कृषि विज्ञान केंद्र ऊझा में बुधवार को फसल विविधिकरण के लिए ग्रीष्म कालीन मूंग खेत दिवस पर एक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इसका मुख्य उद्देश्य फसल विविधिकरण के लिए किसानों को प्रेरित करना और पानी की बचत, दलहनी फसलों के क्षेत्रफल और उत्पादन को बढ़ाने को लेकर रहा। कृषि विज्ञान केंद्र के वरिष्ठ संयोजक डॉ. राजबीर गर्ग ने बताया कि ग्रीष्म कालीन मूंग से किसानों की अतिरिक्त आय बढ़ सकती है। यही नहीं दलहनी फसल से भूमि की उपजाऊ शक्ति भी बढ़ती है। मूंग की कम अवधि की किस्में जैसे एमएच 1314 व 421 इस समय की बिजाई के लिए सबसे उपयुक्त हैं। फलियां तोड़ने के बाद इससे हरी खाद के रूप में जमीन में मिलाया जा सकता है, जिससे भूमि की जल संचय करने की क्षमता बढ़ती है। पिछले कुछ वर्षों से मूंग व अन्य दलहनी फसलों का समर्थन मूल्य काफी बढ़ाया गया है तथा बाजार में इनका भाव भी अच्छा मिल जाता है।
जिला विस्तार विशेषज्ञ डॉ. सतपाल ने किसानों को सीधी बिजाई के बारे में बताते हुए कहा कि यह समय धान की बिजाई करने का सबसे उपयुक्त समय है। सीधी बिजाई के लिए धान की कम अवधि की किस्में जैसे 1509 व पीआर 126 का प्रयोग करना चाहिए। बीज की मात्रा 8 किलो ग्राम प्रति एकड़ रखें तथा बिजाई के तुरंत बाद खरपतवार नाशक का प्रयोग करें। इस कार्य से पानी की बचत होती है तथा फसल अवशेष प्रबंधन में मदद मिलती है। इस अवसर पर तकनीकी सहायक डॉ. सीमा दहिया ने विभिन्न अनुसंधान के कार्यों के बारे में विस्तार से बताया। इसमें प्रगतिशील किसान राजेंद्र रावल ने किसानों को गन्ना आधारित फसलों के बारे में जानकारी दी। इस मौके पर जयपाल, जयनारायण, सुशील, बिजेन्द्र, नरेश, उमेद आदि उपस्थित रहे।