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पीएनजी को छोड़ बायोमास की तरफ रुख कर रहे उद्योगपति
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पानीपत। उद्यमियों ने कोयला संचालित उद्योगों को बंद करने पर कमीशन ऑफ एयर क्वालिटी मैनेटमेंट के खिलाफ बडे़ आंदोलन का एलान किया था। सरकार को भी उद्यमियों ने चेताया था, लेकिन इस रुख से कमीशन ने गंभीरता से नहीं लिया। सरकार ने भी उद्यमियों को अपनी लाचारी बता दी। इसके बाद उद्यमियों का रुख नरम पड़ गया। अब उद्यमियों के सामने बॉयलर को पीएनजी या बायोमास पर स्थापित करने के अलावा कोई चारा नहीं है। उद्यमी इस बात को समझ भी गए हैं। 30 सितंबर से 13 अक्तूबर तक लगभग 180 डाइंग यूनिट के बॉयलर बायोमास पर शिफ्ट हो गए हैं। 44 उद्योगों में पीएनजी की सप्लाई है। 50 और उद्योगों ने पीएनजी की सप्लाई के लिए आवेदन कर रखा है। इस पर अभी काम शुरू नहीं हुआ। अक्तूबर के अंत तक लगभग 350 डाइंग यूनिट बायोमास पर शिफ्ट हो जाएंगे। पीएनजी की दर लगभग 65 रुपये प्रति एससीएम है। इसलिए उद्यमी बायोमास पर ही जाना बेहतर समझ रहे हैं। हालांकि 30 सितंबर के बाद बायोमास के रेट आठ रुपये प्रति किलोग्राम थे अब ये 12 रुपये प्रति किलोग्राम हो चुके हैं।
सीएक्यूएम उद्यमियों पर बॉयलर को पीएनजी पर शिफ्ट करने का दबाव बना रहा है। उद्यमियों को पीएनजी के बॉयलर चलाने का प्रशिक्षण नहीं मिला है। पीएनजी के बर्नर उपलब्ध नहीं है। भारत में बर्नर बहुत कम बनते हैं। ऐसे में कंपनी बर्नरों की पूर्ति नहीं कर पा रही है। दो दो साल की बर्नर की वेटिंग चल रही है। इसके अलावा पीएनजी के दाम स्थिर नहीं है। यूक्रेन- रूस युद्ध के बाद पीएनजी के रेट लगभग दोगुना बढ़ गए हैं। पानीपत में सिर्फ अडानी ग्रुप की ही सप्लाई है। इसमें प्रतिस्पर्धा न होने के कारण इसके लगातार रेट बढ़ने का भी डर है। इसलिए भी उद्यमियों ने बॉयलर को पीएनजी की बजाय बायोमास पर शिफ्ट करने का फैसला किया है।
बरसात के बाद धूल के कारण गिर गए थे। एक्यूआई गिरकर ग्रीन जोन में आ गया था। अब दोबारा एक्यूआई बढ़ने लगा है। आने वाले दिनों में तापमान गिरेगा इसलिए एक्यूूआई भी बढ़ेगा। बृहस्पतिवार को एक्यूूआई 113 पहुंच गया। यह यलो जोन में है। तीन दिन पहले एक्यूआई 35 था।
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बायोमास पर ही जा रहे हैं उद्यमी
अब उद्यमी पीएनजी छोड़ बायोमास पर जा रहे हैं। लगभग 50 प्रतिशत उद्योग शिफ्ट हो गए हैं। पीएनजी के रेट स्थिर नहीं है। इसलिए पीएनजी पर जाना मुसीबत हो सकता है।
- भीम राणा, प्रधान डायर्स एसोसिएशन
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सीएक्यूएम उद्यमियों पर बॉयलर को पीएनजी पर शिफ्ट करने का दबाव बना रहा है। उद्यमियों को पीएनजी के बॉयलर चलाने का प्रशिक्षण नहीं मिला है। पीएनजी के बर्नर उपलब्ध नहीं है। भारत में बर्नर बहुत कम बनते हैं। ऐसे में कंपनी बर्नरों की पूर्ति नहीं कर पा रही है। दो दो साल की बर्नर की वेटिंग चल रही है। इसके अलावा पीएनजी के दाम स्थिर नहीं है। यूक्रेन- रूस युद्ध के बाद पीएनजी के रेट लगभग दोगुना बढ़ गए हैं। पानीपत में सिर्फ अडानी ग्रुप की ही सप्लाई है। इसमें प्रतिस्पर्धा न होने के कारण इसके लगातार रेट बढ़ने का भी डर है। इसलिए भी उद्यमियों ने बॉयलर को पीएनजी की बजाय बायोमास पर शिफ्ट करने का फैसला किया है।
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बरसात के बाद धूल के कारण गिर गए थे। एक्यूआई गिरकर ग्रीन जोन में आ गया था। अब दोबारा एक्यूआई बढ़ने लगा है। आने वाले दिनों में तापमान गिरेगा इसलिए एक्यूूआई भी बढ़ेगा। बृहस्पतिवार को एक्यूूआई 113 पहुंच गया। यह यलो जोन में है। तीन दिन पहले एक्यूआई 35 था।
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बायोमास पर ही जा रहे हैं उद्यमी
अब उद्यमी पीएनजी छोड़ बायोमास पर जा रहे हैं। लगभग 50 प्रतिशत उद्योग शिफ्ट हो गए हैं। पीएनजी के रेट स्थिर नहीं है। इसलिए पीएनजी पर जाना मुसीबत हो सकता है।
- भीम राणा, प्रधान डायर्स एसोसिएशन