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Panipat News: हर पांचवें नवजात का वजन मिल रहा कम

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Mon, 23 Oct 2023 02:21 AM IST
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Every fifth newborn is getting less weight
- प्रसूताओं में जागरूकता की कमी, इसलिए नहीं देती खानपान पर ध्यान
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- हर पांचवें बच्चे का वजन 1800 ग्राम से कम
- हर माह नौ तारीख को कैंप लगाकर गर्भवतियों को कर रहा जागरूक
- पिछले छह माह में 3300 बच्चों का वजन 1800 ग्राम से कम मिला
माई सिटी रिपोर्टर
पानीपत। पानीपत में जन्म लेने हर पांचवां बच्चा कम वजन के साथ पैदा हो रहा है। इसका बड़ा कारण बढ़ रही प्री मैच्योर डिलीवरी भी है। समय से पहले जन्म होने पर नवजात का वजन आमतौर पर कम होता है। नागरिक अस्पताल में हर रोज औसतन 35-40 डिलीवरी होती हैं इनमें से 4-5 के बीच प्री मैच्योर डिलीवरी हो रही है। इसका बड़ा गर्भवतियों में स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता की कमी है। पिछले छह माह में जिले में लगभग साढ़े 16 हजार डिलीवरी हुई हैं। इनमें लगभग 3300 बच्चों का वजन 1800 ग्राम से कम मिला है। डॉक्टरों के मुताबिक नवजात का वजन जन्म के वक्त 1800 ग्राम से अधिक होना चाहिए। इन बच्चों को एसएनसीयू वार्ड में दाखिल करना पड़ता है। वजन सामान्य होने पर इनको नागरिक अस्पताल से छुट्टी मिलती है।

स्वास्थ्य विभाग प्री मैच्योर डिलीवरी, शिशु मौत व प्रसूताओं की मौत के मामलों में कमी लाने के लिए हर माह की नौ तारीख को प्रधानमंत्री मातृत्व सुरक्षा अभियान के तहत हर स्वास्थ्य केंद्र में जांच शिविर लगाता है। इन शिविर में गर्भवतियों को बेहतर खानपान, उच्च रक्तचाप, शुगर व एनिमिया समेत तमाम बीमारियों के बारे में जागरूक किया जाता है। महिलाओं की निरंतर जांच होती है। खानपान पर ध्यान न देने के कारण गर्भवती एनिमिया से ग्रस्त हो जाती है। पेट में पल रहा बच्चा भी कमजोर होता है। नवजातों का विकास नहीं हो पाता। इसलिए बच्चे कम वजन के साथ पैदा होते हैं। जन्म के बाद ऐसे बच्चों का विभिन्न बीमारियां से घिरने का भी खतरा बना रहता है।
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अंधेपन व बहरेपन का बड़ा कारण प्री मैच्योर डिलीवरी-

अंधेपन व बेहरेपन का बड़ा कारण प्री मैच्योर डिलीवरी है। समय से पहले डिलीवरी होने पर पेट में पल रहे नवजात की आंखों की पुतियां सही प्रकार से विकसित नहीं हो पाती। उसमें देखने की क्षमता नहीं हो पाती। नवजातों के कानों के परदे भी विकसित नहीं होते। इसलिए वो बहरेपन का शिकार होते हैं। सरकार ने प्री मैच्योर डिलीवरी के मामलों में नवजातों के कान के परदों व आंखों की जांच अनिवार्य की है।
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महिलाएं खानपान पर ध्यान दें, डॉक्टरों से परामर्श लेतीं रहे : डॉ. लिपिका

जिले की 60 प्रतिशत से अधिक गर्भवतियों में खून की कमी होती है। उच्च रक्तचाप से प्री मैच्योर डिलीवरी के मामले बढ़ते हैं। प्री मैच्योर डिलीवरी में नवजात का वजन सामान्य से कम होता है। इसके अलावा समय पर डिलीवरी होने पर भी कई नवजातों का वजन कम होता है क्योंकि महिलाएं गर्भधारण के बाद खानपान पर ध्यान नहीं देती।

डॉ. लिपिका, महिला रोग विशेषज्ञ नागरिक अस्पताल पानीपत।
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