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सीएफसी में एक छत के नीचे मिलेगी सुविधाएं
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पानीपत। शहरवासियों के लिए एक राहत भरी खबर है। अब उन्हें पालिका बाजार निगम कार्यालय में तीन मंजिल ऊपर चढ़कर एनडीसी, संपत्ति कर की फाइल जमा करवाने, शिकायत देने या बिल जमा करवाने आदि से मुक्ति मिल जाएगी। इसके अलावा शहरवासियों को कई प्रकार की योजनाओं का लाभ लेने के लिए किसी सीएससी सेंटर में भी जाने की जरूरत नहीं होगी। ये सभी काम अब सीएफसी (कस्टर फैसिलिटी सेंटर) यानी नागरिक सुविधा केंद्र में एजेंसी के माध्यम से कराए जा सकेंगे। निगम ने इन सभी कामों के लिए सिंपलेक्स एजेंसी का टेंडर दे दिया है। इस पर काम शुरू हो चुका है, लेकिन सोमवार से नियमित रूप से यहीं से काम होगा।
ये एजेंसी शहरवासियों को संपत्ति कर प्रपत्र बांटने के साथ बिल जमा कराने और इनकी सीएफसी पर आने वाली शिकायतों को अधिकारियों के पास भी पहुंचाने का काम भी करेगी। इसके अलावा इसी सेंटर से जन्म व मृत्यु प्रमाण पत्र, विवाह पंजीकरण, ट्रेड लाइसेंस समेत फॉयर एनओसी व अन्य दस्तावेजों के लिए भी यहीं से आवेदन किए जा सकेंगे। इस एजेंसी को निगम ने 21 रुपये प्रति बिल के हिसाब से शहर के सभी प्रॉपर्टियों के बिल बांटने, डिमांड और कलेक्शन का काम भी दिया है। एजेंसी शहर के सभी 26 वार्डों में हर घर जाकर प्रॉपर्टी टैक्स का बिल बांटेगी।
लोगों से टैक्स की रिसिविंग लेगी। अगर रिसिविंग नहीं है तो नोटिस चस्पा कर इसकी फोटो निगम में जमा करवाएगी तभी निगम से इस काम का बिल लिया जा सकेगा। वहीं, एजेंसी को खाली प्लाट के बिल का भुगतान नहीं मिलेगा। इसके अलावा इसी एजेंसी के माध्यम से शहर के बड़े बकायेदारों को नोटिस भी भिजवाए जाएंगे।
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फाइल नंबरों से होगा काम, ऊपर जाने पर पांबदी
अब शहरवासियों को अपना बिल जमा करवाने या संबधित किसी भी प्रमाण पत्र या प्रॉपर्टी आईडी के लिए ताऊ देवी लाल कांप्लेक्स की सीएफसी में आना होगा। यहां एजेंसी द्वारा अपने कर्मचारी लगाए जाएंगे। ये फाइल या बिल को रिसिव करेंगे। यहां से फाइल नंबर लगने के बाद एजेंसी के माध्यम से फाइल कर शाखा के निगम अधिकारियों के पास जाएगी। कर शाखा में आने के बाद फाइल का फिर से नंबर लगेगा। जिसमें निगम अधिकारियों व कर्मचारियों का काम सिर्फ फाइलों के ऑब्जेक्शनस को हटाना होगा। बाकी पूरा काम एजेंसी ही करेगी। इससे कोई फाइल गुम नहीं हो पाएगी। पूरा काम एजेंसी के माध्यम से होने की वजह से आम आदमी या दलालों की ऊपर जाने पर पाबंदी रहेगी।
निगम ने बनवाई तीन कॉपी वाली खास रसीद बुक
निगम अधिकारियों ने संपत्ति कर शाखा के लिए एक खास रसीद बुक बनवाई है। इसमें तीन तरह की कॉपी रखी जाएंगी। एक कॉपी करदाता को दी जाएगी जिसमें करदाता का नाम, पता, मोबाइल नंबर, किस क्लर्क के पास फाइल है का नाम, तारीख समेत पूरी डिटेल दी जा रही है। दूसरी कॉपी वार्ड क्लर्क के पास रहेगी और तीसरी कॉपी निगम के रिकार्ड में जमा होगी। इससे किसी भी शहरवासी की कोई भी फाइल अब गुम नहीं हो पाएगी। संबंधित वार्ड क्लर्क को इसका जवाब देना होगा। अगर फाइल गुम भी हो जाती है तो रिकार्ड से उसे फिर से कॉपी कर लिया जाएगा। इस रसीद बुक को बुधवार को ही लागू कर दिया गया है।
सीएफसी में होगी एजेंसी के कर्मचारी, 5 से 7 लाख प्रतिमाह होगा खर्च
सीएफसी सेंटर में एजेंसी डीसी रेट के हिसाब से अपने 10 से 12 कर्मचारी लगाएगी। यहां प्रॉपर्टी टैक्स समेत फायर, जन्म व मृत्यु प्रमाण पत्रों समेत रिहायशी या आय प्रमाण पत्रों की अलग अलग खिड़कियों पर एजेंसी कर्मचारी तैनात रहेंगे। इसमें स्टेशनरी से लेकर ऑपरेटिंग सिस्टम पर अनुमानित खर्च 5 से 7 लाख रुपये प्रतिमाह होगा। ये खर्च केवल सीएफसी संचाल का रहेगा। प्रॉपर्टी टैक्स बांटने का भुगतान अलग से किया जाएगा।
लोगों की सुविधाओं के लिए उठाया कदम
शहरवासियों को पालिका बाजार कार्यालय में तीन मंजिल चढ़ना पड़ता था। कभी बिल न मिलने, कभी गलत बिल तो कभी कर्मचारियों की शिकायतें मिलती थी। अब एक ही छत के नीचे सभी काम समय पर हो पाएंगे। लोगों को उनके प्रॉपर्टी टैक्स के बिल घर पर ही मिल सकेंगे। ऐसी प्रणाली बनाई गई है कि किसी की भी फाइल गुम नहीं हो पाएगी। -आरके सिंह, आयुक्त, नगर निगम, पानीपत।
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ये एजेंसी शहरवासियों को संपत्ति कर प्रपत्र बांटने के साथ बिल जमा कराने और इनकी सीएफसी पर आने वाली शिकायतों को अधिकारियों के पास भी पहुंचाने का काम भी करेगी। इसके अलावा इसी सेंटर से जन्म व मृत्यु प्रमाण पत्र, विवाह पंजीकरण, ट्रेड लाइसेंस समेत फॉयर एनओसी व अन्य दस्तावेजों के लिए भी यहीं से आवेदन किए जा सकेंगे। इस एजेंसी को निगम ने 21 रुपये प्रति बिल के हिसाब से शहर के सभी प्रॉपर्टियों के बिल बांटने, डिमांड और कलेक्शन का काम भी दिया है। एजेंसी शहर के सभी 26 वार्डों में हर घर जाकर प्रॉपर्टी टैक्स का बिल बांटेगी।
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लोगों से टैक्स की रिसिविंग लेगी। अगर रिसिविंग नहीं है तो नोटिस चस्पा कर इसकी फोटो निगम में जमा करवाएगी तभी निगम से इस काम का बिल लिया जा सकेगा। वहीं, एजेंसी को खाली प्लाट के बिल का भुगतान नहीं मिलेगा। इसके अलावा इसी एजेंसी के माध्यम से शहर के बड़े बकायेदारों को नोटिस भी भिजवाए जाएंगे।
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फाइल नंबरों से होगा काम, ऊपर जाने पर पांबदी
अब शहरवासियों को अपना बिल जमा करवाने या संबधित किसी भी प्रमाण पत्र या प्रॉपर्टी आईडी के लिए ताऊ देवी लाल कांप्लेक्स की सीएफसी में आना होगा। यहां एजेंसी द्वारा अपने कर्मचारी लगाए जाएंगे। ये फाइल या बिल को रिसिव करेंगे। यहां से फाइल नंबर लगने के बाद एजेंसी के माध्यम से फाइल कर शाखा के निगम अधिकारियों के पास जाएगी। कर शाखा में आने के बाद फाइल का फिर से नंबर लगेगा। जिसमें निगम अधिकारियों व कर्मचारियों का काम सिर्फ फाइलों के ऑब्जेक्शनस को हटाना होगा। बाकी पूरा काम एजेंसी ही करेगी। इससे कोई फाइल गुम नहीं हो पाएगी। पूरा काम एजेंसी के माध्यम से होने की वजह से आम आदमी या दलालों की ऊपर जाने पर पाबंदी रहेगी।
निगम ने बनवाई तीन कॉपी वाली खास रसीद बुक
निगम अधिकारियों ने संपत्ति कर शाखा के लिए एक खास रसीद बुक बनवाई है। इसमें तीन तरह की कॉपी रखी जाएंगी। एक कॉपी करदाता को दी जाएगी जिसमें करदाता का नाम, पता, मोबाइल नंबर, किस क्लर्क के पास फाइल है का नाम, तारीख समेत पूरी डिटेल दी जा रही है। दूसरी कॉपी वार्ड क्लर्क के पास रहेगी और तीसरी कॉपी निगम के रिकार्ड में जमा होगी। इससे किसी भी शहरवासी की कोई भी फाइल अब गुम नहीं हो पाएगी। संबंधित वार्ड क्लर्क को इसका जवाब देना होगा। अगर फाइल गुम भी हो जाती है तो रिकार्ड से उसे फिर से कॉपी कर लिया जाएगा। इस रसीद बुक को बुधवार को ही लागू कर दिया गया है।
सीएफसी में होगी एजेंसी के कर्मचारी, 5 से 7 लाख प्रतिमाह होगा खर्च
सीएफसी सेंटर में एजेंसी डीसी रेट के हिसाब से अपने 10 से 12 कर्मचारी लगाएगी। यहां प्रॉपर्टी टैक्स समेत फायर, जन्म व मृत्यु प्रमाण पत्रों समेत रिहायशी या आय प्रमाण पत्रों की अलग अलग खिड़कियों पर एजेंसी कर्मचारी तैनात रहेंगे। इसमें स्टेशनरी से लेकर ऑपरेटिंग सिस्टम पर अनुमानित खर्च 5 से 7 लाख रुपये प्रतिमाह होगा। ये खर्च केवल सीएफसी संचाल का रहेगा। प्रॉपर्टी टैक्स बांटने का भुगतान अलग से किया जाएगा।
लोगों की सुविधाओं के लिए उठाया कदम
शहरवासियों को पालिका बाजार कार्यालय में तीन मंजिल चढ़ना पड़ता था। कभी बिल न मिलने, कभी गलत बिल तो कभी कर्मचारियों की शिकायतें मिलती थी। अब एक ही छत के नीचे सभी काम समय पर हो पाएंगे। लोगों को उनके प्रॉपर्टी टैक्स के बिल घर पर ही मिल सकेंगे। ऐसी प्रणाली बनाई गई है कि किसी की भी फाइल गुम नहीं हो पाएगी। -आरके सिंह, आयुक्त, नगर निगम, पानीपत।