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भगवान को अहंकार, पाखंड, कपट नहीं पसंद : आचार्य लालमणि
Sun, 14 Jun 2026 02:36 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, पानीपत
संवाद न्यूज एजेंसी, पानीपत
Updated Sun, 14 Jun 2026 02:36 AM IST
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माई सिटी रिपोर्टरपानीपत। आचार्य लालमणि पांडेय ने कहा कि भगवान को अहंकार, पाखंड और कपट पसंद नहीं हैं। वे इस तरह का चरित्र रखने वाले व्यक्ति के कर्मकांड से भी खुश नहीं होते हैं। उन्होंने ये बात शनिवार को प्राचीन देवी मदिर में श्रीमद्भागवत कथा के छठे दिन कही।
उन्होंने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण ने गोपियों को अपने लोक का दर्शन कराया। इसके प्रभु ने बंसी बजाकर गोपियों को बुलाया। इस दौरान गोपियों को अहंकार हो गया। इसके बाद प्रभु अंतर्ध्यान हो गए। जब गोपियों ने प्रभु को नहीं देखा तो वे रोने लगी। फिर गोपियों ने जो कहा कि गोपी गीत हो गया। आचार्य लालमणि ने कहा कि प्रभु उनका रुदन सुनकर फिर से प्रकट हुए। उन्होंने सभी गोपियों को धन्य किया। भगवान फिर रथ पर बैठकर मथुरा आकर कंस का उद्धार करते हैं और अपने माता-पिता व नाना को कैद से मुक्त करते हैं।
जगत को माता-पिता की सेवा की महिमा बताते हैं। गुरु को दक्षिणा में उनके पुत्र को लौटाकर वापस मथुरा आ जाते है। कथा व्यास ने कहा कि मथुरा में भगवान का जन्म नक्षत्र मनाना जाता है। भगवान श्रीकृष्ण प्रभु को वृंदावन धाम की याद आती है। उन्होंने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति को प्रभु का नाम स्मरण करना चाहिए। इससे उनका मन शांत होता है और वे सत् कार्यों में लग जाते हैं।
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उन्होंने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण ने गोपियों को अपने लोक का दर्शन कराया। इसके प्रभु ने बंसी बजाकर गोपियों को बुलाया। इस दौरान गोपियों को अहंकार हो गया। इसके बाद प्रभु अंतर्ध्यान हो गए। जब गोपियों ने प्रभु को नहीं देखा तो वे रोने लगी। फिर गोपियों ने जो कहा कि गोपी गीत हो गया। आचार्य लालमणि ने कहा कि प्रभु उनका रुदन सुनकर फिर से प्रकट हुए। उन्होंने सभी गोपियों को धन्य किया। भगवान फिर रथ पर बैठकर मथुरा आकर कंस का उद्धार करते हैं और अपने माता-पिता व नाना को कैद से मुक्त करते हैं।
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जगत को माता-पिता की सेवा की महिमा बताते हैं। गुरु को दक्षिणा में उनके पुत्र को लौटाकर वापस मथुरा आ जाते है। कथा व्यास ने कहा कि मथुरा में भगवान का जन्म नक्षत्र मनाना जाता है। भगवान श्रीकृष्ण प्रभु को वृंदावन धाम की याद आती है। उन्होंने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति को प्रभु का नाम स्मरण करना चाहिए। इससे उनका मन शांत होता है और वे सत् कार्यों में लग जाते हैं।
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