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अस्पताल के चक्कर काटने के बाद भी नहीं बन पा रहा दिव्यांग बच्चों का सर्टिफिकेट

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sun, 04 Jul 2021 12:06 AM IST
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For Divyang certificate, visits to the hospital, doctors are not available
सिविल अस्पताल में चक्कर काटने के बाद भी जिले के दिव्यांग बच्चों का सर्टिफिकेट नहीं बन पा रहा है। सभी डॉक्टर एक ही दिन नहीं मिल पाने की वजह से दिव्यांग सर्टिफिकेट अटके पड़े हैं। हर बुधवार को सिविल अस्पताल में दिव्यांग सर्टिफिकेट बनाने का काम किया जाता है। सभी रोगों के डॉक्टर नहीं होने से दो से तीन बच्चों के सर्टिफिकेट ही बन पाते हैं। कई रोगों के डॉक्टर नहीं होने से समस्या आ रही है।
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दिव्यांग बच्चों की देखभाल के लिए सरकार की ओर से दिव्यांग पेंशन दी जाती है, लेकिन सर्टिफिकेट न बनने के कारण जिले के हजारों बच्चों की पेंशन रुकी पड़ी हैं। सर्टिफिकेट बनवाने के लिए सबसे ज्यादा गरीब परिवार के परिजन ही अपने बच्चे को अस्पताल में लेकर आते हैं, ताकि उनका सर्टिफिकेट बन जाए और पेंशन शुरू हो जाए।
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केस-1
दो साल से चक्कर काट रहा है परिवार
वधावा राम कॉलोनी के रहने वाला 12 वर्षीय किशोर सुन और बोल नहीं सकता। परिजन 2018 से सर्टिफिकेट बनवाने के लिए अस्पतालों के चक्कर काट रहे हैं। एक बार सर्टिफिकेट बनवाने के लिए रोहतक का नंबर मिला फिर वहां भी सर्टिफिकेट नहीं बन पाया। जिसके बाद फिर दोबारा पानीपत का नंबर मिला, वहां भी नहीं बन सका। उसके बाद से लगातार पानीपत सिविल अस्पताल का चक्कर काट रहे हैं। 2020 के बाद से लॉकडाउन की वजह से सर्टिफिकेट बनने बंद हो गए थे।
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केस-2
तीन साल से चक्कर काट रहे हैं, नहीं बन रहा सर्टिफिकेट
तहसील कैंप में विकास नगर निवासी 13 वर्षीय किशोर के हाथ और पैर दोनों काम नहीं करते। वह कभी चल नहीं सका। परिजनों का आरोप है कि वह बच्चे को लेकर करीब तीन साल से सिविल अस्पताल के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन अभी तक दिव्यांग सर्टिफिकेट नहीं बन पाया है। हाथ और पैर चेक करने वाले डॉक्टर ही नहीं हैं। अस्पताल में चार घंटे गोद में बैठाए रखने के बाद पता चलता है कि हाथ पैर के स्पेशल डॉक्टर आए ही नहीं हैं।
फॉर्म भरने से रजिस्ट्रेशन करवाने तक लगते हैं पांच घंटे, बाद में पता चलता है डॉक्टर नहीं आया
फॉर्म भरने से रजिस्ट्रेशन करवाने तक लगभग पांच घंटे लगते हैं। सुबह 9 बजे से पहले से ही परिजन सर्टिफिकेट बनवाने के लिए सिविल अस्पताल के कमरे के बाहर आकर खड़े हो जाते हैं। दोपहर 2 बजे के बाद उनको रजिस्ट्रेशन होने के बाद बताया जाता है कि आज डॉक्टर नहीं है, फिर उन्हें खाली हाथ लौटना पड़ता है।

दिव्यांग सर्टिफिकेट नहीं बनने की कोई शिकायत नहीं आई है। अगर इस तरह की समस्या है तो इसका तुरंत समाधान कराया जाएगा। दिव्यांग सर्टिफिकेट बनाए जाने सुनिश्चित किए जाएंगे।
- संजीव ग्रोवर, पीएमओ, सिविल अस्पताल
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