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Panipat News: फास्ट ट्रैक कोर्ट ने दुष्कर्म के आरोपी किया बरी

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sat, 05 Apr 2025 01:29 AM IST
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Fast track court acquitted rape accused

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पानीपत। अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश सुखप्रीत सिंह की फास्ट ट्रैक कोर्ट ने एक नाबालिग से दुराचार के आरोपी को बरी कर दिया है। उस पर 16 वर्षीय नाबालिग से दुष्कर्म का आरोप था। आरोपी 10 महीने से जेल में बंद था। नाबालिग के बयान में अंतर होने के बाद बेगुनाह विशाल सजा काट रहा था। अब डीएनए रिपोर्ट निगेटिव मिली तो विशाल को बेगुनाह करार कर बरी कर दिया।
एडवोकेट मोहित कुहाड़ ने बताया कि जुलाई 2023 में थाना पुराना औद्योगिक क्षेत्र के एक युवक ने उसकी 16 वर्षीय बहन की गुमशुदगी की शिकायत दी। बहन का अपहरण होने की आशंका जताई। पुलिस ने अपहरण का केस दर्ज कर 28 जुलाई को नाबालिग को बरामद कर मेडिकल कराया तो किशोरी गर्भवती मिली। पुलिस ने केस में धारा 376 (2) एन व छह पॉक्सो एक्ट जोड़ उसके बयान के आधार पर विशाल उर्फ प्रभात को गिरफ्तार कर लिया। दो अगस्त 2023 को विशाल के सैंपल कराकर जेल भेज दिया। वहीं कोर्ट के आदेशों पर पांच अगस्त को किशोरी का गर्भपात करा दिया। इधर कोर्ट में किशोरी के माता-पिता समेत 19 गवाह पेश हुए लेकिन विशाल की पैरवी करते समय डीएनए रिपोर्ट ही निगेटिव मिली तो केस में नया मोड़ आ गया। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले का हवाला देते हुए दलील पेश की तो अदालत ने विशाल को बेकसूर मानते हुए बरी कर दिया।
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50 हजार के लेन-देन का था मामला
एडवोकेट मोहित कुहाड़ ने बताया कि नाबालिग की मां और विशाल के पिता के बीच करीब 50 हजार रुपये का लेन-देन का मामला था। पैसे ना चुका पाने की वजह से नाबालिग के परिजनों ने विशाल के खिलाफ केस दर्ज करा दिया। उन्होंने बताया कि 30 जुलाई को नाबालिग के 161 सीआरपीसी के तहत पुलिस ने बयान दर्ज किए थे। जिसमें नाबालिग ने बताया था कि उसके अकेले होने पर विशाल उसके घर में घुसकर दुष्कर्म करता था। 24 जुलाई 2023 को दिल्ली घुमाने का झांसा देकर अपने साथ ले जाने और कमरा नहीं मिलने पर 28 जुलाई को उसे वापस पानीपत छोड़ने का जिक्र किया था। वहीं 31 जुलाई को कोर्ट में 164 के बयान में नाबालिग ने कहा कि उसे मम्मी ने डांट दिया था, इसलिए वह दोस्त के घर चली गई। वहां से अपनी मर्जी से वापस आ भी गई। उसके साथ कोई गलत काम नहीं हुआ। जबकि कोर्ट में दोबारा से गवाही हुई तो नाबालिग ने विशाल पर दुष्कर्म करने का आरोप लगाया। 10 माह बाद डीएनए रिपोर्ट निगेटिव आने पर पता चला कि नाबालिग के साथ किसी अन्य ने दुष्कर्म किया था।
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अदालत ने किया बरी, अब घर में हुआ कैद
विशाल को अदालत ने बेगुनाह करार देते हुए बरी कर दिया है लेकिन पिछले 10 माह ने उसकी जिंदगी बदल दी है। जेल की चहारदीवारी से निकला विशाल अब घर की चहारदीवारी में खुद को महफूज समझ रहा है। उसके ऊपर लगे झूठे आरोपों ने उसकी असल जिंदगी की पहचान खराब कर दी है। घर से निकलने में कतराता है। वहीं महिला वर्ग के सामने खुद को असहज महसूस करने लगा है।
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