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प्रति क्विंटल चार रुपये आढ़त कम करने से रोष
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आढ़त कम करने पर लघु सचिवालय के बाहर विरोध करते हुए आढ़ती।
- फोटो : Panipat
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पानीपत। जिले के आढ़तियों ने प्रति क्विंटल चार रुपये आढ़त कम करने और जीरी की बकाया मजदूरी नहीं दिए जाने के विरोध में शुक्रवार को लघु सचिवालय पर प्रदर्शन किया। इस दौरान उन्होंने मांगों के लिए रोष जताया और एसडीएम को मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन भी सौंपा।
इस दौरान आढ़तियों ने कहा कि सरकार ने आढ़त बढ़ाने की बजाय 50 रुपये से घटाकर प्रति क्विंटल 46 रुपये कर दी है। वहीं सरकार किसानों के पैसे सीधे उनके खाते में भेज रही है। इस राशि में से पहले ही अगली फसल के पेस्टीसाइड के पैसे काटे जा रहे हैं।
आढ़तियों की मुख्य मांगें :
1. किसानों की सरसों, कपास इत्यादि की सभी फसलें आढ़तियों के माध्यम से ही खरीदी जाए और आढ़त पूरी 2.5 प्रतिशत मिलनी चाहिए। सभी फसलों का भुगतान किसान की इच्छा के अनुसार आढ़ती या किसान के खाते में अदा किया जाना चाहिए।
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2. सीमांत किसानों को ई खरीद पोर्टल पर पंजीकृत करने के बाद भी सरकार ने उनकी फसलें नहीं खरीदी है जबकि यह सभी सीमांत किसान कई वर्षों से हरियाणा की मंडियों से ही जुड़े हुए हैं। इनमें से बहुत से किसान हरियाणा के ही रहने वाले है।
3. 2020 में आपने धान पर मार्केट और एचआरडीएफ फीस चार प्रतिशत से घटाकर एक प्रतिशत कर दी थी। अभी फिर से विभाग ने ये फीस एक प्रतिशत से बढ़ाकर चार प्रतिशत कर दी है।
4. गेहूं सीजन में गेहूं की ढुलाई का कार्य सुचारु रूप से चलाने के लिए इसका ठेका संबंधित आढ़ती एसोसिएशन को प्राथमिकता के आधार पर बिना किसी शर्त के दिया जाना चाहिए।
5. आढ़त की फर्म का एक लाइसेंस पूरे हरियाणा की सभी मंडियों में मान्य होना चाहिए क्योंकि आजकल सभी लाइसेंस ऑनलाइन पोर्टल पर है।
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इस दौरान आढ़तियों ने कहा कि सरकार ने आढ़त बढ़ाने की बजाय 50 रुपये से घटाकर प्रति क्विंटल 46 रुपये कर दी है। वहीं सरकार किसानों के पैसे सीधे उनके खाते में भेज रही है। इस राशि में से पहले ही अगली फसल के पेस्टीसाइड के पैसे काटे जा रहे हैं।
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आढ़तियों की मुख्य मांगें :
1. किसानों की सरसों, कपास इत्यादि की सभी फसलें आढ़तियों के माध्यम से ही खरीदी जाए और आढ़त पूरी 2.5 प्रतिशत मिलनी चाहिए। सभी फसलों का भुगतान किसान की इच्छा के अनुसार आढ़ती या किसान के खाते में अदा किया जाना चाहिए।
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2. सीमांत किसानों को ई खरीद पोर्टल पर पंजीकृत करने के बाद भी सरकार ने उनकी फसलें नहीं खरीदी है जबकि यह सभी सीमांत किसान कई वर्षों से हरियाणा की मंडियों से ही जुड़े हुए हैं। इनमें से बहुत से किसान हरियाणा के ही रहने वाले है।
3. 2020 में आपने धान पर मार्केट और एचआरडीएफ फीस चार प्रतिशत से घटाकर एक प्रतिशत कर दी थी। अभी फिर से विभाग ने ये फीस एक प्रतिशत से बढ़ाकर चार प्रतिशत कर दी है।
4. गेहूं सीजन में गेहूं की ढुलाई का कार्य सुचारु रूप से चलाने के लिए इसका ठेका संबंधित आढ़ती एसोसिएशन को प्राथमिकता के आधार पर बिना किसी शर्त के दिया जाना चाहिए।
5. आढ़त की फर्म का एक लाइसेंस पूरे हरियाणा की सभी मंडियों में मान्य होना चाहिए क्योंकि आजकल सभी लाइसेंस ऑनलाइन पोर्टल पर है।