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Panipat News: गोशाला समिति का पशु लेने से इन्कार, बढ़ाया बजट
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पानीपत। नैन गोशाला में दो हजार से ज्यादा पशु भेजने के बाद भी जब निगम ने चारे का बजट नहीं बढ़ाया तो गोशाला ने निगम के गोवंशों को लेने से मना कर दिया। मामला नवनियुक्त आयुक्त डॉ. पंकज राव के संज्ञान में पहुंचा।
उन्होंने पहली ही कलम से गोवंशों के चारे का बजट 50 प्रतिशत बढ़ा दिया है। अब गोशाला को पांच लाख के बजाय साढ़े सात लाख रुपये मिला करेंगे। वहीं, आयुक्त ने आश्वासन दिया है कि आगे भी गोवंशों के चारे का प्रबंधन करने का पूरा प्रयास रहेगा।
बता दें कि नैन गोशाला में नगर निगम अब तक दो हजार से ज्यादा गोवंश भेज चुका है लेकिन इनके चारे का खर्च बिल्कुल कम दे रहा था। गोशाला में प्रतिदिन के हिसाब से प्रति पशु पर करीब 125 रुपये का खर्च चाहिए होता है। इसमें चारा, खल, लेबर, दलिया आदि की लागत होती है जबकि नगर निगम अब तक गोशाला को करीब आठ रुपये प्रति पशु ही दे रहा है।
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जबकि गोसेवा आयोग की ओर प्रति पशु 140 रुपये देने का नियम बनाया गया है। कई माह से गोवंशों के चारे के बजट बढ़ाने की मांग पर भी जब निगम ने बजट नहीं बढ़ाया और महज आश्वासन पर एक माह के भीतर अतिरिक्त 250 गोवंश और पहुंचा दिए। इस गोशाला प्रबंधन समिति ने गोवंशों को लेने से इंकार कर दिया। समिति सदस्यों ने अपनी व्यथा सुनाई कि निगम यहां गोवंश तो छोड़ रहा है लेकिन चारे के पैसे नहीं दे रहा। इस पर नवनियुक्त आयुक्त ने ढाई लाख रुपये प्रतिमाह की दर से अतिरिक्त चारे का बजट देने का फैसला किया है।
अब गोशाला में निगम के भेजे गए गोवंशों को करीब 10 रुपये प्रतिदिन के हिसाब से चारा मिलेगा। समिति ने शहरवासियों के अलावा जिला प्रशासनिक अधिकारियों से भी गोशाला में चारा देने की अपील की है। गौरतलब है कि शहर में बढ़ते गोवंशों की तादाद को देखते हुए नगर निगम ने 14 नवंबर से नैन गोशाला में पशुओं को भेजने का अभियान दोबारा शुरु करवाया था। इन 20 दिन में निगम ने गोशाला में करीब 250 गोवंश भिजवा दिए थे।
700 ट्राली चारा मांगा, मार्च तक ही पर्याप्त: गोशाला प्रबंधन समिति के प्रधान राजरूप पान्नू ने कहा कि उनकी गोशाला में करीब 2500 गोवंश हैं। वे अब तक आसपास के गांवों से करीब 700 ट्राली चारा मांग चुके हैं। अब उनके पास केवल मार्च तक का ही चारा पर्याप्त है।
दूसरे जिलों में निगम गोशालाओं को 67 रुपये प्रतिदिन के हिसाब से भी चारे के पैसे देता है लेकिन नगर निगम पानीपत केवल आठ रुपये तक सिमटा हुआ है।
वे निगम के अलावा आसपास के गांवों के पशुओं को भी लेते हैं। इसी वजह से ग्रामीण गोशाला में चारे का दान भी करते हैं। उन्होंने ढाई लाख रुपये बढाने पर नवनियुक्त आयुक्त का आभार भी जताया है।
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उन्होंने पहली ही कलम से गोवंशों के चारे का बजट 50 प्रतिशत बढ़ा दिया है। अब गोशाला को पांच लाख के बजाय साढ़े सात लाख रुपये मिला करेंगे। वहीं, आयुक्त ने आश्वासन दिया है कि आगे भी गोवंशों के चारे का प्रबंधन करने का पूरा प्रयास रहेगा।
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बता दें कि नैन गोशाला में नगर निगम अब तक दो हजार से ज्यादा गोवंश भेज चुका है लेकिन इनके चारे का खर्च बिल्कुल कम दे रहा था। गोशाला में प्रतिदिन के हिसाब से प्रति पशु पर करीब 125 रुपये का खर्च चाहिए होता है। इसमें चारा, खल, लेबर, दलिया आदि की लागत होती है जबकि नगर निगम अब तक गोशाला को करीब आठ रुपये प्रति पशु ही दे रहा है।
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जबकि गोसेवा आयोग की ओर प्रति पशु 140 रुपये देने का नियम बनाया गया है। कई माह से गोवंशों के चारे के बजट बढ़ाने की मांग पर भी जब निगम ने बजट नहीं बढ़ाया और महज आश्वासन पर एक माह के भीतर अतिरिक्त 250 गोवंश और पहुंचा दिए। इस गोशाला प्रबंधन समिति ने गोवंशों को लेने से इंकार कर दिया। समिति सदस्यों ने अपनी व्यथा सुनाई कि निगम यहां गोवंश तो छोड़ रहा है लेकिन चारे के पैसे नहीं दे रहा। इस पर नवनियुक्त आयुक्त ने ढाई लाख रुपये प्रतिमाह की दर से अतिरिक्त चारे का बजट देने का फैसला किया है।
अब गोशाला में निगम के भेजे गए गोवंशों को करीब 10 रुपये प्रतिदिन के हिसाब से चारा मिलेगा। समिति ने शहरवासियों के अलावा जिला प्रशासनिक अधिकारियों से भी गोशाला में चारा देने की अपील की है। गौरतलब है कि शहर में बढ़ते गोवंशों की तादाद को देखते हुए नगर निगम ने 14 नवंबर से नैन गोशाला में पशुओं को भेजने का अभियान दोबारा शुरु करवाया था। इन 20 दिन में निगम ने गोशाला में करीब 250 गोवंश भिजवा दिए थे।
700 ट्राली चारा मांगा, मार्च तक ही पर्याप्त: गोशाला प्रबंधन समिति के प्रधान राजरूप पान्नू ने कहा कि उनकी गोशाला में करीब 2500 गोवंश हैं। वे अब तक आसपास के गांवों से करीब 700 ट्राली चारा मांग चुके हैं। अब उनके पास केवल मार्च तक का ही चारा पर्याप्त है।
दूसरे जिलों में निगम गोशालाओं को 67 रुपये प्रतिदिन के हिसाब से भी चारे के पैसे देता है लेकिन नगर निगम पानीपत केवल आठ रुपये तक सिमटा हुआ है।
वे निगम के अलावा आसपास के गांवों के पशुओं को भी लेते हैं। इसी वजह से ग्रामीण गोशाला में चारे का दान भी करते हैं। उन्होंने ढाई लाख रुपये बढाने पर नवनियुक्त आयुक्त का आभार भी जताया है।