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Panipat News: नौतपा में खूब सताएगी गर्मी, 45 के पार जाएगा तापमान
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पानीपत। नौतपा से पहले ही गर्मी अपना प्रचंड रूप दिखा रही है। हालांकि बीते दिनों कुछ जगहों पर बेमौसम बारिश से लोगों को थोड़ी राहत अवश्य मिली थी लेकिन यह राहत ज्यादा समय के लिए नहीं रही। बीते करीब 10 दिनों से प्रचंड गर्मी अपना रूप दिखा रही है। वीरवार को भी अधिकतम तापमान 42 डिग्री और न्यूनतम तापमान 27 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। वहीं, नौतपा में सूर्यदेव खूब तपाएंगे। नौतपा में अधिकतम तापमान 45 डिग्री के पार अर्थात 47 डिग्री तक पहुंचने की संभावना है।
सूर्यदेव की तपन से जनजीवन गंभीर रुप से प्रभावित होगा। हालांकि नौतपा के आखिरी दो दिन आंधी तूफान औऱ तेज बारिश के आसार बने हुए हैं जिससे सूर्य की तपन से हल्की राहत मिल सकती है। मई माह में नौतपा इस बार 25 मई से शुरू हो जाएगा। इन 9 दिनों की अवधि में सूर्य और पृथ्वी के बीच की दूरी काफी कम हो जाएगी। इस कारण सूर्यदेव की तपिश काफी ज्यादा महसूस होगी।
ज्योतिषाचार्य पं. राधे-राधे के अनुसार सूर्य 25 मई को 3:15 बजे रोहिणी नक्षत्र में प्रवेश करेंगे। इसी दिन सूर्य देव मृगशिरा नक्षत्र में प्रवेश कर जाएंगे। रोहिणी नक्षत्र में सूर्यदेव के प्रवेश के साथ ही नौतपा प्रारंभ हो जाएंगे। इसके बाद नौ दिन का नौतपा रहेगा। इसके साथ ही सूर्य देव 8 जून 1:04 बजे तक रोहिणी नक्षत्र में रहेंगे। उन्होंने बताया कि ज्येष्ठ मास की ग्रीष्म ऋतु नौतपा को अधिक गर्मी का संकेत माना जाता है। नौतपा शुक्ल पक्ष में आर्द्रा नक्षत्र से 9 नक्षत्रों तक यानी 9 दिनों तक रहता है। यह जरूरी नहीं कि नौतपा में अधिक गर्मी हो। आर्द्रा के 9 नक्षत्रों तक जो सबसे अधिक गर्मी प्राप्त करता है, बाद में सूर्य उस नक्षत्र में 15 दिनों तक रहता है और अच्छी वर्षा होती है। नौतपा की शुरुआत भी रोहिणी नक्षत्र से होगी। नौतपा में तेज हवा के साथ बवंडर और बारिश की संभावना रहती है।
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नौतपा में अपने चरम पर होती है गर्मी
नौतपा से आशय सूर्य का नौ दिनों तक अपने सबसे अधिक ताप में होना है। यानि इस दौरान गर्मी अपने चरम पर होती है। चंद्र देव रोहिणी नक्षत्र के स्वामी है, जो शीतलता का कारक है। परंतु इस समय में ये सूर्य के प्रभाव में आ जाते हैं। जब सूर्य रोहिणी नक्षत्र में 15 दिनों के लिए आता है, इन पंद्रह दिनों के पहले नौ दिन सबसे अधिक गर्मी वाले होते हैं। इन्हीं शुरुआती नौ दिनों को नौतपा के नाम से जाना जाता है। नौतपा के दौरान तापमान 44 से 45 डिग्री तक पहुंच जाता है। सूर्य की गर्मी के चलते समुद्र और नदियों का जल वाष्प बनकर उड़ जाता है और यही वाष्प बादल का रूप ले लेती हैं।
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शनि की वक्री चाल के कारण तपेगा नौतपा
खगोल विज्ञान के अनुसार इस दौरान धरती पर सूर्य की किरणें सीधे लंबी पड़ती है। इस कारण तापमान अधिक बढ़ जाता है। यदि नौतपा के सभी दिन पूरे रहे तो यह अच्छी बारिश का संकेत होता है। सूर्य के रोहिणी नक्षत्र में आने का प्रभाव ज्योतिष गणना के मुताबिक शनि की वक्री चाल के चलते नौतपा खूब तपेगा। हालांकि नौतपा के आखिरी दो दिनों के भीतर आंधी तूफान व बारिश होने की संभावना रहेगी।
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सूर्यदेव की तपन से जनजीवन गंभीर रुप से प्रभावित होगा। हालांकि नौतपा के आखिरी दो दिन आंधी तूफान औऱ तेज बारिश के आसार बने हुए हैं जिससे सूर्य की तपन से हल्की राहत मिल सकती है। मई माह में नौतपा इस बार 25 मई से शुरू हो जाएगा। इन 9 दिनों की अवधि में सूर्य और पृथ्वी के बीच की दूरी काफी कम हो जाएगी। इस कारण सूर्यदेव की तपिश काफी ज्यादा महसूस होगी।
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ज्योतिषाचार्य पं. राधे-राधे के अनुसार सूर्य 25 मई को 3:15 बजे रोहिणी नक्षत्र में प्रवेश करेंगे। इसी दिन सूर्य देव मृगशिरा नक्षत्र में प्रवेश कर जाएंगे। रोहिणी नक्षत्र में सूर्यदेव के प्रवेश के साथ ही नौतपा प्रारंभ हो जाएंगे। इसके बाद नौ दिन का नौतपा रहेगा। इसके साथ ही सूर्य देव 8 जून 1:04 बजे तक रोहिणी नक्षत्र में रहेंगे। उन्होंने बताया कि ज्येष्ठ मास की ग्रीष्म ऋतु नौतपा को अधिक गर्मी का संकेत माना जाता है। नौतपा शुक्ल पक्ष में आर्द्रा नक्षत्र से 9 नक्षत्रों तक यानी 9 दिनों तक रहता है। यह जरूरी नहीं कि नौतपा में अधिक गर्मी हो। आर्द्रा के 9 नक्षत्रों तक जो सबसे अधिक गर्मी प्राप्त करता है, बाद में सूर्य उस नक्षत्र में 15 दिनों तक रहता है और अच्छी वर्षा होती है। नौतपा की शुरुआत भी रोहिणी नक्षत्र से होगी। नौतपा में तेज हवा के साथ बवंडर और बारिश की संभावना रहती है।
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नौतपा में अपने चरम पर होती है गर्मी
नौतपा से आशय सूर्य का नौ दिनों तक अपने सबसे अधिक ताप में होना है। यानि इस दौरान गर्मी अपने चरम पर होती है। चंद्र देव रोहिणी नक्षत्र के स्वामी है, जो शीतलता का कारक है। परंतु इस समय में ये सूर्य के प्रभाव में आ जाते हैं। जब सूर्य रोहिणी नक्षत्र में 15 दिनों के लिए आता है, इन पंद्रह दिनों के पहले नौ दिन सबसे अधिक गर्मी वाले होते हैं। इन्हीं शुरुआती नौ दिनों को नौतपा के नाम से जाना जाता है। नौतपा के दौरान तापमान 44 से 45 डिग्री तक पहुंच जाता है। सूर्य की गर्मी के चलते समुद्र और नदियों का जल वाष्प बनकर उड़ जाता है और यही वाष्प बादल का रूप ले लेती हैं।
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शनि की वक्री चाल के कारण तपेगा नौतपा
खगोल विज्ञान के अनुसार इस दौरान धरती पर सूर्य की किरणें सीधे लंबी पड़ती है। इस कारण तापमान अधिक बढ़ जाता है। यदि नौतपा के सभी दिन पूरे रहे तो यह अच्छी बारिश का संकेत होता है। सूर्य के रोहिणी नक्षत्र में आने का प्रभाव ज्योतिष गणना के मुताबिक शनि की वक्री चाल के चलते नौतपा खूब तपेगा। हालांकि नौतपा के आखिरी दो दिनों के भीतर आंधी तूफान व बारिश होने की संभावना रहेगी।