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सफाई जांचने निकलीं चार टीमें, दांव पर स्वच्छता रैंकिंग
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पानीपत। वार्ड-22 स्थित बत्तरा कालोनी में बने शोचालय के ऊपर टेंकी के साथ उगी हुई घास।
- फोटो : Panipat
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पानीपत। स्वच्छ सर्वेक्षण-2022 के अंतर्गत शहर की साफ-सफाई की जांच पड़ताल करने शहरी एवं आवास मंत्रालय की चार टीमें शहर में पहुंच चुकी है। हर टीम में सिर्फ एक ही सदस्य है। चारों सदस्यों ने शहर को चार जोन में बांटा, अलग अलग टीम बनाई और शहर की सफाई की पड़ताल पर जुट गई। टीम के पास ऑनलाइन स्पॉट लोकेशन भेजी जा रही थी, इसी स्पॉट का टीम ने निरीक्षण करते हुए स्वच्छता पोर्टल पर अपडेट दिया। इसी दौरान स्वच्छ सर्वेक्षण टीम ने शहर के दस वार्डों की अलग-अलग 40 से ज्यादा लोकेशन का दौरा किया। चारों टीमों का ये निरीक्षण सुबह दस बजे से शुरू होकर शाम आठ बजे समाप्त हुआ। ये टीमें मंगलवार को भी शहर के अलग-अलग स्थानों पर दौरा कर स्वच्छता की रिपोर्ट देगी।
खास बात देखने में ये रही कि निगम के जो सार्वजनिक शौचालयों सालों से गंदगी से अटे पड़े थे, टीम की सूचना मिलते ही उनको तुरंत प्रभाव से साफ करवा दिया गया। यहां तक की इन शौचालयों के बाहर महिला पुरुष के अलग-अलग बैनर तक नहीं थे, जिनको टीम के आने से पहले चस्पा किया गया। वहीं, स्वच्छता सर्वेक्षण संबंधित पोस्टर और बैनर का भी यही हाल रहा। हालांकि टीम ने इन शौचालयों की कड़ी निगरानी कर लोगों से बातचीत करते हुए हुए रिपोर्ट अपलोड की है। बतरा कॉलोनी में गंदगी और यहां के शौचालय के हालात सबसे ज्यादा खस्ता मिले। शौचालय की छत पर टंकी टूटी मिली, जिसके चारों तरफ झाड़ उगी मिली। वहीं, टीम ने शहर के लोगों से सवाल-जवाब किए। बताते हैं कि स्थानीय लोगों ने निगम के गंदे शौचालयों के खिलाफ शिकायतें की। ये शौचालय निगम के मापदंडों के अनुसार खरे नहीं उतर सके।
यहां यहां किया दौरा
स्वच्छ सर्वेक्षण की एक टीम ने वार्ड नंबर 22 की बतरा कॉलोनी और इससे जुड़े एरिया, वार्ड नंबर 23, 24, 25 और 26 का दौरा किया। इस दौरान गंदगी के ढेर मिले। लोगों ने बताया कि निगम अधिकारी यहां साफ सफाई करवाते ही नहीं है। न ही लोगों की गंदगी की शिकायतों पर अमल किया जाता है। वहीं, दूसरी टीम जाटल रोड स्थित एसटीपी प्लांट का दौरा करने पहुंची। तीसरी और चौथी टीम ने रेलवे स्टेशन का एरिया, सेक्टर 6, 18 आदि का निरीक्षण किया। हालांकि चारों टीमों ने अलग अलग वार्डों में बने सार्वजनिक शौचालायों का सबसे पहले निरीक्षण किया।
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इन पहलुओं की जांच की
टीम ने डोर टू डोर कूड़ा कलेक्शन, कूड़ा व गंदगी मुक्त शहर, नयालों की सफाई, सार्वजनिक शौचालयों की सफाई की जांच, स्वच्छ एप पर लोगों की शिकायतों के समाधान समेत कूड़े के ढेरों, निस्तारण और सिटीजन फीडबैक पर काम किया। सबसे पहले ऑनलाइन सार्वजनिक शौचालयों की लोकेशन ट्रेस कर वहां की सफाई व्यवस्था जांची और शौचालयों का इस्तेमाल करने वाले लोगों से बातचीत भी की। इस दौरान टीम ने शहरवासियों से शहर की रैंकिंग और सर्वेक्षण के बारे में भी कई सवाल किए और जाना कि वे इसे लेकर जागरूक हैं भी या नहीं। इसके साथ निगम के दावों से भरे दस्तावेजों की भी जांच पड़ताल की गई।
लोगों से ये सवाल पूछ रही टीम
सर्वेक्षण टीम ने लोगों से पूछा कि क्या वे जानते हैं कि उनका शहर स्वच्छ सर्वेक्षण में हिस्सा ले रहा है ? शहर की स्वच्छता रैंकिंग ? उनके आसपड़ोस में सफाई के अधार पर अंक, गीला या सूखा कूड़ा अलग-अलग करने के लिए सवाल, शहर के कमर्शियल या सार्वजनिक स्थानों और शौचालयों की सफाई के लिए 0 से 10 में से कितने अंक देने, ऑनलाइन शौचालयों को ढूंढने के तरीके, स्वच्छ एप का प्रयोग से है संबंधित सवाल पूछे हैं।
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खास बात देखने में ये रही कि निगम के जो सार्वजनिक शौचालयों सालों से गंदगी से अटे पड़े थे, टीम की सूचना मिलते ही उनको तुरंत प्रभाव से साफ करवा दिया गया। यहां तक की इन शौचालयों के बाहर महिला पुरुष के अलग-अलग बैनर तक नहीं थे, जिनको टीम के आने से पहले चस्पा किया गया। वहीं, स्वच्छता सर्वेक्षण संबंधित पोस्टर और बैनर का भी यही हाल रहा। हालांकि टीम ने इन शौचालयों की कड़ी निगरानी कर लोगों से बातचीत करते हुए हुए रिपोर्ट अपलोड की है। बतरा कॉलोनी में गंदगी और यहां के शौचालय के हालात सबसे ज्यादा खस्ता मिले। शौचालय की छत पर टंकी टूटी मिली, जिसके चारों तरफ झाड़ उगी मिली। वहीं, टीम ने शहर के लोगों से सवाल-जवाब किए। बताते हैं कि स्थानीय लोगों ने निगम के गंदे शौचालयों के खिलाफ शिकायतें की। ये शौचालय निगम के मापदंडों के अनुसार खरे नहीं उतर सके।
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यहां यहां किया दौरा
स्वच्छ सर्वेक्षण की एक टीम ने वार्ड नंबर 22 की बतरा कॉलोनी और इससे जुड़े एरिया, वार्ड नंबर 23, 24, 25 और 26 का दौरा किया। इस दौरान गंदगी के ढेर मिले। लोगों ने बताया कि निगम अधिकारी यहां साफ सफाई करवाते ही नहीं है। न ही लोगों की गंदगी की शिकायतों पर अमल किया जाता है। वहीं, दूसरी टीम जाटल रोड स्थित एसटीपी प्लांट का दौरा करने पहुंची। तीसरी और चौथी टीम ने रेलवे स्टेशन का एरिया, सेक्टर 6, 18 आदि का निरीक्षण किया। हालांकि चारों टीमों ने अलग अलग वार्डों में बने सार्वजनिक शौचालायों का सबसे पहले निरीक्षण किया।
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इन पहलुओं की जांच की
टीम ने डोर टू डोर कूड़ा कलेक्शन, कूड़ा व गंदगी मुक्त शहर, नयालों की सफाई, सार्वजनिक शौचालयों की सफाई की जांच, स्वच्छ एप पर लोगों की शिकायतों के समाधान समेत कूड़े के ढेरों, निस्तारण और सिटीजन फीडबैक पर काम किया। सबसे पहले ऑनलाइन सार्वजनिक शौचालयों की लोकेशन ट्रेस कर वहां की सफाई व्यवस्था जांची और शौचालयों का इस्तेमाल करने वाले लोगों से बातचीत भी की। इस दौरान टीम ने शहरवासियों से शहर की रैंकिंग और सर्वेक्षण के बारे में भी कई सवाल किए और जाना कि वे इसे लेकर जागरूक हैं भी या नहीं। इसके साथ निगम के दावों से भरे दस्तावेजों की भी जांच पड़ताल की गई।
लोगों से ये सवाल पूछ रही टीम
सर्वेक्षण टीम ने लोगों से पूछा कि क्या वे जानते हैं कि उनका शहर स्वच्छ सर्वेक्षण में हिस्सा ले रहा है ? शहर की स्वच्छता रैंकिंग ? उनके आसपड़ोस में सफाई के अधार पर अंक, गीला या सूखा कूड़ा अलग-अलग करने के लिए सवाल, शहर के कमर्शियल या सार्वजनिक स्थानों और शौचालयों की सफाई के लिए 0 से 10 में से कितने अंक देने, ऑनलाइन शौचालयों को ढूंढने के तरीके, स्वच्छ एप का प्रयोग से है संबंधित सवाल पूछे हैं।