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Panipat News: अधूरी तैयारियों में पूरे दावों के साथ सरसों की सरकारी खरीद आज से, कई किसानों ने एक दिन पहले ही प्राइवेट को बेची
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पानीपत। रबी सीजन में सरसों की खरीद शनिवार को शुरू की जाएगी। जिले की पानीपत, समालखा, इसराना, मतलौडा, बापौली समेत आठ मंडी तय की है। मार्केट कमेटी और हैफेड ने पहले दिन ही सरसों की खरीद का पूरा दावा किया है। मंडी में सुविधा पूरी तरह नहीं जुटाई जा सकी हैं। ऐसे में कई किसान एक दिन पहले ही एमएसपी से भी कम रेट में सरसों प्राइवेट खरीदारों को बेचकर चले गए।
जिले में करीब 10 हजार एकड़ में सरसों की फसल है। अगेती फसल करीब 15 दिन पहले काट ली। बाकी मौसम के चलते कटाई बाकी है। किसान सरसों निकालकर साथ के साथ मंडी में लेकर पहुंच रहे हैं। पहले सरकारी खरीद शुरू होने का इंतजार था। सरकार के तय तिथि 28 मार्च को ही खरीद करने के फैसले पर किसान आराम से बैठ गए। पिछले सप्ताह से मौसम में बदलाव के चलते किसानों ने मंडी में शेड के नीचे सरसों डाल दी। शुक्रवार को भी मंडी में खरीद की कोई तैयारी नजर नहीं आई। ऐसे में कई किसान शुक्रवार को प्राइवेट खरीदारों को एमएसपी से कम रेट में बेचकर चले गए। सिवाह गांव के किसान रतन सिंह ने बताया कि वह चार दिन पहले सरसों लेकर आया था। मंडी में कोई खरीदार नहीं आया। मंडी के धरातल को देखकर अगले कई दिन सरसों की खरीद शुरू होना नजर नहीं आ रहा है। उन्होंने 51 क्विंटल सरसों प्राइवेट खरीदार को 6170 रुपये प्रति क्विंटल बेच दी। सरकारी भाव 6200 रुपये है। उनको नुकसान में सरसों बेचनी पड़ी।
प्रशासन के नियम तय
मंडियों में सरसों व गेहूं खरीद के लिए नियम तय किए गए हैं। मंडी में रात आठ बजे के बाद नो एंट्री रहेगी। किसान गेटपास और हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट के बाद ही प्रवेश कर पाएंगे। सरसों का इलेक्टि्रक कांटों तौल किया जाएगा
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किसान सभा ने प्रशासन के सामने रखी आठ मांग
अखिल भारतीय किसान सभा उपायुक्त के मार्फत मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन दिया है। उन्होंने किसानों के समर्थन में आठ मांग रखी हैं। जिला प्रधान डॉक्टर सुरेंद्र मलिक व सचिव राजपाल गाहल्याण ने कहा कि मंडियों में ट्रैक्टर की नंबर प्लेट स्केन करना, फोटो करना, मंडी गेट पर किसानों के फिंगरप्रिंट लेना, गेट पास के लिए पंजीकृत किसान या किसी पंजीकृत किसान की उपस्थिति को अनिवार्य की है। इन सभी शर्तों को किसान पूरा नहीं कर पाएगा। सीजन में किसान पर पहले ही काम का बोझ होता है। अब उनको नियमों में उलझाया जा रहा है।
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जिले में करीब 10 हजार एकड़ में सरसों की फसल है। अगेती फसल करीब 15 दिन पहले काट ली। बाकी मौसम के चलते कटाई बाकी है। किसान सरसों निकालकर साथ के साथ मंडी में लेकर पहुंच रहे हैं। पहले सरकारी खरीद शुरू होने का इंतजार था। सरकार के तय तिथि 28 मार्च को ही खरीद करने के फैसले पर किसान आराम से बैठ गए। पिछले सप्ताह से मौसम में बदलाव के चलते किसानों ने मंडी में शेड के नीचे सरसों डाल दी। शुक्रवार को भी मंडी में खरीद की कोई तैयारी नजर नहीं आई। ऐसे में कई किसान शुक्रवार को प्राइवेट खरीदारों को एमएसपी से कम रेट में बेचकर चले गए। सिवाह गांव के किसान रतन सिंह ने बताया कि वह चार दिन पहले सरसों लेकर आया था। मंडी में कोई खरीदार नहीं आया। मंडी के धरातल को देखकर अगले कई दिन सरसों की खरीद शुरू होना नजर नहीं आ रहा है। उन्होंने 51 क्विंटल सरसों प्राइवेट खरीदार को 6170 रुपये प्रति क्विंटल बेच दी। सरकारी भाव 6200 रुपये है। उनको नुकसान में सरसों बेचनी पड़ी।
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प्रशासन के नियम तय
मंडियों में सरसों व गेहूं खरीद के लिए नियम तय किए गए हैं। मंडी में रात आठ बजे के बाद नो एंट्री रहेगी। किसान गेटपास और हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट के बाद ही प्रवेश कर पाएंगे। सरसों का इलेक्टि्रक कांटों तौल किया जाएगा
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किसान सभा ने प्रशासन के सामने रखी आठ मांग
अखिल भारतीय किसान सभा उपायुक्त के मार्फत मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन दिया है। उन्होंने किसानों के समर्थन में आठ मांग रखी हैं। जिला प्रधान डॉक्टर सुरेंद्र मलिक व सचिव राजपाल गाहल्याण ने कहा कि मंडियों में ट्रैक्टर की नंबर प्लेट स्केन करना, फोटो करना, मंडी गेट पर किसानों के फिंगरप्रिंट लेना, गेट पास के लिए पंजीकृत किसान या किसी पंजीकृत किसान की उपस्थिति को अनिवार्य की है। इन सभी शर्तों को किसान पूरा नहीं कर पाएगा। सीजन में किसान पर पहले ही काम का बोझ होता है। अब उनको नियमों में उलझाया जा रहा है।