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Panipat News: हनुमान स्वरूपों ने शहर में घूमकर दिया आशीर्वाद

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Mon, 14 Oct 2024 06:01 AM IST
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Hanuman forms roamed around the city and gave blessings
पानीपत। पानीपत। हनुमान स्वरूप ने दशहरा व इसके अगले दिन श्रीराम राजतिलक के दिन शहर में घूमकर लोगों को अपना आशीर्वाद दिया। शहर की विभिन्न सड़कों पर करीब 1500 हनुमान स्वरूप रहे। डीजे और ढोल की थाप पर नाचते कूदते घरों में पहुंचे। यहां उनका पूजन किया और उन्होंने परिवार को आशीर्वाद दिया। सुबह से लेकर देर रात तक शहरभर में हनुमान स्वरूप की धूम मची रही। लोगों ने भी आदर के साथ उनका स्वागत किया और विधिपूर्वक पूजन कर आशीर्वाद लिया।
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हनुमान स्वरूप और उनके भक्त दशहरा से 40 दिन पहले व्रत पर बैठते हैं। कुछ 21 व 11 दिन का व्रत रखते हैं। भक्तों ने अष्टमी के दिन हनुमान स्वरूप धारण किया था। वे अष्टमी व नवमी के दिन शहर में घूमकर आशीर्वाद देते रहे। दशहरा पर रावण के पुतलों के दहन पर पहुंचे। हनुमान स्वरूप ने रविवार को भरत मिलाप पर नगर परिक्रमा की। सुबह से लेकर देर रात तक नगर परिक्रमा चली। इस दौरान हनुमान स्वरूप ढोल व डीजे के साथ भक्तों के घर पहुंचे। भक्तों ने अपनी पिछली मन्नत पूरी होने पर उन्हें घर पर आमंत्रित कर उनकी पूज पाठ की। भक्त सुभाष गुलाटी व हेमंत कुमार ने बताया कि भरत मिलाप व श्रीराम के राजतिलक के बाद व्रत का पारण करते हैं। सभी हनुमान स्वरूपों ने रविवार को व्रत का पारण किया। वे हरिद्वार पहुंचकर गंगा किनारे हवन के साथ इसकाे पूर्ण करेंगे।
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व्रत के दौरान घर और परिवार से रहते हैं दूर
सुभाष गुलाटी ने बताया कि हनुमान स्वरूप बनने का नियम सख्त है। इसकी पालना कड़ाई से करनी होती है। लापरवाही होने पर इसका खामियाजा तक भुगतना पड़ता है। हनुमान स्वरूप दशहरा से ठीक 40 दिन पहले व्रत पर बैठते हैं। इनमें कुछ 21 व 11 दिन का भी व्रत रखते हैं। इस दौरान ब्रह्मचर्य का सख्ती से पालन, जमीन या लकड़ी के तख्त पर सोना, 24 घंटे में एक बार अन्न ग्रहण करते हैं। इस दौरान नंगे पैर रहते हैं। हनुमान स्वरूप लाल लंगोट बांधते हैं। हनुमान भक्त इन दिनों मंदिर या अन्य निश्चित स्थान पर रहते हैं।
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पाकिस्तान के लैय्या से आई परंपरा
पानीपत में पाकिस्तान के लैय्या शहर से हनुमान स्वरूप की परंपरा आई है। यह कई वर्षों से लगातार चली आ रही है। भक्त मूलचंद ने 14 वर्ष की आयु में हनुमान स्वरूप धारण किया था। वे अंतिम सांस तक इसको निभाते रहे। इनके बाद उनके बेटे जीवन प्रकाश ने परिवार की परंपरा को आगे ले जाने की जिम्मेदारी अपने कंधों पर ले ली। अब शहर में करीब 1500 हनुमान स्वरूप हैं।
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