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प्रदूषण फैलाने वालों पर कार्रवाई के लिए एचएसपीसीबी ने डीसी को पत्र जारी कर दिए निर्देश
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इस माह जिले में प्रदूषण सामान्य स्तर से चार गुना बढ़ गया है। इससे लोगों का सांस लेना मुश्किल हो गया है। ऐसे में हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने जिला प्रशासन को पत्र लिखकर बढ़ते प्रदूषण पर नियंत्रण करने का निर्देश दिए हैं। बोर्ड ने कहा है कि जहां भी नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के आदेश का उल्लंघन मिले तो वहां कार्रवाई के बाद रिपोर्ट तैयार कर प्रशासन उन्हें भेजे। रविवार को वायु गुणवत्त सूचकांक में कुछ अंकों की कमी देखने को मिली, लेकिन यह कमी खतरा टालने वाली नहीं रही। वायु गुणवत्ता सूचकांक 306 अंक दर्ज किया गया, जोकि स्वास्थ्य के लिए खतरनाक है।
समस्या यह है कि नवंबर के दौरान हर साल ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान ( ग्रैप) लागू किया जाता है। इसका मकसद है कि पर्यावरण में धूल के कणों को उड़ने से रोका जाए। इसके लिए जिलों को आवश्यक कदम उठाने के लिए दिशा निर्देश दिए जाते हैं। इसके लागू कराने की जिम्मेदारी जिला प्रशासन की होती है। अब तक ऐसा हुआ नहीं और पानीपत स्मॉग की चपेट में आ गया है।
सड़कों से धूल उड़ने से रोकने के लिए महज नगर निगम ने ही पानी का छिड़काव किया। पीडब्ल्यूडी ने स्टेट और एनएचएआई ने नेशनल हाईवे पर पानी का छिड़काव नहीं किया। शहर के अंदर भवन निर्माण सामग्री को ढकने का निर्देश है, लेकिन ऐसा हुआ ही नहीं। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से नोटिस जारी किए गए, लेकिन प्रशासन इनका ढककर रखा जाना सुनिश्चित नहीं कर सका। रेत- कोरसेंट के कण उड़कर हवा को जहरीला बना रहे हैं।
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रविवार को नहीं चली 70 प्रतिशत फैक्टरियां, फिर भी एक्यूआई 306 अंक
रविवार को शहर की 70 प्रतिशत फैक्टरियां बंद रहीं, शहर के बाहरी क्षेत्रों में ही कुछ फैक्टरियां चली हैं। बावजूद इसके एक्यूआई 306 अंक पर पहुंच गया। उद्यमी सरकार से बार बार प्रदूषण स्तर बढ़ने के असल कारण जाने की अपील कर रहे हैं।
कोट
तापमान में गिरावट आ रही है। धूल के कणों से प्रदूषण स्तर बढ़ रहा है। एचएसवीपी को नोटिस दिया गया था कि रेत एवं कोरसेंट के ढककर रखना सुनिश्चित किया जाए। अब फिर से नोटिस जारी किया जाएगा। नगर निगम पेड़-पौधों पर पानी का छिड़काव कर रहा है। अगले सप्ताह तक स्थिति सामान्य होने की उम्मीद है।
- कमलजीत सिंह, रीजनल ऑफिसर, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड
शहर का प्रदूषण स्तर काफी बढ़ रहा है। सुबह शाम स्मॉग की चादर से आंखों व दमा के रोगी बढ़ रहे हैं। स्मॉग स्वास्थ्य के लिए बेहद खतरनाक है। इसलिए सुबह शाम सैर करने से बचें। अपने घरों पर ही व्यायाम करें। घर से निकलते वक्त मास्क का प्रयोग जरूर करें। - डॉ. अमित कुमार, डॉ. सिविल अस्पताल
-दिवाली के दौरान उद्योग कई दिन तक बंद रहे थे। बावजूद इसके एक्यूआई खतरनाक स्तर पर रहा। प्रदूषण के लिए अकेले उद्योगों को जिम्मेदार ठहराना सही नहीं है। प्रशासन से अपील है कि वह प्रदूषण के असल कारकों का पता लगाए।
- भीम राणा, प्रधान डायर्स एसोसिएशन
प्रदूषण स्तर कम नहीं होने के प्रमुख कारण-
1. फैक्टरियों में जलाया जा रहा वेस्ट
2. वातावरण में धूल के कणों की अधिकता
3. पेड़-पौधों के पर जमीं धूल की मोटी परत
4. खुले में भवन निर्माण सामग्री का रखना
5. सड़कों पर वाहनों का अत्यधिक दवाब
बचाव के उपाय
- रेत कोरसेंट के कारोबारी इन्हें ढक कर रखें।
- इन दिनों वाहनों का कम प्रयोग किया जाए।
-धूल पर रोक के लिए सभी विभाग मिलकर सड़कों के किनारे पानी का छिड़काव करें।
- डाई हाउस से निकलने वाले धुएं पर नियंत्रण जरूरी।
- जहां जाम लग रहा है वहां से वाहन डायवर्ट कराएं।
पिछले एक सप्ताह का एक्यूआई-
8 नवंबर 398
9 नवंबर 386
10 नवंबर 425
11 नवंबर 396
12 नवंबर 396
13 नवंबर 303
14 नवंबर- 306
ऐसे जाने एक्यूआई का स्तर-
00 से 50 तक बेहतर
51 से 100 अंक तक संतोषजनक
101 से 200 तक सामान्य
201 से 300 तक खराब (हानिकारक)
301 से 400 तक बहुत ज्यादा खराब
400 से ऊपर गंभीर
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समस्या यह है कि नवंबर के दौरान हर साल ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान ( ग्रैप) लागू किया जाता है। इसका मकसद है कि पर्यावरण में धूल के कणों को उड़ने से रोका जाए। इसके लिए जिलों को आवश्यक कदम उठाने के लिए दिशा निर्देश दिए जाते हैं। इसके लागू कराने की जिम्मेदारी जिला प्रशासन की होती है। अब तक ऐसा हुआ नहीं और पानीपत स्मॉग की चपेट में आ गया है।
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सड़कों से धूल उड़ने से रोकने के लिए महज नगर निगम ने ही पानी का छिड़काव किया। पीडब्ल्यूडी ने स्टेट और एनएचएआई ने नेशनल हाईवे पर पानी का छिड़काव नहीं किया। शहर के अंदर भवन निर्माण सामग्री को ढकने का निर्देश है, लेकिन ऐसा हुआ ही नहीं। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से नोटिस जारी किए गए, लेकिन प्रशासन इनका ढककर रखा जाना सुनिश्चित नहीं कर सका। रेत- कोरसेंट के कण उड़कर हवा को जहरीला बना रहे हैं।
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रविवार को नहीं चली 70 प्रतिशत फैक्टरियां, फिर भी एक्यूआई 306 अंक
रविवार को शहर की 70 प्रतिशत फैक्टरियां बंद रहीं, शहर के बाहरी क्षेत्रों में ही कुछ फैक्टरियां चली हैं। बावजूद इसके एक्यूआई 306 अंक पर पहुंच गया। उद्यमी सरकार से बार बार प्रदूषण स्तर बढ़ने के असल कारण जाने की अपील कर रहे हैं।
कोट
तापमान में गिरावट आ रही है। धूल के कणों से प्रदूषण स्तर बढ़ रहा है। एचएसवीपी को नोटिस दिया गया था कि रेत एवं कोरसेंट के ढककर रखना सुनिश्चित किया जाए। अब फिर से नोटिस जारी किया जाएगा। नगर निगम पेड़-पौधों पर पानी का छिड़काव कर रहा है। अगले सप्ताह तक स्थिति सामान्य होने की उम्मीद है।
- कमलजीत सिंह, रीजनल ऑफिसर, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड
शहर का प्रदूषण स्तर काफी बढ़ रहा है। सुबह शाम स्मॉग की चादर से आंखों व दमा के रोगी बढ़ रहे हैं। स्मॉग स्वास्थ्य के लिए बेहद खतरनाक है। इसलिए सुबह शाम सैर करने से बचें। अपने घरों पर ही व्यायाम करें। घर से निकलते वक्त मास्क का प्रयोग जरूर करें। - डॉ. अमित कुमार, डॉ. सिविल अस्पताल
-दिवाली के दौरान उद्योग कई दिन तक बंद रहे थे। बावजूद इसके एक्यूआई खतरनाक स्तर पर रहा। प्रदूषण के लिए अकेले उद्योगों को जिम्मेदार ठहराना सही नहीं है। प्रशासन से अपील है कि वह प्रदूषण के असल कारकों का पता लगाए।
- भीम राणा, प्रधान डायर्स एसोसिएशन
प्रदूषण स्तर कम नहीं होने के प्रमुख कारण-
1. फैक्टरियों में जलाया जा रहा वेस्ट
2. वातावरण में धूल के कणों की अधिकता
3. पेड़-पौधों के पर जमीं धूल की मोटी परत
4. खुले में भवन निर्माण सामग्री का रखना
5. सड़कों पर वाहनों का अत्यधिक दवाब
बचाव के उपाय
- रेत कोरसेंट के कारोबारी इन्हें ढक कर रखें।
- इन दिनों वाहनों का कम प्रयोग किया जाए।
-धूल पर रोक के लिए सभी विभाग मिलकर सड़कों के किनारे पानी का छिड़काव करें।
- डाई हाउस से निकलने वाले धुएं पर नियंत्रण जरूरी।
- जहां जाम लग रहा है वहां से वाहन डायवर्ट कराएं।
पिछले एक सप्ताह का एक्यूआई-
8 नवंबर 398
9 नवंबर 386
10 नवंबर 425
11 नवंबर 396
12 नवंबर 396
13 नवंबर 303
14 नवंबर- 306
ऐसे जाने एक्यूआई का स्तर-
00 से 50 तक बेहतर
51 से 100 अंक तक संतोषजनक
101 से 200 तक सामान्य
201 से 300 तक खराब (हानिकारक)
301 से 400 तक बहुत ज्यादा खराब
400 से ऊपर गंभीर