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Panipat News: महिल एडवोकेट सुदेश कुमारी सैकड़ों पीड़ितों को दिला चुकी न्याय

Tue, 02 Sep 2025 11:59 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, पानीपत
संवाद न्यूज एजेंसी, पानीपत Updated Tue, 02 Sep 2025 11:59 PM IST
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Female advocate Sudesh Kumari has provided justice to hundreds of victims
कुरुक्षेत्र। सुदेश कुमारी।
संवाद न्यूज एजेंसी
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कुरुक्षेत्र। सड़क पर ही नहीं अदालतों में भी हर कमजोर महिला के लिए खड़ी हो जाती हैं जिससे न केवल पीड़ित महिलाओं को न्याय मिल पा रहा है बल्कि उन्हें बड़ी ताकत भी मिल रही है। एडवोकेट सुदेश कुमारी न केवल इन महिलाओं में आशा की किरण दिखाई देने लगती है बल्कि वह ऐसी महिलाओं के लिए हर कदम पर साथ निभाती है, फिर भले किसी भी प्रकार के हालात से ही क्यों न गुजरना पड़े। इसी संघर्ष में ऐसा मोड़ भी आया जब उन्हें कई दिनों के लिए अपना घर तक छोड़ना पड़ा, लेकिन बावजूद इसके उनके मन में कभी पीछे हटने का ख्याल नहीं आया।
जन संघर्ष मंच की प्रदेश महासचिव एवं एडवोकेट सुदेश कुमारी का कहना है कि समाज में महिलाओं, अशिक्षित व बुजुर्गों को हर कोई दबाने का प्रयास करता है। वहीं देश के संविधान में सभी के लिए समानता का अधिकार निहित है। ऐसे लोगों का साथ देने के लिए हर किसी को आगे आना चाहिए। वे बताती हैं कि अब तक वह सैकड़ों पीड़ितों को न्याय दिलवा चुकी हैं, फिर भले ही इसके लिए सड़कों पर ही क्यों न आंदोलन करना पड़ा हो।
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अपने ही गांव के लोगों को इंसाफ दिलाने के लिए शुरू किया संघर्ष

सुदेश कुमारी बताती हैं कि उन्होंने वर्ष 1987 में अपने गांव से लोगों को इंसाफ दिलाने के लिए संघर्ष शुरू किया था। उस समय वह कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय में वकालत की पढ़ाई कर रही थीं। उन्हीं दिनों उनके गांव भौर सैयदा में शराब पीने से कई लोगों की जान चली गई थी। उनके परिजनों को इंसाफ दिलाने के लिए उन्होंने पहली बार ग्रामीणों को एकत्रित करके प्रशासन व सरकार के खिलाफ इंसाफ की आवाज बुलंद की। उसके बाद से उनका सफर निरंतर जारी है। वकालत की पढ़ाई पूरी करने के बाद अब तक बहुत से लोगों को इंसाफ भी दिला चुकी हैं।
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संघर्ष नहीं छोड़ा लेकिन छूट गया था घर
सुदेश कुमारी का कहना है कि वर्ष 1988 में जुरासी खुर्द के दो युवकों को आतंकवादी घोषित करके उनका एनकाउंटर कर दिया गया था। पता चला कि दोनों युवक बेकसूर थे, जिन्हें इंसाफ दिलाने के लिए की लड़ाई भी उन्होंने लड़ी। उनकी आवाज दबाने के लिए पुलिस उनके पिता को घर से उठाकर थाने ले गई। उस समय उनका आंदोलन तत्कालीन एसपी के खिलाफ चला था। पुलिस परिजनों को परेशान करने लगी थी, जिस वजह से उन्होंने अपना घर छोड़कर बाहर रहने का फैसला किया और कई दिनों तक वह अपने संगठन की सदस्य चंद्ररेखा के साथ रहीं। अनेक वर्षों से उक्त समाजिक संगठन के जरिए भी पीड़ितों की आवाजा उठाती आ रही है।

कुरुक्षेत्र। सुदेश कुमारी।

कुरुक्षेत्र। सुदेश कुमारी।

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