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नवजात का शव लेकर भटकता रहा पिता
अमर उजाला, पानीपत
Updated Sat, 28 Sep 2013 11:59 PM IST
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पानीपत में डॉक्टरों की कथित लापरवाही से एक और नवजात बच्चे की मौत हो गई। दो लड़कियों के बाद जन्मे बेटे की मौत के बाद परिवार में मातम है। शिवनगर निवासी पिता ने नवजात की मौत का आरोप निजी अस्पताल के डॉक्टरों और स्टाफ पर लगाया है।
पीड़ित परिवार अस्पताल संचालक पर कार्रवाई की मांग को लेकर पिता बच्चे का शव लेकर सिविल अस्पताल और किशनपुरा चौकी के चक्कर लगाता रहा। लेकिन उनकी कहीं सुनवाई नहीं हुई। पुलिस अधिकारी इस मामले से अंजान बन रहे हैं।
किशनपुरा निवासी सुनील की पत्नी ओमी गर्भ से थी और उसने शुक्रवार दोपहर बाद कालोनी के ही एक निजी अस्पताल में ओमी को दाखिल कराया। सुनील ने आरोप लगाया कि शाम के समय प्रसव पीड़ा बढ़ गई बाद में डिलीवरी के दौरान ही बच्चे की मौत हो गई। नर्सिंग स्टाफ बच्चे को मृत बताया। उनकी बात सुनकर वह ठगा सा रह गया।
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सुनील ने बताया कि डॉक्टरों ने कुछ देर पहले अल्ट्रासाउंड किया था। इसमें बच्चे की धड़कन और स्थिति को सामान्य बताया था। उसने आरोप लगाया कि डॉक्टरों ने बच्चे को बाहर निकालते समय लापरवाही दिखाई और उसकी मौत गर्दन दबने से हुई है। सुनील ने बताया कि इससे पहले उसकी दो लड़की हैं।
अस्पताल प्रबंधन ने जमा पैसे दिए वापस
सुनील ने आरोप लगाया कि उसने शुक्रवार को अपनी पत्नी को दाखिल कराया था। उसी समय अस्पताल संचालक ने चार हजार रुपये जमा कराने को कहा। उसने इलाज से पहले पैसे जमा करा दिए। बच्चे की मौत के बाद प्रबंधन ने उसके जमा पैसे लौटा दिए और इलाज से संबंधित कोई रिपोर्ट नहीं दी। उसने उनसे रिपोर्ट मांगने का प्रयास किया। लेकिन कोई सुनवाई नहीं की।
सिविल अस्पताल से भी बैरंग लौटा
सुनील अपने नवजात बच्चे का शव लेकर सिविल अस्पताल पहुंचा। वह लड़के की मौत के बाद काफी आक्रोशित था और संचालक पर कार्रवाई कराना चाहता था। यहां पर भी उसकी कोई सुनवाई नहीं हुई। कुछ लोगों ने उसे किशनपुरा चौकी का रास्ता दिखा दिया। चौकी में आने के बाद भी उसकी कोई सुनवाई नहीं हुई।
सरकारी तंत्र पर पहले उठ चुकी हैं अंगुली
सरकारी तंत्र पर डिलीवरी के दौरान नवजात या जच्चा की मौत होने पर पहले कई बार अंगुली उठ चुकी है। स्वास्थ्य अधिकारी व्यवस्थाओं को सुधारने का भरोसा दिलाते हैं। लेकिन जच्चा और बच्चा की मौत जारी है। गत दिनों समालखा क्षेत्र की एक पीएचसी में एक बच्चे की जन्म के दौरान मौत हो गई थी। इसे लेकर सिविल अस्पताल में हंगामा मच गया था।
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पीड़ित परिवार अस्पताल संचालक पर कार्रवाई की मांग को लेकर पिता बच्चे का शव लेकर सिविल अस्पताल और किशनपुरा चौकी के चक्कर लगाता रहा। लेकिन उनकी कहीं सुनवाई नहीं हुई। पुलिस अधिकारी इस मामले से अंजान बन रहे हैं।
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किशनपुरा निवासी सुनील की पत्नी ओमी गर्भ से थी और उसने शुक्रवार दोपहर बाद कालोनी के ही एक निजी अस्पताल में ओमी को दाखिल कराया। सुनील ने आरोप लगाया कि शाम के समय प्रसव पीड़ा बढ़ गई बाद में डिलीवरी के दौरान ही बच्चे की मौत हो गई। नर्सिंग स्टाफ बच्चे को मृत बताया। उनकी बात सुनकर वह ठगा सा रह गया।
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सुनील ने बताया कि डॉक्टरों ने कुछ देर पहले अल्ट्रासाउंड किया था। इसमें बच्चे की धड़कन और स्थिति को सामान्य बताया था। उसने आरोप लगाया कि डॉक्टरों ने बच्चे को बाहर निकालते समय लापरवाही दिखाई और उसकी मौत गर्दन दबने से हुई है। सुनील ने बताया कि इससे पहले उसकी दो लड़की हैं।
अस्पताल प्रबंधन ने जमा पैसे दिए वापस
सुनील ने आरोप लगाया कि उसने शुक्रवार को अपनी पत्नी को दाखिल कराया था। उसी समय अस्पताल संचालक ने चार हजार रुपये जमा कराने को कहा। उसने इलाज से पहले पैसे जमा करा दिए। बच्चे की मौत के बाद प्रबंधन ने उसके जमा पैसे लौटा दिए और इलाज से संबंधित कोई रिपोर्ट नहीं दी। उसने उनसे रिपोर्ट मांगने का प्रयास किया। लेकिन कोई सुनवाई नहीं की।
सिविल अस्पताल से भी बैरंग लौटा
सुनील अपने नवजात बच्चे का शव लेकर सिविल अस्पताल पहुंचा। वह लड़के की मौत के बाद काफी आक्रोशित था और संचालक पर कार्रवाई कराना चाहता था। यहां पर भी उसकी कोई सुनवाई नहीं हुई। कुछ लोगों ने उसे किशनपुरा चौकी का रास्ता दिखा दिया। चौकी में आने के बाद भी उसकी कोई सुनवाई नहीं हुई।
सरकारी तंत्र पर पहले उठ चुकी हैं अंगुली
सरकारी तंत्र पर डिलीवरी के दौरान नवजात या जच्चा की मौत होने पर पहले कई बार अंगुली उठ चुकी है। स्वास्थ्य अधिकारी व्यवस्थाओं को सुधारने का भरोसा दिलाते हैं। लेकिन जच्चा और बच्चा की मौत जारी है। गत दिनों समालखा क्षेत्र की एक पीएचसी में एक बच्चे की जन्म के दौरान मौत हो गई थी। इसे लेकर सिविल अस्पताल में हंगामा मच गया था।