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ईएसआई अस्पताल को मिले ईएनटी और बालरोग विशेषज्ञ, पहली बार दो स्पेशलिस्ट

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sun, 29 Aug 2021 11:59 PM IST
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ESI Hospital gets ENT and Pediatrician, for the first time two specialists
ईएसआई के पात्रों को कुछ राहत मिली है। ईएसआई अस्पताल में ईएनटी और हड्डी व बाल रोग विशेषज्ञ ने ज्वाइन कर लिया है। मरीजों को अब सिविल अस्पताल या निजी अस्पताल में इलाज के लिए नहीं जाना पड़ेगा। अब ईएसआई में डॉक्टरों की संख्या 11 हो चुकी है। दूसरी ओर जिले के 1 लाख कर्मचारियों के वेतन से हर माह ईएसआई में 3.50 करोड़ रुपये जाते हैं। इसके बावजूद इन कर्मचारियों को ईएसआई अस्पताल में पूरी स्वास्थ्य सुविधा नहीं मिल पाती है।
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यहां से जिन निजी अस्पतालों में मरीजों को रेफर किया जाता है, वहां टेस्ट आदि के पैसे उन्हें खुद देने पड़ते हैं। जबकि कर्मचारियों का कहना है कि जब वे अपने वेतन से पैसे कटवा रहे हैं तो वे भुगतान क्यों करें। इसके अलावा जब वे क्लेम में डालते हैं तो पूरे पैसे भी नहीं मिलते। क्योंकि निजी अस्पतालों में जांच के दाम ज्यादा हैं। ईएसआई वाले सरकारी दाम के हिसाब से बिल पास करते हैं, जिसमें काफी अंतर है।
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ईएसआई अस्पताल में सिर्फ दो एसएमओ व 9 एमओ (मेडिकल ऑफिसर) हैं। जो केवल बुखार, जुकाम खांसी जैसे छोटी बीमारियों की ही दवा दे सकते हैं। अन्य बीमारियों से संबंधित मरीजों को निजी अस्पताल या रोहतक पीजीआई भेज देते हैं।
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एक लाख पर महज दो डिस्पेंसरी
जब ईएसआई की शुरूआत हुई थी तब 10 हजार मरीजों पर 5 डॉक्टरों की पोस्ट मंजूर थी। 10 हजार मरीजों पर एक डिस्पेंसरी होनी जरूरी थी। एक लाख कर्मचारियों के हिसाब से 50 डॉक्टर व 10 डिस्पेंसरी होनी चाहिए।
50 साल बाद 15 डॉक्टरों की ही पोस्ट सेंक्शन
ईएसआई अस्पताल के हालात बद से बदतर हैं। 50 साल पहले पानीपत के 30 हजार कर्मचारी ईएसआई से जुड़े थे। उनके इलाज के लिए यहां 15 डॉक्टरों की पोस्ट मंजूर की थी। आज कर्मचारियों की संख्या करीब एक लाख है। लेकिन डॉक्टरों की मंजूर पोस्ट आज भी 15 ही हैं, जबकि इनमें से मात्र 11 डॉक्टर ही कार्यरत हैं। इनमें ईएसआई अस्पताल में 7, मॉडल टाउन डिस्पेंसरी पर 3, नांगलखेड़ी डिस्पेंसरी पर 1 डॉक्टर कार्यरत है। अब ईएसआई को ईएनटी व बाल रोग विशेषज्ञ के रूप में दो डॉक्टर मिले हैं। यहां 11 स्टाफ नर्स, 11 चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारी, 4 सफाई कर्मचारी हैं। धोबी माली की पोस्ट भी खाली है। रोज लगभग 250 में से 230 मरीजों को प्राइवेट या रोहतक पीजीआई रेफर करना पड़ता है।

हाल में ईएनटी व बाल रोग विशेषज्ञ ने ड्यूटी ज्वाइन की है। इन दो डॉक्टरों के आने से सेवाएं बढ़ेंगी। मरीजों रेफर नहीं करना पड़ेगा। ईएसआई को 100 बेड का अस्पताल कराने के प्रयास चल रहे हैं। उसके बाद सेवाएं और अधिक बढ़ेंगी।
-डॉ. शिवकुमार, एमएस ईएसआई अस्पताल
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