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Panipat News: स्वास्थ्य विभाग ने 28 बच्चों को दिया नया जीवन

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sat, 04 Jan 2025 01:33 AM IST
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Health department gave new life to 28 children
पानीपत। स्वास्थ्य विभाग ने राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के दौरान 31 मार्च से 31 दिसंबर तक 28 ऐसे बच्चों को चिह्नित किया है, जो जन्म से ही दिल में छेद की समस्या से ग्रस्त थे। स्वास्थ्य विभाग ने शिक्षा की मदद से ऐसे कई बच्चों को स्कूल में ही चिह्नित किया। बच्चों की सभी जांच कराने के बाद चंडीगढ़, मोहाली, पंचकूला व फरीदबाद के निजी अस्पताल में उनकी सर्जरी कराकर नया जीवन दिया गया है।
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स्वास्थ्य विभाग का यह कार्यक्रम पिछले चार साल से चल रहा है। इन चार सालों में 119 बच्चों को चिह्नित उनकी दिल में छेद की सर्जरी कराई गई है। ऐसे बच्चों पर स्वास्थ्य विभाग 1.50 करोड़ रुपये खर्च कर चुका हैं। सात बच्चों की सर्जरी अभी बाकी है। इन बच्चों की सर्जरी की अनुमति के लिए फाइल मुख्यालय भेजी जा चुकी है। उम्मीद जल्द इन बच्चों को भी नया जीवन मिलेगा।
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दिल में जन्मजात सुराख होना आनुवांशिक भी हो सकता है। जिन माता-पिता को पैदा होने के साथ हृदय संबंधी बीमारी होती है। ये स्थिति उन बच्चों की भी हो सकती है। गर्भावस्था में महिलाओं के धूम्रपान करने पर भी बच्चों में दिल में दिल में सुराख की बीमारी होने का खतरा बढ़ जाता है। जिले में इस प्रकार के केसों की संख्या तेजी से बढ़ी है। जिसकी वजह धूम्रपान को माना जा रहा है। स्वास्थ्य विभाग इस बीमारी के खिलाफ गर्भवतियों को लगातार जागरूक कर रहा है।
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साल- सर्जरी







2021-22- 28







2022-23 38







2023-24 25







2024-25 अब तक 28







कुल- 119







दिल में छेद के लक्षण-







- दूध पीते समय बच्चों को अधिक पसीना आना।







- उम्र के हिसाब से वजन विकास में वृद्धि न होना।







- सांस तेजी से चलती हो और बच्चा रोते हुए नीला पड़ जाए ।







- थोड़ी देर खेलने पर थक जाए ।







- हृदय गति असामान्य रहती हो।







- बच्चों को का रंग नीला पड़ जाता है ।







- नाखून और होंठ भी नीले पड़ जाते हैं।







गर्भ में पल रहे बच्चे पर धुंए का सबसे बुरा प्रभाव : डॉ. सुखदीप


वैसे तो धूम्रपान हर वर्ग आयु वाले इंसान के लिए बेहद खतरनाक है लेकिन ये महिलाओं के लिए और अधिक खतरनाक साबित हो रहा है। गर्भावस्था के दौरान धूम्रपान करने से गर्भ में पल रहे बच्चे पर बुरा असर पड़ता है। उसके बीमारियों के साथ पैदा होने का भय अधिक बढ़ जाता है। बच्चे के जन्मजात दिल में सुराख के साथ पैदा होने का ये भी बढ़ा कारण है।

डॉ. सुखदीप कौर, इमरजेंसी मेडिसिन, नागरिक अस्पताल







बच्चों को चिह्नित कर करवा रहे इलाज : डॉ. ललित







साढ़े चार साल में 119 ऐसे बच्चों को चिह्नित किया गया है। जो जन्मजात दिल में सुराख के साथ पैदा हुए थे। इनका निशुल्क इलाज भी करवाया गया है। 31 मार्च से 31 दिसंबर 2024 तक 28 बच्चे चिह्नित किए गए और उनका इलाज कराया गया। शिक्षा विभाग की मदद से ऐसे बच्चों को चिह्नित किया जा रहा है जिनके दिल में छेद है।







डॉ. ललित वर्मा, डिप्टी सिविल सर्जन
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