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113 करोड़ के मीटर खरीद घोटाले के दोषी आरके जैन अब फिर फंसे पौने चार करोड़ के घपले में, सीएमडी पर बचाव का आरोप
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दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम के लिए खरीदे गए 22 हजार ट्रांसफार्मर की खरीद फरोख्त के घपले में चीफ इंजीनियर आरके जैन पर विजिलेंस की तलवार फिर से लटक गई है। विजिलेंस ने जैन समेत पांच अन्य निगम अधिकारियों और कर्मचारियों को एक निजी कंपनी को करीब पौने चार करोड़ रुपये की अतिरिक्त पेमेंट करने और संबंधित दस्तावेजों के साथ छेड़छाड़ करने में दोषी पाया है। जिसकी पूरी जांच रिपोर्ट तैयार कर सीएमडी को करीब एक माह पहले सौंपी जा चुकी है, लेकिन इस मामले में अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हो पाई है। वहीं विजिलेंस जांच में दोषी पाए गए जैन को प्रमोट कर डायरेक्टर बनाने की तैयारी भी की जा रही है। शिकायकर्ता का कहना है कि इस घपले के बाद भी इन पर कार्रवाई न हो पाना साफ तौर पर सीएमडी पर सवालिया निशान बना रहा है।
गौरतलब है कि इससे पहले भी आरके जैन 113 करोड़ मीटर घोटाला में विजिलेंस जांच में दोषी पाए जा चुके हैं। जिसके बाद भी उन पर कोई कार्रवाई नहीं की गई थी, एक अन्य कमेटी बनाकर उन्हें निर्दोष साबित कर दिया गया था। जिस पर एचपीईए ने सीएमडी व जांच अधिकारी पर आरोप भी लगाए थे कि वे डेढ़ साल में तैयार की गई विजिलेंस रिपोर्ट को नकार कर डेढ़ माह में एक कमेटी की रिपोर्ट पर दोषियों को निर्दोष साबित करने पर लगे हैं। यूनियन अधिकारियों ने बताया कि या तो विजिलेंस जांच ही गलत है या फिर इस जांच पर कार्रवाई न करने वाले गलत हैं। जो भी गलत हो उसके खिलाफ उन्होंने कार्रवाई की मांग भी की है।
डब्ल्यूटीडी में उठा मुद्दा, रोका जा सकता था घपला पर नहीं दी ऑडिट रिपोर्ट
विजिलेंस रिपोर्ट के अनुसार इस घपले में सबसे रोचक बात सामने ये आई है कि इस घपले को अंजाम देने से पहले ही रोका जा सकता था। इसके लिए डब्ल्यूटीडी की बैठक में इस प्रकार से अतिरिक्त पेमेंट करने की बात भी रखी गई, जिस पर डब्ल्यूटीडी ने पिछले दो साल का ऑडिट रिकार्ड भी मांगा, लेकिन आरके जैन द्वारा रिकार्ड उपलब्ध नहीं करवाया गया। जिस पर विजिलेंस ने माना कि अगर समय रहते रिकार्ड उपलब्ध करवा दिया जाता तो पहली टर्म की दो करोड़ दो लाख रुपये की अतिरिक्त पेमेंट का रोका जा सकता था, लेकिन इस पेमेंट के बाद कंपनी को पौने दो करोड़ रुपये के अतिरिक्त पेमेंट तक कर दी गई। जिससे निगम को कुल 3 करोड़ 71 लाख रुपये का नुकसान हुआ है। अगर ऑडिट रिपोर्ट पेश कर दी जाती तो पहले गई पेमेंट की रिकवरी भी हो सकती थी, लेकिन इसे पकड़ा नहीं जा सका।
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ऐसे सामने आया करोड़ों का घपला-
हिसार बिजली निगम केे एसई एवं हरियाणा पॉवर इंजिनियर्स एसोसिएशन के तत्कालीन प्रधान केडी बंसल ने सीएमडी को मई 2018 में शिकायत दी, जिसमें निगम के कई अधिकारी व कर्मचारियों पर एक निजी कंपनी को ट्रांसफार्मर की खरीद फरोत के टेंडर में नियम तोड़ अधिक पेमेंट करने के आरोप लगाए गए थे। शिकायत के आधार पर इसकी विजिलेंस जांच करवाने की मांग भी की गई थी। इसके एक महीने बाद जून 2018 को सीएमडी ने इसकी जांच के आदेश दिए गए। विजिलेंस ने अपनी जांच में पाया कि आरके जैन ने अपने एसई कार्यकाल के दौरान एक निजी कंपनी महाशकिव्त को दिए 25 केवीए, 63 केवीए और 100 केवीए के 22 हजार ट्रांसफार्मर खरीदने के टेंडर में पौने चार करोड़ रुपये के अतिरिक्त पेमेंट करवा दी है।
ये पेमेंट एम्मा के तहत उस खरीद फरोख्त एग्रीमेंट व डिलिवरी के बीच की सबसे न्यूनतम की जानी थी, जबकि जैन ने उसे उस समयावधि की सबसे अधिकतम करवा दिया था। यह अतिरिक्त पेमेंट करीब पौने चार करोड़ रुपये ज्यादा थी। जांच में आरके जैन, एससी अग्रवाल, अनिल भूलन, प्रदीप लोहान, चित्रा गौरी व बलजीत शर्मा को दोषी पाया गया। वहीं विजिलेंस ने अपनी जांच रिपोर्ट में संबंधित अधिकारी व कर्मचारियों पर सख्त से सख्त कार्रवाई करने व दंड देने की सिफारिश भी की है।
ये है एम्मा का नियम-
एम्मा मेकैनिकल व इलेक्ट्रिकल इंजीनियर्स की एक एसोसिएशन को कहते हैं, जो किसी भी मेकैनिक्ल व इलेक्ट्रिकल सामान के रेट को हर महीने सर्कुलेट करती है। इसके नियम के तहत अगर कोई कंपनी समय पर अपने सामान की डिलिवरी देती है, तो उसे डिलिवरी के समय के एक माह पहले का रेट दिया जाता है। समय पर डिलिवरी न हो पाने की सूरत में कंपनी को एग्रीमेंट व डिलिवरी के समय के बीच का सबसे न्यूनतम रेट दिया जाता है। इस घपले में कंपनी को डिलिवरी समय पर न देने के बावजूद रेट अधिकतम दिया गया, जबकि इसे सबसे कम दिया जाना बनता था।
वर्जन-
मामला अभी जांच के अधीन है-
अभी मैटर अंडर इंवेस्टिगेशन है। अभी डिपार्टमेंट को अपने नियमानुसार इसकी जांच करनी है। इससे पहले भी 113 करोड़ के मीटर खरीद मामले में मेरा नाम इसलिए आया था क्योंकि मेरे खिलाफ शिकायतों का एक अभियान चलाया हुआ है। इससे पहले भी मैने अपनी 50-60 पेज की रिपोर्ट एसीएस व अन्य उच्च अधिकारियों को दी थी। अब पुराने मामलों को उस समय की परिस्थितियों के अनुसार न समझ कर तोड़मोड़ कर पेश किया जा रहा है, जो उचित नहीं है।
- आरके जैन, चीफ इंजीनियर, प्लानिंग डिजाइन व कंस्ट्रक्शन, बिजली निगम।
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गौरतलब है कि इससे पहले भी आरके जैन 113 करोड़ मीटर घोटाला में विजिलेंस जांच में दोषी पाए जा चुके हैं। जिसके बाद भी उन पर कोई कार्रवाई नहीं की गई थी, एक अन्य कमेटी बनाकर उन्हें निर्दोष साबित कर दिया गया था। जिस पर एचपीईए ने सीएमडी व जांच अधिकारी पर आरोप भी लगाए थे कि वे डेढ़ साल में तैयार की गई विजिलेंस रिपोर्ट को नकार कर डेढ़ माह में एक कमेटी की रिपोर्ट पर दोषियों को निर्दोष साबित करने पर लगे हैं। यूनियन अधिकारियों ने बताया कि या तो विजिलेंस जांच ही गलत है या फिर इस जांच पर कार्रवाई न करने वाले गलत हैं। जो भी गलत हो उसके खिलाफ उन्होंने कार्रवाई की मांग भी की है।
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डब्ल्यूटीडी में उठा मुद्दा, रोका जा सकता था घपला पर नहीं दी ऑडिट रिपोर्ट
विजिलेंस रिपोर्ट के अनुसार इस घपले में सबसे रोचक बात सामने ये आई है कि इस घपले को अंजाम देने से पहले ही रोका जा सकता था। इसके लिए डब्ल्यूटीडी की बैठक में इस प्रकार से अतिरिक्त पेमेंट करने की बात भी रखी गई, जिस पर डब्ल्यूटीडी ने पिछले दो साल का ऑडिट रिकार्ड भी मांगा, लेकिन आरके जैन द्वारा रिकार्ड उपलब्ध नहीं करवाया गया। जिस पर विजिलेंस ने माना कि अगर समय रहते रिकार्ड उपलब्ध करवा दिया जाता तो पहली टर्म की दो करोड़ दो लाख रुपये की अतिरिक्त पेमेंट का रोका जा सकता था, लेकिन इस पेमेंट के बाद कंपनी को पौने दो करोड़ रुपये के अतिरिक्त पेमेंट तक कर दी गई। जिससे निगम को कुल 3 करोड़ 71 लाख रुपये का नुकसान हुआ है। अगर ऑडिट रिपोर्ट पेश कर दी जाती तो पहले गई पेमेंट की रिकवरी भी हो सकती थी, लेकिन इसे पकड़ा नहीं जा सका।
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ऐसे सामने आया करोड़ों का घपला-
हिसार बिजली निगम केे एसई एवं हरियाणा पॉवर इंजिनियर्स एसोसिएशन के तत्कालीन प्रधान केडी बंसल ने सीएमडी को मई 2018 में शिकायत दी, जिसमें निगम के कई अधिकारी व कर्मचारियों पर एक निजी कंपनी को ट्रांसफार्मर की खरीद फरोत के टेंडर में नियम तोड़ अधिक पेमेंट करने के आरोप लगाए गए थे। शिकायत के आधार पर इसकी विजिलेंस जांच करवाने की मांग भी की गई थी। इसके एक महीने बाद जून 2018 को सीएमडी ने इसकी जांच के आदेश दिए गए। विजिलेंस ने अपनी जांच में पाया कि आरके जैन ने अपने एसई कार्यकाल के दौरान एक निजी कंपनी महाशकिव्त को दिए 25 केवीए, 63 केवीए और 100 केवीए के 22 हजार ट्रांसफार्मर खरीदने के टेंडर में पौने चार करोड़ रुपये के अतिरिक्त पेमेंट करवा दी है।
ये पेमेंट एम्मा के तहत उस खरीद फरोख्त एग्रीमेंट व डिलिवरी के बीच की सबसे न्यूनतम की जानी थी, जबकि जैन ने उसे उस समयावधि की सबसे अधिकतम करवा दिया था। यह अतिरिक्त पेमेंट करीब पौने चार करोड़ रुपये ज्यादा थी। जांच में आरके जैन, एससी अग्रवाल, अनिल भूलन, प्रदीप लोहान, चित्रा गौरी व बलजीत शर्मा को दोषी पाया गया। वहीं विजिलेंस ने अपनी जांच रिपोर्ट में संबंधित अधिकारी व कर्मचारियों पर सख्त से सख्त कार्रवाई करने व दंड देने की सिफारिश भी की है।
ये है एम्मा का नियम-
एम्मा मेकैनिकल व इलेक्ट्रिकल इंजीनियर्स की एक एसोसिएशन को कहते हैं, जो किसी भी मेकैनिक्ल व इलेक्ट्रिकल सामान के रेट को हर महीने सर्कुलेट करती है। इसके नियम के तहत अगर कोई कंपनी समय पर अपने सामान की डिलिवरी देती है, तो उसे डिलिवरी के समय के एक माह पहले का रेट दिया जाता है। समय पर डिलिवरी न हो पाने की सूरत में कंपनी को एग्रीमेंट व डिलिवरी के समय के बीच का सबसे न्यूनतम रेट दिया जाता है। इस घपले में कंपनी को डिलिवरी समय पर न देने के बावजूद रेट अधिकतम दिया गया, जबकि इसे सबसे कम दिया जाना बनता था।
वर्जन-
मामला अभी जांच के अधीन है-
अभी मैटर अंडर इंवेस्टिगेशन है। अभी डिपार्टमेंट को अपने नियमानुसार इसकी जांच करनी है। इससे पहले भी 113 करोड़ के मीटर खरीद मामले में मेरा नाम इसलिए आया था क्योंकि मेरे खिलाफ शिकायतों का एक अभियान चलाया हुआ है। इससे पहले भी मैने अपनी 50-60 पेज की रिपोर्ट एसीएस व अन्य उच्च अधिकारियों को दी थी। अब पुराने मामलों को उस समय की परिस्थितियों के अनुसार न समझ कर तोड़मोड़ कर पेश किया जा रहा है, जो उचित नहीं है।
- आरके जैन, चीफ इंजीनियर, प्लानिंग डिजाइन व कंस्ट्रक्शन, बिजली निगम।