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Panipat News: अफसरशाही के खिलाफ उद्यमी, दशहरे के बाद एक दिन सांकेतिक रूप से उद्योग रखेंगे बंद

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sat, 10 Oct 2026 03:48 AM IST
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Entrepreneurs to protest against bureaucracy; will keep industries closed for one day symbolically after Dussehra.
जिमखाना क्लब में बैठक कर जानकारी देते उद्यमी। संवाद
पानीपत। प्रदूषण जांच और ऑनलाइन मॉनिटरिंग के नाम पर उद्योगों पर लगातार कस रहे शिकंजे के विरोध में पानीपत के उद्यमी अब आर-पार की लड़ाई के मूड में आ गए हैं। पानीपत और करनाल डायर्स एसोसिएशन के समर्थन में पानीपत एक्सपोर्ट एसोसिएशन समेत करीब एक दर्जन औद्योगिक संगठन खुलकर मैदान में उतर आए हैं। उद्यमियों ने शुक्रवार को जिमखाना क्लब में बैठक की। इसमें कड़ा निर्णय लेते हुए चेतावनी दी है कि यदि दशहरे तक उनकी समस्याओं का समाधान नहीं किया गया तो वे एक दिन सांकेतिक रूप से अपने उद्योग बंद कर जीटी रोड टोल प्लाजा पर धरने पर बैठेंगे। सुनवाई न होने पर वे उद्योगों की चाबियां सौंपकर दिल्ली कूच करने को मजबूर होंगे।
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बैठक में उद्यमियों ने आरोप लगाया कि प्रदूषण रोकने के नाम पर अधिकारियों की ओर से उन्हें बेवजह प्रताड़ित किया जा रहा है। ऑनलाइन मॉनिटरिंग सिस्टम में जरा सी तकनीकी खामी या छोटी सी कमी आते ही तुरंत येलो और ग्रीन स्टार देकर उद्योगों को क्लोजर नोटिस थमा दिए जाते हैं। पानीपत समेत पूरे प्रदेश में करीब 600 डाइंग उद्योगों को क्लोजर नोटिस जारी किए जा चुके हैं। एक बार उद्योग बंद होने के बाद उसे दोबारा सुचारू करना बेहद मुश्किल साबित हो रहा है, जबकि उद्यमी केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के मंजूरशुदा वेंडर्स से ही उपकरण लगवा रहे हैं। इस मौके पर भारत बांगा, रजनीश गर्ग, महेंद्र राज गुप्ता, विनित गुप्ता मौजूद रहे।
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क्लोजर नोटिस और थर्ड पार्टी का निरीक्षण
पानीपत डायर्स एसोसिएशन के प्रधान नितिन अरोड़ा ने कहा कि उद्योगों पर प्रदूषण जांच के नाम पर नियमों को बढ़ा दिया है। ऑनलाइन मॉनिटिरिंग में अब छोटी सी तकनीकी खामी होने पर भी उद्यमी को क्लोजर नोटिस दे दिया जाता है। इसके अलावा एचएसपीसीबी और सीपीसीबी के साथ थर्ड पार्टी निरीक्षण कर रही हैं। एक बार छोटी सी कमी मिलने पर बंद उद्योग का दोबारा चालू होना मुश्किल हो जाता है। उद्यमी सीपीसीबी के मंजूरशुदा वेंडर यंत्र लगवा रहे हैं। इसके बाद भी कार्रवाई की जा रही है। वे अपनी समस्या प्रदेश के मंत्रियों और मुख्यमंत्री तक पहुंचा चुके हैं। वे आश्वासन देते हैं, लेकिन दिल्ली की बात आने पर सब पीछे हट जाते हैं। ऐसा रहा तो वे अपने उद्योग बंद करने को मजबूर होंगे। उनकी समस्या का दशहरे तक समाधान नहीं हुआ तो वे एक दिन के लिए सांकेतिक रूप से अपने उद्योग बंद कर जीटी रोड टोल प्लाजा पर धरने पर बैठेंगे। इसके बाद भी समस्या का समाधान नहीं किया गया तो वे उद्योगों को ताले लगाकर दिल्ली कूच करने को मजबूर होंगे।
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डेडलाइन के बाद भी एजेंसियों ने नहीं लगाए उपकरण
पर्यावरण प्रबंधन सोसायटी के प्रदेशाध्यक्ष भीम राणा ने कहा कि सरकार की उद्योगाें को लेकर कोई बड़ी योजना नहीं है। सीपीसीबी ने पहले पेटकॉक, फिर कोयला बंद किया। अब बैग फिल्टर लगाया जाना है। उद्यमी सीपीसीबी के मंजूर वेंडर को एडवांस जमा करा चुके हैं। एक अक्तूबर को इसकी डेडलाइन थी। इसके बाद भी वेंडर बैग फिल्टर नहीं लगा पाए हैं। कुछ उद्यमियों ने अपने उद्योग तक बंद कर दिए हैं। उद्यमी सीएनजी और पीएनजी कनेक्शन लेना चाहते हैं। इसके रेट में बड़ा अंतर है। कहीं पर 46 तो कहीं पर 71 रुपये किलोग्राम मिलती है। इस पर सब्सिडी दी जानी चाहिए। सरकार को जेडएलडी और कॉमन बॉयलर को धरातल पर लाने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि ऑनलाइन मॉनिटरिंग सिस्टम में छोटी सी कमी आने पर क्लोजर नोटिस जारी कर दिया जाता है। प्रदेश के करीब 600 उद्योगों को क्लोजर नोटिस जारी किया गया है।
दिल्ली एनसीआर से बाहर करें, यूपी के मिल रहे निमंत्रण
पानीपत एक्सपोर्ट एसोसिएशन के सचिव विभू पालीवाल ने कहा कि उद्यमी किसी सरकार या व्यक्ति के खिलाफ नहीं हैं। वे हर काम में पूरा सहयोग देते हैं, लेकिन उनको किसी का सहयोग नहीं मिल पा रहा है। उन्होंने कहा कि नियमों की पालना में पानीपत के उद्योग के लिए पांच साल की योजना बनाई जानी चाहिए। इसमें हर साल का लक्ष्य तय किया जाएं। वे साल दर साल इनको पूरा करते जाएंगे। अधिकारी उद्यमियों की समस्या को समझने और उनके समाधान की तरफ ध्यान नहीं दे रहे हैं। पानीपत को दिल्ली एनसीआर से बाहर कर दिया जाना चाहिए। यह संभव नहीं है तो दिल्ली एनसीआर से बाहर पानीपत के उद्यमियों के लिए टेक्सटाइल पार्क बनाना चाहिए। इससे माल भाड़ा तीन प्रतिशत लगने को उद्यमी सहन कर लेगा। उन्होंने साफ कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार से उद्योग लगाने के लिए लगातार निमंत्रण मिल रहे हैं। उद्यमियों की तीन बार यूपी सरकार के अधिकारियों के साथ बैठक भी हो चुकी है। प्रदेश में यही स्थिति बनी रही तो वे यूपी के शामली व कैराना में अपने उद्योग लगाने को तैयार हैं। सरकार को उद्योगों की समस्या समाधान के लिए तकनीकी टीम या आईआईटी के विशेषज्ञों को लगाना चाहिए।

सरकार के बसाए सेक्टरों में भी सुविधा नहीं
करनाल डाइंग एसोसिएशन के अध्यक्ष पुनीत जैन ने कहा कि डाइंग सेक्टर में हर संभव सुविधा सरकार को देनी थी। सेक्टर-29-2 में सीईटीपी होने के बाद भी उद्यमियों को अपने प्रतिष्ठान में अलग से सीईटीपी लगाना पड़ रहा है। वे जेडएलडी और कॉमन बॉयलर की लगातार मांग कर रहे हैं। सरकार ने इस तरह कोई काम नहीं किया है। एक उद्यमी करोड़ों रुपये का लोन लेकर काम शुरू करता है। ऐसी स्थिति में उद्योग नहीं चलने पर उद्यमी आत्महत्या तक करने को मजबूर हो रहे हैं। ब्यूरो
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