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Panipat News: यहां मरना मंजूर पर पाकिस्तान नहीं जाएंगे
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पानीपत। पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के डेरा गाजी खान जिला में घी और चीनी का व्यापार था। मुख्य सड़क पर दस दुकान थी। वहां उन पर इतना अन्याय किया गया कि सब कुछ छोड़ कर भारत आ गए। यहां आकर उन्होंने नागरिक के लिए कई बार आवेदन किया लेकिन सरकारी कार्यालय में उनकी सुनवाई नहीं हुई। अब उनको वापस जाने की बात सुनकर फिर से वहीं डर सताने लगा है। वहां जाकर मरने से अच्छा तो वे यहीं मर जाएंगे लेकिन पाकिस्तान वापस नहीं जाएंगे। यह कहना है पानीपत के चढ़ाऊ मोहल्ला के नंदलाल की पत्नी सुमित्रा का।
सुमित्रा ने बताया कि वे पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के डेरा गाजी खान जिला के बोहवा गांव में रहते थे। बाबरी मस्जिद विध्वंस के बाद पाकिस्तान में हिंदू परिवारों पर अन्याय शुरू कर दिया था। उनके ससुर मदनलाल परिवार समेत 1992 में भारत आ गए थे। वे यहां पानीपत आकर बस गए। वह अपने पति नंदलाल के साथ 2001 में पानीपत आ गए। उस समय उनका बेटा राहुल दस माह का था। यहां जुलाई 2006 में उन्होंने बेटी को जन्म दिया। उनके पति नंदलाल फैक्टरी में काम करने लगे। वे चारों सदस्य पानीपत में किराये के मकान में रहते हैं। पहले बेटे राहुल और फिर बेटी वर्षा की 12वीं के बाद पढ़ाई छूट गई। वे यहां अपने परिवार के साथ हंसी खुशी के साथ रह रहे थे।
आतंकवादियों के हमले की सजा उनको मिल रही
सुमित्रा ने बताया कि पहलगाम में आतंकवादियों ने सैलानियों पर हमला कर दिया। उनकी सजा अब उनको और उनके परिवार मिल रही है। उनके पास हर रोज खुफिया विभाग के लोग आकर जानकारी ले रहे हैं। उनको कई बार सरकारी कार्यालय में बुलाया गया है। अब फिर वीरवार को बुलाया गया है। उनके पति नंदलाल को भारत की नागरिक मिल गई है। जबकि उनकी, उनके बेटे राहुल और बेटी वर्षा को भारत की नागरिकता नहीं मिली है। उनको अब बिछड़ने का डर सता रहा है। संवाद
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परिवार ने 17 साल में कई बार किया आवेदन
नंदलाल ने बताया कि उसकी मां नेकी देवी, बहन संगीता, बड़े भाई अर्जुन व छोटे भाई दर्शन को 20 जुलाई 2009 को नागरिकता मिल गई। उसको उसकी दूसरी बहन पिंकी, छोटे भाई पंकज को 2017 में भारतीय नागरिकता मिली। उनको नागरिकता मिल चुकी है। जबकि पत्नी सुमित्रा, बेटी वर्षा और बेटे राहुल को अब तक नागरिकता नहीं मिल पाई है। उन्होंने पहले 2008, फिर 2019, 2021 और 2023 में भी भारतीय नागरिकता के लिए आवेदन किया है।
वर्जन :
नंदलाल के परिवार के सदस्यों को वापस भेजने के लिए अभी किसी प्रकार का निर्देश नहीं मिला है। परिवार को वीरवार को कार्यालय बुलाया है। उनसे पूरे मामले की जानकारी ली जाएगी। उच्चाधिकारियों के निर्देशानुसार कार्रवाई की जाएगी।
लाेकेंद्र सिंह, पुलिस अधीक्षक, पानीपत।
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सुमित्रा ने बताया कि वे पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के डेरा गाजी खान जिला के बोहवा गांव में रहते थे। बाबरी मस्जिद विध्वंस के बाद पाकिस्तान में हिंदू परिवारों पर अन्याय शुरू कर दिया था। उनके ससुर मदनलाल परिवार समेत 1992 में भारत आ गए थे। वे यहां पानीपत आकर बस गए। वह अपने पति नंदलाल के साथ 2001 में पानीपत आ गए। उस समय उनका बेटा राहुल दस माह का था। यहां जुलाई 2006 में उन्होंने बेटी को जन्म दिया। उनके पति नंदलाल फैक्टरी में काम करने लगे। वे चारों सदस्य पानीपत में किराये के मकान में रहते हैं। पहले बेटे राहुल और फिर बेटी वर्षा की 12वीं के बाद पढ़ाई छूट गई। वे यहां अपने परिवार के साथ हंसी खुशी के साथ रह रहे थे।
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आतंकवादियों के हमले की सजा उनको मिल रही
सुमित्रा ने बताया कि पहलगाम में आतंकवादियों ने सैलानियों पर हमला कर दिया। उनकी सजा अब उनको और उनके परिवार मिल रही है। उनके पास हर रोज खुफिया विभाग के लोग आकर जानकारी ले रहे हैं। उनको कई बार सरकारी कार्यालय में बुलाया गया है। अब फिर वीरवार को बुलाया गया है। उनके पति नंदलाल को भारत की नागरिक मिल गई है। जबकि उनकी, उनके बेटे राहुल और बेटी वर्षा को भारत की नागरिकता नहीं मिली है। उनको अब बिछड़ने का डर सता रहा है। संवाद
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परिवार ने 17 साल में कई बार किया आवेदन
नंदलाल ने बताया कि उसकी मां नेकी देवी, बहन संगीता, बड़े भाई अर्जुन व छोटे भाई दर्शन को 20 जुलाई 2009 को नागरिकता मिल गई। उसको उसकी दूसरी बहन पिंकी, छोटे भाई पंकज को 2017 में भारतीय नागरिकता मिली। उनको नागरिकता मिल चुकी है। जबकि पत्नी सुमित्रा, बेटी वर्षा और बेटे राहुल को अब तक नागरिकता नहीं मिल पाई है। उन्होंने पहले 2008, फिर 2019, 2021 और 2023 में भी भारतीय नागरिकता के लिए आवेदन किया है।
वर्जन :
नंदलाल के परिवार के सदस्यों को वापस भेजने के लिए अभी किसी प्रकार का निर्देश नहीं मिला है। परिवार को वीरवार को कार्यालय बुलाया है। उनसे पूरे मामले की जानकारी ली जाएगी। उच्चाधिकारियों के निर्देशानुसार कार्रवाई की जाएगी।
लाेकेंद्र सिंह, पुलिस अधीक्षक, पानीपत।