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शाहपुर में आज भी जीवित है 500 साल पुराना कुआं, आज भी देता है ठंडा और मीठा पानी
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पानीपत। जिले के इसराना ब्लॉक के गांव शाहपुर में आज भी एक ऐसा कुआं हैं जो पिछले 500 साल से लोगों की प्यास बुझा रहा है। इस कु आं का पानी ठंडा और मीठा भी है। आधुनिक भारत के गांवों में जहां अधिकांश कुएं खंडहर में तब्दील हो चुके हैं, इस गांव में आज भी ग्रामीण इस कुएं से रस्सी डालकर बाल्टियों से पानी निकालते हैं।
गांव की पौराणिक कथाओं में भी इस कुएं का बखूबी जिक्र है। ग्रामीण बताते हैं कि ये कुआं बाबा सुकरमदास जी ने खुदवाया था। इस कुएं को उन्होंने ये बख्शीश दी थी कि इसका पानी कभी नहीं सूखेगा और हमेशा ठंडा और मीठा पानी देगा। ग्रामीण बताते हैं कि उनके गांव में ज्यादातर ट्यूबवेल जिनका भूमिगत जल स्तर 100 फुट तक या इससे भी ज्यादा है उनसे खारा पानी निकलता है लेकिन इस कुएं का जलस्तर महज 15 फीट है लेकिन इससे हमेशा ठंडा और मीठा पानी आता है। कई बार इस कुएं के पानी के टीडीएस तक चेक करवाया जा चुका है लेकिन आज तक इस कुएं के पानी का कोई भी सेंपल फेल नहीं हो पाया है। यही वजह है कि लोग इसके पानी को जीवनदाता मानते हैं। वे खुद अपने स्वास्थ्य का राज इस कुएं को पानी को मानते हैं। ग्रामीण कुएं पर जब पानी लेने जाते हैं तो इसकी इतनी इज्जत करते हैं कि इस पर चढ़ने से पहले अपने चप्पल जूते तक उतार देते हैं।
पुराने दिनों की दिलाता है याद
आज भी गांव के लोग इस कुएं पर जब पानी भरने आते हैं तो उनके सिर पर मटके रखे होते हैं। कुएं पर पुरानी पंरपरा के अनुसार रस्सी से बाल्टी बांध कर कुएं में डाली जाती है। पानी भरने के बाद इसे खींचा जाता है। इसके बाद इससे मटके भरे जाते हैं। देखने पर यह नजारा पुराने दिनों की याद दिलाता है।
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गांव की पौराणिक कथाओं में भी इस कुएं का बखूबी जिक्र है। ग्रामीण बताते हैं कि ये कुआं बाबा सुकरमदास जी ने खुदवाया था। इस कुएं को उन्होंने ये बख्शीश दी थी कि इसका पानी कभी नहीं सूखेगा और हमेशा ठंडा और मीठा पानी देगा। ग्रामीण बताते हैं कि उनके गांव में ज्यादातर ट्यूबवेल जिनका भूमिगत जल स्तर 100 फुट तक या इससे भी ज्यादा है उनसे खारा पानी निकलता है लेकिन इस कुएं का जलस्तर महज 15 फीट है लेकिन इससे हमेशा ठंडा और मीठा पानी आता है। कई बार इस कुएं के पानी के टीडीएस तक चेक करवाया जा चुका है लेकिन आज तक इस कुएं के पानी का कोई भी सेंपल फेल नहीं हो पाया है। यही वजह है कि लोग इसके पानी को जीवनदाता मानते हैं। वे खुद अपने स्वास्थ्य का राज इस कुएं को पानी को मानते हैं। ग्रामीण कुएं पर जब पानी लेने जाते हैं तो इसकी इतनी इज्जत करते हैं कि इस पर चढ़ने से पहले अपने चप्पल जूते तक उतार देते हैं।
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पुराने दिनों की दिलाता है याद
आज भी गांव के लोग इस कुएं पर जब पानी भरने आते हैं तो उनके सिर पर मटके रखे होते हैं। कुएं पर पुरानी पंरपरा के अनुसार रस्सी से बाल्टी बांध कर कुएं में डाली जाती है। पानी भरने के बाद इसे खींचा जाता है। इसके बाद इससे मटके भरे जाते हैं। देखने पर यह नजारा पुराने दिनों की याद दिलाता है।
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