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गांव से कॉलेज में कदम रखने वाली पहली लड़की

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Tue, 08 Mar 2022 01:59 AM IST
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first girl from village to college
पानीपत। सरोज बाला गुर। - फोटो : Panipat
पानीपत। नाम- सरोज बाला गुर... और गुण हार न मानना। भिवानी जिले के गांव बौंद कला से कॉलेज जाने वाली वह पहली लड़की रहीं। इसके बाद उन्होंने शिक्षा के क्षेत्र में अहम योगदान दिया। सामाजिक कार्यों के जरिए समाज में भी विशेष पहचान बनाई। इतना ही नहीं शिक्षा के क्षेत्र में विशेष योगदान के कारण वह राष्ट्रपति पुरस्कार से भी नवाजी गईं।
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सरोज गुर बताती हैं कि कक्षा- 8 में जिला टॉप करने के बाद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा। गांव में स्कूली शिक्षा हासिल करने के बाद कॉलेज जाने वाली गांव की पहली लड़की बनीं। स्नातक की उपाधि राजकीय कालेज रोहतक से प्राप्त की। कॉलेज चुनाव में उप प्रधान बनकर कुशल नेतृत्व किया। कॉलेज पढ़ाई के साथ एनसीसी भी की। बीएड करने के बाद सर्विस के साथ-साथ सामाजिक विज्ञान और राजनीतिक विज्ञान में स्नातकोत्तर की। प्रवक्ता का पद प्राप्त किया। इसके बाद वर्ष 1999 में सीधे प्राचार्य के पद पर नियुक्त हुईं
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राष्ट्रपति अवार्ड से किया गया सम्मानित
शिक्षा के क्षेत्र में विशेष योगदान के कारण सरोज बाला गुर राष्टृपति अब्दुल कलाम अवार्ड से सम्मानित भी हो चुकी हैं। स्कूल में भी नेशनल जम्बूरी में राष्ट्रपति सम्मान पा चुकी हैं। पांच सितंबर 2008 में राज्यपाल ने स्टेट अवार्ड दिया। अपने अभूतपूर्व योगदान के कारण वे दर्जनों बार सम्मानित हो चुकी हैं।
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फिलीपिंस में कर चुकी हैं देश का नेतृत्व
शिक्षा के क्षेत्र में योगदान देते हुए सरोजबाला गुर ऐसी पहली जिला शिक्षा अधिकारी बनीं, जिन्होंने फिलीपिंस में एपीएआर वर्कशॉप में अपने देश का प्रतिनिधित्व किया। इस वर्कशॉप में एशिया के कुल 49 में से 43 देशों ने भाग लिया था।

सामाजिक कार्यों में दिया भरपूर सहयोग
शिक्षा के क्षेत्र में जुड़ी होने के साथ-साथ सरोज गुर ने सामाजिक कार्यों में भी अहम भूमिका निभाई। गरीब बच्चों को गोद करना, उनकी फीस व वर्दी, किताबों की व्यवस्था करना उनकी प्राथमिकता रही। वे रेडक्रॉस समेत विभिन्न सामाजिक संगठनों से भी जुड़ी रही। तुलसी विवाह में सहयोग दिया। भारत स्काउट गाइड का ग्रुप की स्थापना की। वे डीएस ओपन ग्रुप की सचिव भी रहीं।
सफरनामा
- 19 मई 1984 को गृह विज्ञान अध्यापिका बनीं।
- 14 दिसंबर 1991 को लेक्चरर बनीं।
- 1 अप्रैल 1999 को पहली बार उझा गांव के राजकीय स्कूल में प्रिंसीपल का पद ग्रहण किया।
- जनवरी 2011 को क्लास-वन एचईएस बनी, डाइट की प्रिंसीपल बनीं।
- 1 फरवरी 2011 को डीईईओ पानीपत का पद ग्रहण किया।
- 31 जुलाई 2014 को करनाल की जिला शिक्षा अधिकारी बनीं।
- एक अगस्त 2018 को शिक्षा विभाग पंचकूला में डिप्टी डायरेक्टर बनीं।
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