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Panipat News: एचएसपीसीबी ने रियल एस्टेट की दो कंपनियों पर शुरू की कार्रवाई
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पानीपत। हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (एचएसपीसीबी) ने पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने वाली दो रियल इस्टेट कंपनी अंसल व टीडीआई पर कार्रवाई शुरू कर दी है। दोनों कंपनियों ने अब तक हर्जाना जमा नहीं कराया है।
वर्ष 2024 में टीडीआई पर 5.47 करोड़ व अंसल पर चार करोड़ पर्यावरण क्षतिपूर्ति हर्जाना लगाया था। बोर्ड ने बताया कि दोनों कंपनी के खिलाफ दो स्तर पर कार्रवाई शुरू कर दी है। दोनों कंपनी के खिलाफ जिला कोर्ट में केस किया है और प्रशासन के माध्यम से हर्जाना वसूलने की दोनों को लोन देने वाली कंपनी ने दिवालियापन की प्रक्रिया चलाने की याचिका भी डाली है। अंसल और टीडीआई पर सीवर के पानी का शोधन करने की बजाय आसपास छोड़ने के आरोप लगे थे। पर्यावरण विद वरुण गुलाटी ने दोनों कंपनियों की शिकायत की थी। इसके बाद एनजीटी ने सख्ती की तो बोर्ड ने हर्जाना लगाया था। प्रशासनिक अधिकारियों की देखरेख में शिकायत के आधार पर दोनों का मौका देखा था।
टीडीआई पर 5.47 करोड़ और अंसल पर चार करोड़ रुपये का हर्जाना लगाया था। दोनों में से किसी भी कंपनी ने हर्जाना जमा नहीं कराया है। ऐसे में प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड अब इन पर सख्त हो गया है। तहसीलदार ने अपनी रिपोर्ट बताया कि काबड़ी-फरीदपुर में टीडीआई के नाम से अभी भी 18 एकड़ से अधिक जमीन है। प्रशासन इस जमीन की बोली करने की तैयारी में है। एचएसपीसीसी के क्षेत्रीय अधिकारी भूपेंद्र चहल ने बताया कि 26 मई को नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल में रिपोर्ट पेश की है। सेक्टर-19 में अंसल ने 346 एकड़ में प्लॉट काटे हैं। 2817 में से 2255 बने हुए हैं। 7.82 एकड़ का कॉमर्शियल क्षेत्र है। जिसमें 115 दुकानें, स्कूल और कॉमर्शियल साइट हैं। काबड़ी-फरीदपुर की जमीन पर टीडीआई ने 291 एकड़ में 2239 प्लॉट डेवलप किए हैं।
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6.68 एकड़ का कॉमर्शियल एरिया है। जिसमें 240 दुकान और एक स्कूल चल रहा है। इस मामले अगली सुनवाई 30 सितंबर की जाएगी। इधर, दोनों कंपनियों को लोन देने वाली कंपनी ने दिवालियापन का केस शुरू करने के लिए राष्ट्रीय कंपनी कानून ट्रिब्यूनल (एनसीएलटी) में याचिका लगाई है।
इधर, एचएसपीसीबी ने अंसल के खिलाफ पानीपत जिला कोर्ट में भी केस कर दिया है। जिसकी सुनवाई दो सितंबर को होगी।
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वर्ष 2024 में टीडीआई पर 5.47 करोड़ व अंसल पर चार करोड़ पर्यावरण क्षतिपूर्ति हर्जाना लगाया था। बोर्ड ने बताया कि दोनों कंपनी के खिलाफ दो स्तर पर कार्रवाई शुरू कर दी है। दोनों कंपनी के खिलाफ जिला कोर्ट में केस किया है और प्रशासन के माध्यम से हर्जाना वसूलने की दोनों को लोन देने वाली कंपनी ने दिवालियापन की प्रक्रिया चलाने की याचिका भी डाली है। अंसल और टीडीआई पर सीवर के पानी का शोधन करने की बजाय आसपास छोड़ने के आरोप लगे थे। पर्यावरण विद वरुण गुलाटी ने दोनों कंपनियों की शिकायत की थी। इसके बाद एनजीटी ने सख्ती की तो बोर्ड ने हर्जाना लगाया था। प्रशासनिक अधिकारियों की देखरेख में शिकायत के आधार पर दोनों का मौका देखा था।
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टीडीआई पर 5.47 करोड़ और अंसल पर चार करोड़ रुपये का हर्जाना लगाया था। दोनों में से किसी भी कंपनी ने हर्जाना जमा नहीं कराया है। ऐसे में प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड अब इन पर सख्त हो गया है। तहसीलदार ने अपनी रिपोर्ट बताया कि काबड़ी-फरीदपुर में टीडीआई के नाम से अभी भी 18 एकड़ से अधिक जमीन है। प्रशासन इस जमीन की बोली करने की तैयारी में है। एचएसपीसीसी के क्षेत्रीय अधिकारी भूपेंद्र चहल ने बताया कि 26 मई को नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल में रिपोर्ट पेश की है। सेक्टर-19 में अंसल ने 346 एकड़ में प्लॉट काटे हैं। 2817 में से 2255 बने हुए हैं। 7.82 एकड़ का कॉमर्शियल क्षेत्र है। जिसमें 115 दुकानें, स्कूल और कॉमर्शियल साइट हैं। काबड़ी-फरीदपुर की जमीन पर टीडीआई ने 291 एकड़ में 2239 प्लॉट डेवलप किए हैं।
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6.68 एकड़ का कॉमर्शियल एरिया है। जिसमें 240 दुकान और एक स्कूल चल रहा है। इस मामले अगली सुनवाई 30 सितंबर की जाएगी। इधर, दोनों कंपनियों को लोन देने वाली कंपनी ने दिवालियापन का केस शुरू करने के लिए राष्ट्रीय कंपनी कानून ट्रिब्यूनल (एनसीएलटी) में याचिका लगाई है।
इधर, एचएसपीसीबी ने अंसल के खिलाफ पानीपत जिला कोर्ट में भी केस कर दिया है। जिसकी सुनवाई दो सितंबर को होगी।