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चालीस साल से कुरान-ए-पाक की अजमत संभाले है हिंदू परिवार
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Hindu family has handled the Quran-e-Pak for forty years
- फोटो : Panipat
जरा से मसले पर धार्मिक फसाद फैलाकर दूसरे धर्म की चीजों को नुकसान पहुंचाने वाले पानीपत के राज कुमार सहगल के परिवार से सबक लें। सहगल परिवार अरब के शेख द्वारा भेंट किए गए कुरान शरीफ को संभाल कर रखे है। इस कुुरान शरीफ की महज एक इंच की लंबाई की है। इसका वजन 2.800 मिली ग्राम यानी 3 ग्राम से भी कम है। इसकी चौड़ाई आधे इंच से भी कम है, फिर भी इसमें 572 पेजों पर फारसी भाषा में कुुरान की सभी आयतें लिखी हैं, इनको बिना लेंस के भी पढ़ा जा सकता है। सहगल परिवार इस कुरान को दुनिया का सबसे छोटा और नायाब कुरान होने का दावा करता है।
कलंदर चौक के पास प्रताप बाजार में स्थित राजा ज्वैलर्स के मालिक राजकुमार सहगल ने बताया कि उनका सराफ का पुश्तैनी काम है। यहां उनके दादा-पिता की दुकानें हुुआ करती थीं। सन् 1982 में जब वे महज 15 साल के थे, तब अरब से दो शेख कलंदर पीर दरगाह पर आए थे। ये लोग एक ताबीज बनवाने के लिए उनकी दुकान पर पहुंचे। उस दिन छुट्टी थी और बाजार बंद था और केवल उन्हीं दुकान ही खुली थी, लेकिन उनके पास किसी भी प्रकार की मशीन नहीं थी। वे हाथ से ही काम करते थे। शेखों ने उनसे ताबीज बनवाने का आग्रह किया तो उन्होंने मना कर दिया। शेख उनसे निवेदन किया कि अगली सुबह उन्हें वापस जाना है। उनके जहाज का टिकट तक कैंसल हो जाएगा।
इस पर राजकुमार सहगल ने चार घंटे तक मेहनत कर उनके लिए ताबीज तैयार दिया। इस पर शेख ने खुश होकर उन्हें अच्छी रकम देने लगे, लेकिन सहगल ने मना कर दिया। तब शेख ने अपने पास मौजूद दो कुरान में से एक उन्हें उपहार के तौर पर दिया था। कहा कि ये दुनिया का सबसे नायाब दो कुरानों में से एक है। उस दिन से लेकर आज तक करीब चालीस साल से लगातार सहगल इसे अपने पास संभाल कर रख रहे हैं। इसके लिए उन्होंने एक स्पेशल का चांदी का बक्सा भी बनवाया है।
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बुरे दिनों में कई खरीदार लाखों देने आए, लेकिन नहीं बेचा कुरान: सुषमा
राजकुमार सहगल की पत्नी सुषमा सहगल ने बताया कि उनकी शादी को 35 साल हो गए हैं। शादी के बाद से ही वे इस कुरान की देखभाल करती आ रहीं हैं। 2012 में कुछ लुटेरों और ठगों ने उन्हें सम्मोहित कर उनकी दुकान से करीब 300 ग्राम सोना लूट लिया था । जिससे वे कर्जदार हो गए। इसके बाद से उनके बुरे दिनों की शुरुआत हो गई। इसका जब कई लोगों को पता चला तो वे उनके पास कुरान को खरीदने के लिए आए। उन्हीं के एक ग्राहक ने इसके लिए ढाई लाख की पेशकश की तो एक अलग आदमी ने इसके लिए पांच लाख रुपये का ऑफर दिया, लेकिन उन्होंने इसे बेचने से साफ मना कर दिया। परिवार का कहना है कि भले ही उन पर कितने ही संकट क्यों न आ जाएं, इसमें उनकी पूरी आस्था है और वे इसे हमेशा अपने साथ रखेंगे।
बेटा चलाता है दुकान, दंपती संभालते हैं कुुरान, दूर दूर से लोग आते हैं देखने
राजकुमार सहगल और उनकी पत्नी सुषमा सहगल ने बताया कि दुकान तो अब उनका बेटा दिनेश सहगल ही संभालता है, वे दोनों तो सिर्फ कुरान को संभालते हैं। इसे देखने के लिए देश विदेश से भी लोग उनके घर आ चुके हैं। कई राज्यों के अलग-अलग शहरों से लोग इसे आज भी देखने आते हैं। उन्होंने कहा कि उन्हें गर्व होता है कि दुनिया का एक नायाब तोहफा उनके पास भी है। संवाद
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कलंदर चौक के पास प्रताप बाजार में स्थित राजा ज्वैलर्स के मालिक राजकुमार सहगल ने बताया कि उनका सराफ का पुश्तैनी काम है। यहां उनके दादा-पिता की दुकानें हुुआ करती थीं। सन् 1982 में जब वे महज 15 साल के थे, तब अरब से दो शेख कलंदर पीर दरगाह पर आए थे। ये लोग एक ताबीज बनवाने के लिए उनकी दुकान पर पहुंचे। उस दिन छुट्टी थी और बाजार बंद था और केवल उन्हीं दुकान ही खुली थी, लेकिन उनके पास किसी भी प्रकार की मशीन नहीं थी। वे हाथ से ही काम करते थे। शेखों ने उनसे ताबीज बनवाने का आग्रह किया तो उन्होंने मना कर दिया। शेख उनसे निवेदन किया कि अगली सुबह उन्हें वापस जाना है। उनके जहाज का टिकट तक कैंसल हो जाएगा।
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इस पर राजकुमार सहगल ने चार घंटे तक मेहनत कर उनके लिए ताबीज तैयार दिया। इस पर शेख ने खुश होकर उन्हें अच्छी रकम देने लगे, लेकिन सहगल ने मना कर दिया। तब शेख ने अपने पास मौजूद दो कुरान में से एक उन्हें उपहार के तौर पर दिया था। कहा कि ये दुनिया का सबसे नायाब दो कुरानों में से एक है। उस दिन से लेकर आज तक करीब चालीस साल से लगातार सहगल इसे अपने पास संभाल कर रख रहे हैं। इसके लिए उन्होंने एक स्पेशल का चांदी का बक्सा भी बनवाया है।
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बुरे दिनों में कई खरीदार लाखों देने आए, लेकिन नहीं बेचा कुरान: सुषमा
राजकुमार सहगल की पत्नी सुषमा सहगल ने बताया कि उनकी शादी को 35 साल हो गए हैं। शादी के बाद से ही वे इस कुरान की देखभाल करती आ रहीं हैं। 2012 में कुछ लुटेरों और ठगों ने उन्हें सम्मोहित कर उनकी दुकान से करीब 300 ग्राम सोना लूट लिया था । जिससे वे कर्जदार हो गए। इसके बाद से उनके बुरे दिनों की शुरुआत हो गई। इसका जब कई लोगों को पता चला तो वे उनके पास कुरान को खरीदने के लिए आए। उन्हीं के एक ग्राहक ने इसके लिए ढाई लाख की पेशकश की तो एक अलग आदमी ने इसके लिए पांच लाख रुपये का ऑफर दिया, लेकिन उन्होंने इसे बेचने से साफ मना कर दिया। परिवार का कहना है कि भले ही उन पर कितने ही संकट क्यों न आ जाएं, इसमें उनकी पूरी आस्था है और वे इसे हमेशा अपने साथ रखेंगे।
बेटा चलाता है दुकान, दंपती संभालते हैं कुुरान, दूर दूर से लोग आते हैं देखने
राजकुमार सहगल और उनकी पत्नी सुषमा सहगल ने बताया कि दुकान तो अब उनका बेटा दिनेश सहगल ही संभालता है, वे दोनों तो सिर्फ कुरान को संभालते हैं। इसे देखने के लिए देश विदेश से भी लोग उनके घर आ चुके हैं। कई राज्यों के अलग-अलग शहरों से लोग इसे आज भी देखने आते हैं। उन्होंने कहा कि उन्हें गर्व होता है कि दुनिया का एक नायाब तोहफा उनके पास भी है। संवाद