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Panipat News: इमरजेंसी में हाई डेपेंडसी यूनिट तैयार, बच्चों को मिलेगा बेहतर इलाज

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Fri, 03 May 2024 05:47 AM IST
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High dependency unit ready in emergency, children will get better treatment
पानीपत। सिविल अस्पताल में बनने वाली पीडियाट्रिक हाई डिपेंडेसी यूनिट बनकर लगभग तैयार हो चुकी है। वेंटिलेटर भी इंस्टॉल कर दिए गए हैं। वार्ड को तैयार करने के साढ़े 20 लाख रुपये का खर्च आया है। पीएचडीयू को तैयार होने में लगभग दो साल का वक्त लगा है। पीएचडीयू में 14 साल से कम आयु के बच्चों को रखा जाएगा। पीएचडीयू बनने से बच्चों को काफी राहत मिलेगी। डॉक्टरों को इन्हें खानपुर या रोहतक पीजीआई रेफर नहीं करना पड़ेगा। जिला नागरिक अस्पताल से रेफरल भी काफी कम होगा। स्वास्थ्य विभाग आचार संहिता के हटने के बाद इस वार्ड का शुभारंभ करने की प्लानिंग बना रहा है।
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जनवरी 2021 में तैयार होनी थी पीएचडीयू
स्वास्थ्य विभाग ने 2021 में आई कोरोना की लहर में पीएचडीयू बनाने की योजना बनाई थी। जिले में पहली और दूसरी लहर में चार हजार से अधिक बच्चे कोरोना संक्रमित हुए। हालांकि 18 साल से कम आयु के किशोरों और बच्चों का रिकवरी रेट 100 प्रतिशत रहा था। प्लानिंग थी कि संक्रमण से गंभीर हालत में पहुंचे बच्चों का इलाज सिविल अस्पताल की पीएचडीयू में ही हो सके। इसके लिए जनवरी 2021 में ही इसे तैयार किया जाना था लेकिन बजट के अभाव में ये काम अधर में लटका हुआ था। 2022 दिसंबर में बजट जारी हुआ था। अब इस वार्ड में विभिन्न बीमारियों के गंभीर बाल रोगियों को रखा जाएगा।
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निजी अस्पताल में एक दिन में खर्च करने पड़ते हैं दस हजार रुपये

निजी अस्पतालों में बनी पीडियाट्रिक हाई डिपेंडेसी यूनिट और आईसीयू की सेवाओं के लिए लोगों को एक दिन के आठ से 10 हजार रुपये खर्च करने पड़ते हैं। गरीब लोगों के लिए निजी अस्पतालों में बच्चों का इलाज कराना मुश्किल हो जाता है। सरकारी डॉक्टर बच्चों को रोहतक पीजीआई या खानपुर मेडिकल कॉलेज रेफर करते हैं। यहां पर प्रदेश भर से रोगी आते हैं। इसलिए समय पर वार्ड में वेंटिलेटर की सुविधा नहीं मिल पाती। इस लिहाज से ये जिले के लिए बड़ी सौगात है।
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वर्जन-
जिला नागरिक अस्पताल के डिप्टी एमएस डॉ. अमित पोरिया ने बताया कि पीएचडीयू पर काम चल रहा है। काफी हद तक पीएचडीयू तैयार भी हो चुका है। इसमें बच्चों के लिए अत्याधुनिक स्वास्थ्य सेवाएं होंगी। यह वार्ड तैयार होने से बाल रोगियों के रेफरल में भी कमी आएगी। इसको इमरजेंसी वार्ड में तैयार किया गया है।
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