फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Haryana ›   Panipat News ›   Industrial city echoes with Jai Shivaji, Jai Bhavani

Panipat News: जय शिवाजी, जय भवानी से गूंजी औद्योगिक नगरी, ज्योतिरादित्य ने मंच से भरा जोश

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Mon, 15 Jan 2024 04:18 AM IST
विज्ञापन
Industrial city echoes with Jai Shivaji, Jai Bhavani
पानीपत। जय भवानी, जय शिवाजी के जयकारों से औद्योगिक नगरी गूंज उठी। इसके साथ कोल्हापुर से पहुंचे संदीप के नेतृत्व में बहादुरों ने तलवारबाजी और लट्ठ मार युद्ध का शानदार प्रदर्शन कर लोगों के रोंगटे खड़े कर दिए। पानीपत की तीसरी लड़ाई में मराठी सेना के वीर महाजी सिंधे के वंशज केंद्रीय नागरिक उड्डयन एवं इस्पात मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया महाराज ने मंच से हरियाणा और महाराष्ट्र को जोड़ते हुए हर किसी में मंच से जोश भर दिया।
विज्ञापन

इस दौरान अपने पूर्वजों को याद कर वे भावुक हो उठे और उनकी आंखें भी नम हो गई। वे शौर्य स्मारक पर नतमस्तक हो गए। उन्होंने मंच से कहा कि उनके 16 पूर्वज तीसरी लड़ाई में आए थे। 15 शहीद हो गए थे और 16वें महाजी शिंधे ने लंबा संघर्ष किया और 11 साल बाद लालकिला पर भगवा फहराया।
विज्ञापन

रविवार को मौका पानीपत की तीसरी लड़ाई की याद में आयोजित शौर्य दिवस समारोह का। शौर्य स्मारक समिति ट्रस्ट द्वारा आयोजित कार्यक्रम में करीब महाराष्ट्र से करीब पांच हजार मराठा पहुंचे। इससे पहले शौर्य स्मारक समिति ट्रस्ट के राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रदीप पाटिल की अगुवाई में शोभायात्रा प्राचीन देवी मंदिर से निकाली गई। जिसमें शिवाजी भाऊ और अन्य रणबाकुरों के स्वरूप में पांच लोग घोड़ों पर सवार हुए। शिवाजी भाऊ को पालकी में ले जाया गया। इसके साथ काला आंब स्थित शौर्य स्मारक पर हवन किया। जिसमें महाराष्ट्र और हरियाणा के मराठों व रोड़ मराठों ने आहुति दी।
विज्ञापन
विज्ञापन


बॉक्स

मराठों ने देश के लिए दी अपने प्राणों की आहुति
शौर्य स्मारक समिति ट्रस्ट के राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रदीप पाटिल ने बताया कि 263 साल पहले 14 जनवरी को मराठा पानीपत की धरती पर अहमद शाह अब्दाली के साथ भिड़े थे। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र और हरियाणा के मौसम में बहुत अंतर है। यहां अब कोहरा व कड़ाके की ठंड है, जबकि महाराष्ट्र में सामान्य मौसम है। मराठा की 60 हजार सेना और उनके साथ करीब डेढ़ लाख महिला व बच्चे हाथी, घोड़ों और पैदल ही देश को बचाने के लिए चल पड़े थे। उन्होंने कहा कि लड़ाई में जीतने वाला राज करता है, लेकिन तीसरी लड़ाई में अहमद शाह अब्दाली अपने देश वापस भाग खड़ा हुआ। इतिहास में बेशक कुछ हो, लेकिन मराठा पानीपत की तीसरी लड़ाई में अपनी जीत मानते हैं। उन्होंने युद्ध में घायल दत्ता जी सिंधिया महाराज की एक वीडियो क्लिप भी दिखाई। जिसमें दुश्मन सेना के नजीब को कहते हैं कि जायेंगे तो लड़ेंगी। इसके बाद नजीब के कहने पर उनकी गर्दन धड़ से अलग कर दी। इस मौके पर सांसद संजय भाटिया, राज्यसभा सांसद कृष्णलाल पंवार, पानीपत ग्रामीण विधायक महिपाल ढांडा, पानीपत शहर विधायक प्रमोद विज, भाजपा के जिलाध्यक्ष दुष्यंत भट्ट, प्रदेश महामंत्री डॉ. अर्चना गुप्ता, एडीसी वीना हुड्डा और सीटीएम राजेश सोनी मौजूद रहे।


बॉक्स

सिंधिया बोले यह श्रद्धा की भूमि
शौर्य दिवस समारोह में मुख्यातिथि नागरिक उड्डयन एवं इस्पात मंत्री ज्योतिराव सिंधिया ने कहा कि पानीपत की धरती पर तीन लड़ाई लड़ी गई। तीसरी लड़ाई मराठाओं के जोश और राष्ट्रीयता का इतिहास लिखा है। छत्रपति शिवाजी महाराज ने 12 साल की उम्र में ही न्याय का वातावरण तैयार किया। उन्होंने 400 वर्ष पहले की कोंकण में अपनी नौसेना तैयार कर ली थी। पुर्तगाल और अन्य देश भी पीछे रह गए थे। आज 75 वर्ष बाद नौसेना के झंडे पर छत्रपति महाराज का झंडा लगा है। बाजीराव पैशवा पानीपत की तीसरी लड़ाई के वक्त अस्वस्थ थे। उन्होंने सदाशिवभाऊ के साथ अपने 14 वर्षीय बेटे विश्वास राव को युद्ध में भेजा। विश्वास राव ने बहादुरी के साथ दुश्मनों का सामना किया और वे शहीद हो गए। उन्होंने यहां से सिख-मराठा के भाईचारे का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि मराठा 50 डिग्री तापमान में लड़ाई लड़ते हैं, लेकिन पानीपत की तीसरी लड़ाई में उनका मौसम ने साथ नहीं दिया। सिंधिया के 16 वंशज लड़ाई में शामिल हुए थे। अटक से कटक तक 1771 से 1803 तक मराठों का राज रहा। मुगल, अफगान का शासन खत्म कर दिया था। इसके बाद उनको अंग्रेजों के आने का अंदेशा था। उन्होंने इनका सामना करने के लिए फौज-ए-हिंद का गठन किया।



बॉक्स


रोमांचक प्रस्तुतियों से रोंगटे खड़े किए
कोल्हापुर से संदीप की अगुवाई में एक दर्जन रणबाकुरे शौर्य स्थल पर पहुंचे। उन्होंने यहां तलवारबाजी और लट्ठ के साथ युद्ध का मंचन किया। गर्दन पर फल रखकर करतब दिखाते हुए तलवार के साथ उनको काटा गया। एक महिला ने चार पुरुषों का लट्ठ के साथ सामना किया। दो पुरुषों हमलों के डर से मैदान छोड़कर भाग खड़े हुए। मुख्यातिथि ज्योतिरादित्य सिंधिया ने उनके प्रदर्शन की सराहना की और युवा पीढ़ी को इसके लिए आगे आने का आह्वान किया।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed