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हरियाणा की सर्वश्रेष्ठ फुटबॉल टीम सिवाह को नहीं मिलती सरकारी सुविधा
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पानीपत। फुटबॉल खेलते हुए।
- फोटो : Panipat
नीरज गिरी
पानीपत। हरियाणा की सर्वश्रेष्ठ फुटबॉल टीम माने जानी वाली गांव सिवाह को सरकार ही तरफ से कोई सुविधा नहीं दी जा रही है। फुटबॉल से सिवाह गांव का बहुत पुराना नाता है। सिवाह गांव के हर बुजुर्ग को फुटबॉल खेलना आता है, जिसकी वजह से अब उनकी पीढ़ी हर साल हरियाणा फुटबॉल प्रतियोगिता में पदक लेकर आती है।
गांव के खिलाड़ियों का कहना है कि हमारा गांव हर साल पदक लेकर आता है, जिसके बाद भी उन्हें कोई सुविधा नहीं दी जाती है। यदि खिलाड़ियों को फुटबॉल भी चाहिए तो वह खुद खरीदकर लाते हैं। इसके बाद भी वह हरियाणा में अच्छा प्रदर्शन कर रहे हैं। गांव के बुजुर्गों ने बताया कि जब पानीपत व करनाल अलग नहीं हुआ था तब से ही गांव के युवा फुटबॉल खेलते आ रहे हैं।
हरियाणा में सिवाह ही ऐसा गांव है जहां सबसे ज्यादा फुटबॉल के खिलाड़ी हैं। इस गांव में 350 से ज्यादा राज्यस्तरीय खिलाड़ी हैं जो राज्यस्तरीय प्रतियागिता में खेलते हैं। वहीं 95 से ज्यादा राष्ट्र स्तरीय खिलाड़ी हैं, जो भारत की फुटबॉल टीम में शामिल हो चुके हैं।
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सिवाह गांव में फुटबॉल का कोई आधुनिक ग्राउंड नहीं है। गांव के लोगों ने स्टेडियम बनाने के लिए अपनी साढे़ 13 एकड़ जमीन दान दी थी, जिससे सभी खेल को बढ़ावा मिल सकें। लेकिन स्टेडियम बनाने में गांव के मुख्य खेल को ही ध्यान में नहीं रखा गया और उसमें फुटबॉल ग्राउंड अलग से नहीं बनाया गया है। चौटाला रोड पर निर्माणाधीन स्टेडियम में आउटडोर गेम्स का भाग पूरा हो चुका है, इसके बाद भी गांव के खिलाड़ी सरकारी स्कूल के ग्राउंड में अभ्यास कर रहे हैं। संवाद
टीम पदक जीते बिना नहीं लौटती
गांव सिवाह की टीम जब भी राज्यस्तरीय प्रतियोगिता में खेलने जाती है तो वह कभी खाली हाथ नहीं आती है। पिछले 11 साल से टीम हमेशा पदक लेकर ही वापस लौटी है, जिसमें 8 स्वर्ण पदक हैं। इसके बाद भी गांव के खिलाड़ियों को सरकार की तरफ से कोई बढ़ावा नहीं मिल रहा है।
अभी भी खेलते हैं फुटबॉल : धर्मबीर कादयान
50 से ज्यादा उम्र होने के बाद भी फुटबॉल खेलता हूं। आज से 25 साल पहले हमारे गांव की टीम फुटबॉल में सबसे अच्छा प्रदर्शन करती थी। गांव के युवा फुटबॉल खेलकर अभी भी गांव का नाम रोशन कर रहे हैं।
- धर्मबीर कादयान, पूर्व खिलाड़ी
गांव के युवाओं को सिखाता हूं
गांव के युवाओं को अभी भी खेलने के तरीके बताता हूं। 30 से 35 साल पहले हम भी गांव की टीम में शामिल होकर खेलते थे। पानीपत के अलग होने के पहले से ही गांव सिवाह हर बार अच्छा प्रदर्शन करता था।
-बलवान कादयान, पूर्व खिलाड़ी
कोच बोले- नर्सरी तक नहीं दी
सिवाह शुरू से लेकर अब तक फुटबॉल में सबसे अच्छा प्रदर्शन करता आया है। लेकिन अभी गांव को नर्सरी प्रदान नहीं की गई है। नर्सरी मिलने से सरकारी कोच ट्रेनिंग देगा व खिलाड़ियों को सभी उपकरण उपलब्ध कराए जाएंगे।
- प्रवीन कादयान, कोच गांव सिवाह
यदि हमारे गांव के खिलाड़ियों को आधुनिक खेल ग्राउंड मिल जाए तो उनकी प्रतिभा और निखरेगी। गांव के निर्माणाधीन नए स्टेडियम में भी फुटबॉल ग्राउंड नहीं बनाया गया। लेकिन फिर भी हम 5 एकड़ जमीन और फुटबॉल ग्राउंड के लिए देने को तैयार हैं।
-खुशदिल कादयान, निवर्तमान सरपंच, गांव सिवाह
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पानीपत। हरियाणा की सर्वश्रेष्ठ फुटबॉल टीम माने जानी वाली गांव सिवाह को सरकार ही तरफ से कोई सुविधा नहीं दी जा रही है। फुटबॉल से सिवाह गांव का बहुत पुराना नाता है। सिवाह गांव के हर बुजुर्ग को फुटबॉल खेलना आता है, जिसकी वजह से अब उनकी पीढ़ी हर साल हरियाणा फुटबॉल प्रतियोगिता में पदक लेकर आती है।
गांव के खिलाड़ियों का कहना है कि हमारा गांव हर साल पदक लेकर आता है, जिसके बाद भी उन्हें कोई सुविधा नहीं दी जाती है। यदि खिलाड़ियों को फुटबॉल भी चाहिए तो वह खुद खरीदकर लाते हैं। इसके बाद भी वह हरियाणा में अच्छा प्रदर्शन कर रहे हैं। गांव के बुजुर्गों ने बताया कि जब पानीपत व करनाल अलग नहीं हुआ था तब से ही गांव के युवा फुटबॉल खेलते आ रहे हैं।
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हरियाणा में सिवाह ही ऐसा गांव है जहां सबसे ज्यादा फुटबॉल के खिलाड़ी हैं। इस गांव में 350 से ज्यादा राज्यस्तरीय खिलाड़ी हैं जो राज्यस्तरीय प्रतियागिता में खेलते हैं। वहीं 95 से ज्यादा राष्ट्र स्तरीय खिलाड़ी हैं, जो भारत की फुटबॉल टीम में शामिल हो चुके हैं।
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सिवाह गांव में फुटबॉल का कोई आधुनिक ग्राउंड नहीं है। गांव के लोगों ने स्टेडियम बनाने के लिए अपनी साढे़ 13 एकड़ जमीन दान दी थी, जिससे सभी खेल को बढ़ावा मिल सकें। लेकिन स्टेडियम बनाने में गांव के मुख्य खेल को ही ध्यान में नहीं रखा गया और उसमें फुटबॉल ग्राउंड अलग से नहीं बनाया गया है। चौटाला रोड पर निर्माणाधीन स्टेडियम में आउटडोर गेम्स का भाग पूरा हो चुका है, इसके बाद भी गांव के खिलाड़ी सरकारी स्कूल के ग्राउंड में अभ्यास कर रहे हैं। संवाद
टीम पदक जीते बिना नहीं लौटती
गांव सिवाह की टीम जब भी राज्यस्तरीय प्रतियोगिता में खेलने जाती है तो वह कभी खाली हाथ नहीं आती है। पिछले 11 साल से टीम हमेशा पदक लेकर ही वापस लौटी है, जिसमें 8 स्वर्ण पदक हैं। इसके बाद भी गांव के खिलाड़ियों को सरकार की तरफ से कोई बढ़ावा नहीं मिल रहा है।
अभी भी खेलते हैं फुटबॉल : धर्मबीर कादयान
50 से ज्यादा उम्र होने के बाद भी फुटबॉल खेलता हूं। आज से 25 साल पहले हमारे गांव की टीम फुटबॉल में सबसे अच्छा प्रदर्शन करती थी। गांव के युवा फुटबॉल खेलकर अभी भी गांव का नाम रोशन कर रहे हैं।
- धर्मबीर कादयान, पूर्व खिलाड़ी
गांव के युवाओं को सिखाता हूं
गांव के युवाओं को अभी भी खेलने के तरीके बताता हूं। 30 से 35 साल पहले हम भी गांव की टीम में शामिल होकर खेलते थे। पानीपत के अलग होने के पहले से ही गांव सिवाह हर बार अच्छा प्रदर्शन करता था।
-बलवान कादयान, पूर्व खिलाड़ी
कोच बोले- नर्सरी तक नहीं दी
सिवाह शुरू से लेकर अब तक फुटबॉल में सबसे अच्छा प्रदर्शन करता आया है। लेकिन अभी गांव को नर्सरी प्रदान नहीं की गई है। नर्सरी मिलने से सरकारी कोच ट्रेनिंग देगा व खिलाड़ियों को सभी उपकरण उपलब्ध कराए जाएंगे।
- प्रवीन कादयान, कोच गांव सिवाह
यदि हमारे गांव के खिलाड़ियों को आधुनिक खेल ग्राउंड मिल जाए तो उनकी प्रतिभा और निखरेगी। गांव के निर्माणाधीन नए स्टेडियम में भी फुटबॉल ग्राउंड नहीं बनाया गया। लेकिन फिर भी हम 5 एकड़ जमीन और फुटबॉल ग्राउंड के लिए देने को तैयार हैं।
-खुशदिल कादयान, निवर्तमान सरपंच, गांव सिवाह

पानीपत। फुटबॉल की टीम साथ में मौजूद अन्य।- फोटो : Panipat