ट्रीज के खिलाफ जांच के आदेश दिए हैं। यहां 500 से अधिक डाइंग यूनिट हैं, जो बिना अनुमति के पानी निकाल रही है। इस ओर तो बोर्ड का अभी ध्यान ही नहीं गया है।
ग्राउंड वाटर की क्वालिटी खराब होने पर सील होंगे सभी ट्यूबवेल
सीपीसीबी ने नगर निगम को पेयजल के लिए उपयोग हो रहे ग्राउंड वाटर की जांच करने का आदेश दिया है। साथ ही कहा कि जो विभाग पानी की सप्लाई कर रहा है। उस पानी के सैंपल की जांच होनी चाहिए। यह जांच पानी जांचने वाली किसी एजेंसी से कराई जाए। अगर पानी की क्वालिटी खराब है तो उस ट्यूबवेल को सील कर दिया जाए।
2018 में केंद्रीय भू जल प्राधिकरण ने पानीपत के पानी को बताया था पीने के लिए अयोग्य
केंद्रीय भू जल प्राधिकरण ने पानीपत में अलग अलग जगह से पानी के सैंपल लिए थे। सैंपल की लैब में जांच हुई। शहर के पानी में कई स्थानों पर साइनाइड की मात्रा 0.3 प्रतिशत मिली जोकि स्वास्थ्य के लिए घातक है। इस पर प्राधिकरण ने चिंता जाहिर करते हुए भूमिगत जल का खराब करने वाले उद्योगों पर कार्रवाई के सख्त निर्देश दिए थे।
10 साल में 5 डीसी आए, किसी ने नहीं दिया भू-जल स्तर पर ध्यान
पिछले 10 साल में पानीपत का भू-जल स्तर 10 फीट तक नीचे गिर गया। पानीपत की औद्योगिक इकाइयों, अवैध रूप से ग्रामीण व शहरी क्षेत्रों में लगे ट्यूबवेल लगातार भूमिगत जल का दोहन करते रहे। 10 साल में 5 डीसी पानीपत में आए, लेकिन किसी ने इस ओर ध्यान नहीं दिया। 10 साल पहले तक भूजल प्राधिकरण भी सक्रिय नहीं था। इस कारण कार्रवाई नहीं हो पाई। आरोप ये भी है कि उद्योगपतियों की राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के साथ मिलीभगत होती थी, इसलिए औद्योगिक इकाइयों से प्रदूषित पानी सीधा भूमिगत जल पर छोड़ने पर कभी कोई कार्रवाई नहीं हुई। इसलिए पिछले दो साल से केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ही पानीपत में उद्योगों में छापेमारी कर कार्रवाई करता आया है।
एनओसी के लिए आवेदन हुआ सरल
उद्यमियों की मांग को देखते हुए सेंट्रल ग्राउंड वाटर अथॉरिटी ने एनओसी का आवेदन को सरल किया है। औपचारिकताएं कम की गई है। आवेदन के लिए प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की कंसेंट, रेन हार्वेस्टिग डिजाइन की प्रति, अथॉरिटी लेटर, पानी वितरित नहीं कर रहे का सर्टिफिकेट ही देना होगा। यदि वाहिट कैटेगरी में यूनिट आता है। तो प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से कंसेंट के स्थान पर छूट का पत्र लेना होगा।
पहले उद्यमियों को भूमिगत जल निकालने के लिए मिलने वाली एनओसी की जानकारी नहीं थी। अब इसकी जानकारी हुई है। इसकी प्रक्रिया को भी सरल किया गया है। अब उद्यमी इसके लिए अप्लाई भी कर रहे हैं। 30 सितंबर इसके लिए अंतिम तिथि है।
भीम राणा, प्रधान डायर्स एसोसिएशन
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हालांकि केंद्रीय भूजल बोर्ड की सख्ती के बाद शहर के उद्यमियों ने पानी के लिए अनुमति मांगनी शुरू कर दी है। करीब 40 बड़े उद्योगों ने केंद्रीय जल बोर्ड में आवेदन किया है। इनमें 30 इंडस्ट्री टेक्सटाइल की हैं। एक साथ आवेदन आने पर बोर्ड के अधिकारी भी हैरान है। इसके अलावा अब भी जिले में 500 से अधिक उद्योग बिना एनओसी के अवैध रूप से हर रोज 5 करोड़ भूमिगत जल का दोहन कर रहे हैं। इसी कारण पानीपत का भूमिगत जल स्तर लगातार गिर रहा है। पिछले 10 साल में 10 फुट भूमिगत जल स्तर गिरा है। अब तक मात्र 7 उद्योगों के पास ही भूमिगत जल का दोहन करने की परमिशन है।
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110 इंडस्ट्री को क्लोजर नोटिस जारी
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और केंद्रीय भूजल बोर्ड इन दिनों जल दोहन और पर्यावरण प्रदूषण फैलाने वाली इंडस्ट्री पर लगातार कार्रवाई कर रहा है। अब तक करीब 110 इंडस्ट्री को खामियां मिलने पर क्लोजर नोटिस थमाए जा चुके हैं। इनमें से 30 प्रतिशत इंडस्ट्री पर अनुमति के बिना जल दोहन के तहत कार्रवाई की गई है। अब एनओसी लेने के लिए मात्र 18 दिन बचे हैं। 30 सितंबर तक उद्यमी ऑनलाइन एनओसी के लिए अप्लाई कर सकते हैं। इसके बाद उद्यमियों को हर रोज 5 हजार रुपये जुर्माना देना होगा। अब उद्यमियों का कहना है कि वो एनओसी के लिए अप्लाई कर रहे हैं उनको पहले इस तरह की अनुमति लेने की जानकारी नहीं थी।
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टेक्सटाइल और कॉटन कंपनी अनुमति लेने में सबसे अधिक
40 में से 30 टेक्सटाइल की इंडस्ट्री हैं। इसके बाद सबसे ज्यादा तीन कॉटन और दो राइस मिलों ने अनुमति मांगी है। अस्पतालों में प्रेम अस्पताल इसके लिए आगे आया है। इसके अलावा फार्मा, डिस्टलरी, स्टील फूड प्रोसेस, प्लाइवुड, पैकेज ड्रिक, रबर, केमिकल, सीमेंट व डेयरी की एक-एक यूनिट हैं। रियल एस्टेट में एक ही कंपनी है। इनमें बापौली नोटिफाइड एरिया की 6 व समालखा की 5 इंडस्ट्री भी शामिल हैं।
रियल एस्टेट और कई बड़ी कंपनी अभी बाकी
पानीपत में करीब 20 हजार छोटी-बड़ी इंडस्ट्री हैं। अब तक सात इंडस्ट्री व रियल एस्टेट कंपनी जल दोहन की अनुमति से चल रही हैं। बड़ी संख्या में इंडस्ट्री अवैध रूप से पानी का दोहन कर रही हैं। इनमें आइओसीएल की पानीपत रिफाइनरी, एनएफएल और थर्मल समेत बड़ी इंडस्ट्री शामिल हैं। सबसे हैरान करने वाला विषय रियल एस्टेट कंपनियों की अनुमति नहीं लेना है। अब तक केवल एक ही कंपनी एनओसी ले पाई है।
500 से अधिक यूनिट निकाल रही बिना परमिशन के भूजल
दिल्ली के शैलेश कुमार की शिकायत पर सीपीसीबी ने पानीपत की 55 इंडस्ट्रीज के खिलाफ जांच के आदेश दिए हैं। यहां 500 से अधिक डाइंग यूनिट हैं, जो बिना अनुमति के पानी निकाल रही है। इस ओर तो बोर्ड का अभी ध्यान ही नहीं गया है।
ग्राउंड वाटर की क्वालिटी खराब होने पर सील होंगे सभी ट्यूबवेल
सीपीसीबी ने नगर निगम को पेयजल के लिए उपयोग हो रहे ग्राउंड वाटर की जांच करने का आदेश दिया है। साथ ही कहा कि जो विभाग पानी की सप्लाई कर रहा है। उस पानी के सैंपल की जांच होनी चाहिए। यह जांच पानी जांचने वाली किसी एजेंसी से कराई जाए। अगर पानी की क्वालिटी खराब है तो उस ट्यूबवेल को सील कर दिया जाए।
2018 में केंद्रीय भू जल प्राधिकरण ने पानीपत के पानी को बताया था पीने के लिए अयोग्य
केंद्रीय भू जल प्राधिकरण ने पानीपत में अलग अलग जगह से पानी के सैंपल लिए थे। सैंपल की लैब में जांच हुई। शहर के पानी में कई स्थानों पर साइनाइड की मात्रा 0.3 प्रतिशत मिली जोकि स्वास्थ्य के लिए घातक है। इस पर प्राधिकरण ने चिंता जाहिर करते हुए भूमिगत जल का खराब करने वाले उद्योगों पर कार्रवाई के सख्त निर्देश दिए थे।
10 साल में 5 डीसी आए, किसी ने नहीं दिया भू-जल स्तर पर ध्यान
पिछले 10 साल में पानीपत का भू-जल स्तर 10 फीट तक नीचे गिर गया। पानीपत की औद्योगिक इकाइयों, अवैध रूप से ग्रामीण व शहरी क्षेत्रों में लगे ट्यूबवेल लगातार भूमिगत जल का दोहन करते रहे। 10 साल में 5 डीसी पानीपत में आए, लेकिन किसी ने इस ओर ध्यान नहीं दिया। 10 साल पहले तक भूजल प्राधिकरण भी सक्रिय नहीं था। इस कारण कार्रवाई नहीं हो पाई। आरोप ये भी है कि उद्योगपतियों की राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के साथ मिलीभगत होती थी, इसलिए औद्योगिक इकाइयों से प्रदूषित पानी सीधा भूमिगत जल पर छोड़ने पर कभी कोई कार्रवाई नहीं हुई। इसलिए पिछले दो साल से केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ही पानीपत में उद्योगों में छापेमारी कर कार्रवाई करता आया है।
एनओसी के लिए आवेदन हुआ सरल
उद्यमियों की मांग को देखते हुए सेंट्रल ग्राउंड वाटर अथॉरिटी ने एनओसी का आवेदन को सरल किया है। औपचारिकताएं कम की गई है। आवेदन के लिए प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की कंसेंट, रेन हार्वेस्टिग डिजाइन की प्रति, अथॉरिटी लेटर, पानी वितरित नहीं कर रहे का सर्टिफिकेट ही देना होगा। यदि वाहिट कैटेगरी में यूनिट आता है। तो प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से कंसेंट के स्थान पर छूट का पत्र लेना होगा।
पहले उद्यमियों को भूमिगत जल निकालने के लिए मिलने वाली एनओसी की जानकारी नहीं थी। अब इसकी जानकारी हुई है। इसकी प्रक्रिया को भी सरल किया गया है। अब उद्यमी इसके लिए अप्लाई भी कर रहे हैं। 30 सितंबर इसके लिए अंतिम तिथि है।
भीम राणा, प्रधान डायर्स एसोसिएशन