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Panipat News: यूएसए गए युवक का फर्जी तरीके से बना दिया लर्निंग ड्राइविंग लाइसेंस, फर्जीवाड़े में महिला ऑपरेटर व क्लर्क समेत पांच पर केस

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sat, 26 Aug 2023 03:07 AM IST
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Fake learning driving license of a young man who went to USA
पानीपत। पानीपत में वाहनों के फर्जी तरीके से रजिस्ट्रेशन करने के बाद अब ड्राइविंग लाइसेंस बनाने में बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है। कर्मचारियों ने मिलीभगत कर नारा गांव के यूएसए गए एक युवक का पानीपत में फर्जी तरीके से लर्निंग ड्राइविंग लाइसेंस बना दिया। युवक जनवरी में यूएसए चला गया था, जबकि उसका लर्निंग ड्राइविंग लाइसेंस मई में बनाया गया। इसका खुलासा एक शिकायत पर सीएम फ्लाइंग से इनपुट मिलने के बाद डीसी के अपने स्तर पर कराई जांच में हुआ। एसडीएम ने लर्निंग लाइसेंस क्लर्क, महिला और पुरुष कंप्यूटर ऑपरेटर समेत पांच के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया है।
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एसडीएम पानीपत ने शिकायत में बताया कि सरल केंद्र में ड्राइविंग लाइसेंस बनाए जाते हैं। नियमानुसार किसी भी आवेदक का पहले लर्निंग ड्राइविंग लाइसेंस बनाया जाता है। इस प्रक्रिया में आवेदक का हाजिर होना जरूरी है। नवादा गांव के एक व्यक्ति ने एक शिकायत में आरोप लगाया कि नारा गांव निवासी एक युवक का फर्जी तरीके से लाइसेंस बनाया गया है। उन्होंने डीसी के आदेश पर राजस्व विभाग के सहायक अधीक्षक सतबीर सिंह, रीडर विक्रम सिंह और जूनियर प्रोग्रामर कशिन चावला की टीम बनाकर जांच कराई। वह टीम की खुद अगवाई कर रहे थे। टीम ने सभी तथ्यों, दस्तावेजों और ऑनलाइन रिकॉर्ड की जांच की। जिसमें सामने आया कि अमित निवासी गांव नारा के नाम से लर्निंग ड्राइविंग लाइसेंस 30 मई को जारी हुआ है। इसके लिए 15 मई को ऑनलाइन अप्लाई किया था।
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इस संबंध में सरल केंद्र को 23 मई को 650 रुपये डेबिट कार्ड के माध्यम से अदा किए गए थे। यह फीस सरल केंद्र में नियुक्त कंप्यूटर ऑपरेटर अंकित ने ऑनलाइन काटी है। लाइसेंस के संबंध में आईडीटीआर से ट्रेनिंग या फीस के संबंध में ऑनलाइन रिकॉर्ड व रजिस्टर में कोई एंट्री नहीं मिली। आवेदक भी मौके पर नहीं मिला और मिलीभगत से महिला कर्मचारी ने टेस्ट क्वालीफाई दिखा दिया। इसके अलावा रेडक्रॉस सोसायटी की 300 रुपये की फीस फाइल पर उपलब्ध थी। 26 जुलाई की शाम लगभग 4:30 बजे ड्राइविंग लाइसेंस क्लर्क ललित कुमार ने फाइल उपलब्ध करवाई। जिसकी जांच पर पाया गया कि आवेदक का स्टॉल टेस्ट 30 मई को कंप्यूटर ऑपरेटर शिप्रा ने शाम करीब 3:02 बजे लिया है। जिसकी स्टैंप फाइल पर लगी हुई है। इस फाइल पर डीएलसी ललित कुमार की मार्किंग, लेकिन तारीख लिखी नहीं लिखी और न ही डीएलसी की मार्किंग पर स्टैंप है।
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आवेदक के बारे में उसके भाई साहिल से पूछताछ की तो उसने बताया उसका भाई अमित जनवरी 2023 से यूएसए गया हुआ है। जांच में सामने आया कि आवेदक के विदेश जाने से पहले 30 मई को उसका लर्निंग लाइसेंस गलत तरीके से बनाया गया है, जिसमें कंप्यूटर ऑपरेटरों व डीएलसी ललित की लापरवाही व मिलीभगत साफ झलकती है। थाना शहर पुलिस ने शिकायत के आधार पर लाइसेंस क्लर्क ललित कुमार, कंप्यूटर ऑपरेटर अंकित, शिप्रा और नारा गांव निवासी सगे भाइयों अमित व साहिल के खिलाफ धोखाधड़ी का केस दर्ज कर लिया है।
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