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उद्यमियों ने तीन घंटे रखा काम बंद
अमर उजाला, पानीपत
Updated Wed, 18 Sep 2013 11:38 PM IST
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पानीपत में हैंडलूम उद्यमी और दुकानदार सेल्स टैक्स के विरोध में एक बार फिर सड़कों पर उतर आए हैं। इस बार 12 अन्य एसोसिएशनों के समर्थन में तीन घंटे तक उद्योग धंधे और दुकाने बंद रखीं।
इसके बाद शहर विधायक बलबीर पाल से मिलकर सेल्स टैक्स वापस लेने के लिए सीएम के सामने पक्ष रखने की मांग की। विधायक शाह ने व्यवसायियों और दुकानदारों की मांगों को सीएम के सामने रखने और समाधान कराने का भरोसा दिलाया। सुबह के समय तीन घंटे के बंद से उद्यमियों और दुकानदारों को दिनभर के काम और बिक्री पर झटका लगा।
हैंडलूम एसोसिएशन बुधवार को शहर की 12 अन्य एसोसिएशन के समर्थन में सुबह 10 बजे अमर भवन चौक चले और पचरंगा बाजार की दुकानों को बंद करते हुए जीटी रोड स्थित शहर विधायक बलबीर पाल शाह के कार्यालय पर पहुंचे।
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यहां पर उद्यमियों और दुकानदारों ने विधायक शाह को दो पेज का मांग पत्र सौंपा और सरकार की ओर से हैंडलूम उत्पादों पर लगाया जाने वाला 12.5 प्रतिशत सेल्स टैक्स वापस लेने की मांग की।
हैंडलूम एसोसिएशन के प्रधान श्याम सचदेवा ने कहा कि 12.5 प्रतिशत सेल्स टैक्स लगने पर उद्यमियों और ट्रेडर्स बाहर सामान नहीं भेज पा रहे। इससे उनकी मुश्किलें बढ़ रही हैं। उन्होंने विधायक को सेल्स टैक्स वापस लेने के बारे मुख्यमंत्री से मिलकर उनका पक्ष रखने की मांग की।
बलबीर पाल शाह ने उद्यमियाें और दुकानदारों की मांगों को दो दिन तक सीएम तक पहुंचाने और उनका पक्ष रखने का आश्वासन दिया। इस मौके पर गोपी बांगा, जोगेंद्र नरुला, विनोद नागपाल, अशोक नारंग, बलदेव राज रेवड़ी, अजय खुराना, वेद सेठी, त्रिलोचन सिंह, सुमित कटारिया, तरुण नागपाल, मदन बरेजा, बंटी खुराना, ओमप्रकाश नागपाल और लक्ष्मी नारायण गुप्ता मौजूद रहे।
ये है पूरा मामला
सेल टैक्स विभाग के पास 28 मार्च को नोटिफिकेशन आया था, जिसमें हैंडलूम उत्पादों पर 12.5 प्रतिशत सेल्स टैक्स लगाया जाना था। सेल टैक्स विभाग की ओर से एसोसिएशन की मांग और उच्च अधिकारियों की राय के अनुसार दो-तीन माह का समय दे दिया। इस दौरान उद्यमी भी चुप बैठे रहे। सेल टैक्स विभाग ने एक सितंबर से सेल्स टैक्स वसूलना शुरू कर दिया और बार्डर पर माल को पकड़ना शुरू कर दिया।
इसलिए कर रहे विरोध
उद्यमियों और ट्रेडर्स का मानना है कि सेल्स टैक्स लगने पर कोई भी उत्पाद सीधे-सीधे तौर पर 12 से 13 फीसदी महंगा हो जाएगा। सौ रुपये में मिलने वाला उत्पाद 112 से 113 रुपये में मिलना शुरू हो जाएगा। चूंकि पानीपत हैंडलूम की बिक्री का हब है। यहां पर दूसरे प्रदेशों में निर्मित हैंडलूम का सामान भी आता है और यहां से आगे सामान जाता है। अन्य प्रदेशों में हैंडलूम पर सेल्स टैक्स नहीं है।
उद्यमी और खरीदार यहां पर सेल्स टैक्स देने से टलेंगे और सीधे माल भेजना शुरू कर देंगे। ऐसे में पानीपत का ट्रेडिंग भी खत्म हो जाएगा।
तकिया के साथ चादर पर भी टैक्स
कहते हैं कि गेहूं के साथ घुन भी पिसता है। ऐसा ही हैंडलूम के उत्पाद चद्दर के साथ हो रहा है। नियमानुसार तकिया पर सेल्स टैक्स लगाया जाना है। बाजार में बेड शीट और तकिया का पूरा सेट बेचा जाता है। उद्यमी इसको एक ही रंग या मैच से तैयार करते हैं और एक साथ भेजते हैं।
सेल टैक्स विभाग पिलो के साथ चादर पर भी सेल्स टैक्स वसूलते हैं। वे एक-एक सामान देखने के बजाय बिल पर टैक्स लेते हैं। उद्यमियों का मानना है कि इससे प्रति पीस पर लागत मूल्य 60 से 70 रुपये तक बढ़ जाएगी। बाजार में कंपटीशन अधिक है। ऐसे में महंगा उत्पाद बेचना बेहद मुश्किल हो जाएगा।
ट्रांसपोर्ट ने माल उठाना किया बंद
हैंडलूम व्यवसायियों और सेल टैक्स विभाग के बीच सेल्स टैक्स को लेकर चल रही लड़ाई में ट्रांसपोर्टर पर भी विपरीत असर पड़ रहा है। उद्यमी सेल्स टैक्स नहीं दे रहे और सेल टैक्स विभाग ऐसे माल को आगे नहीं जाने दे रहा। जिससे फैक्टरी से निकला माल बार्डर पर गाड़ियों में पड़ा है। इसको देखते हुए ट्रांसपोर्टर दो दिन से माल नहीं उठा रहे। माल फैक्टरियों और दुकानों पर पड़ा है।
फेस्टिवल सीजन में बिगड़ सकते हैं हालात
उद्यमी और दुकानदार सेल्स टैक्स देने को तैयार नहीं हैं और इसके विरोध में अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने को तैयार हैं। यह मसला सप्ताह या 10 दिन में नहीं निपट पाता तो उद्यमियों और दुकानदारों समेत घर सजाने के सपने देखने वालों के लिए त्योहारी सीजन भारी पड़ सकता है। वे अपने घर या नजदीकियों को पसंदीदा सामान नहीं दे सकेंगे।
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इसके बाद शहर विधायक बलबीर पाल से मिलकर सेल्स टैक्स वापस लेने के लिए सीएम के सामने पक्ष रखने की मांग की। विधायक शाह ने व्यवसायियों और दुकानदारों की मांगों को सीएम के सामने रखने और समाधान कराने का भरोसा दिलाया। सुबह के समय तीन घंटे के बंद से उद्यमियों और दुकानदारों को दिनभर के काम और बिक्री पर झटका लगा।
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हैंडलूम एसोसिएशन बुधवार को शहर की 12 अन्य एसोसिएशन के समर्थन में सुबह 10 बजे अमर भवन चौक चले और पचरंगा बाजार की दुकानों को बंद करते हुए जीटी रोड स्थित शहर विधायक बलबीर पाल शाह के कार्यालय पर पहुंचे।
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यहां पर उद्यमियों और दुकानदारों ने विधायक शाह को दो पेज का मांग पत्र सौंपा और सरकार की ओर से हैंडलूम उत्पादों पर लगाया जाने वाला 12.5 प्रतिशत सेल्स टैक्स वापस लेने की मांग की।
हैंडलूम एसोसिएशन के प्रधान श्याम सचदेवा ने कहा कि 12.5 प्रतिशत सेल्स टैक्स लगने पर उद्यमियों और ट्रेडर्स बाहर सामान नहीं भेज पा रहे। इससे उनकी मुश्किलें बढ़ रही हैं। उन्होंने विधायक को सेल्स टैक्स वापस लेने के बारे मुख्यमंत्री से मिलकर उनका पक्ष रखने की मांग की।
बलबीर पाल शाह ने उद्यमियाें और दुकानदारों की मांगों को दो दिन तक सीएम तक पहुंचाने और उनका पक्ष रखने का आश्वासन दिया। इस मौके पर गोपी बांगा, जोगेंद्र नरुला, विनोद नागपाल, अशोक नारंग, बलदेव राज रेवड़ी, अजय खुराना, वेद सेठी, त्रिलोचन सिंह, सुमित कटारिया, तरुण नागपाल, मदन बरेजा, बंटी खुराना, ओमप्रकाश नागपाल और लक्ष्मी नारायण गुप्ता मौजूद रहे।
ये है पूरा मामला
सेल टैक्स विभाग के पास 28 मार्च को नोटिफिकेशन आया था, जिसमें हैंडलूम उत्पादों पर 12.5 प्रतिशत सेल्स टैक्स लगाया जाना था। सेल टैक्स विभाग की ओर से एसोसिएशन की मांग और उच्च अधिकारियों की राय के अनुसार दो-तीन माह का समय दे दिया। इस दौरान उद्यमी भी चुप बैठे रहे। सेल टैक्स विभाग ने एक सितंबर से सेल्स टैक्स वसूलना शुरू कर दिया और बार्डर पर माल को पकड़ना शुरू कर दिया।
इसलिए कर रहे विरोध
उद्यमियों और ट्रेडर्स का मानना है कि सेल्स टैक्स लगने पर कोई भी उत्पाद सीधे-सीधे तौर पर 12 से 13 फीसदी महंगा हो जाएगा। सौ रुपये में मिलने वाला उत्पाद 112 से 113 रुपये में मिलना शुरू हो जाएगा। चूंकि पानीपत हैंडलूम की बिक्री का हब है। यहां पर दूसरे प्रदेशों में निर्मित हैंडलूम का सामान भी आता है और यहां से आगे सामान जाता है। अन्य प्रदेशों में हैंडलूम पर सेल्स टैक्स नहीं है।
उद्यमी और खरीदार यहां पर सेल्स टैक्स देने से टलेंगे और सीधे माल भेजना शुरू कर देंगे। ऐसे में पानीपत का ट्रेडिंग भी खत्म हो जाएगा।
तकिया के साथ चादर पर भी टैक्स
कहते हैं कि गेहूं के साथ घुन भी पिसता है। ऐसा ही हैंडलूम के उत्पाद चद्दर के साथ हो रहा है। नियमानुसार तकिया पर सेल्स टैक्स लगाया जाना है। बाजार में बेड शीट और तकिया का पूरा सेट बेचा जाता है। उद्यमी इसको एक ही रंग या मैच से तैयार करते हैं और एक साथ भेजते हैं।
सेल टैक्स विभाग पिलो के साथ चादर पर भी सेल्स टैक्स वसूलते हैं। वे एक-एक सामान देखने के बजाय बिल पर टैक्स लेते हैं। उद्यमियों का मानना है कि इससे प्रति पीस पर लागत मूल्य 60 से 70 रुपये तक बढ़ जाएगी। बाजार में कंपटीशन अधिक है। ऐसे में महंगा उत्पाद बेचना बेहद मुश्किल हो जाएगा।
ट्रांसपोर्ट ने माल उठाना किया बंद
हैंडलूम व्यवसायियों और सेल टैक्स विभाग के बीच सेल्स टैक्स को लेकर चल रही लड़ाई में ट्रांसपोर्टर पर भी विपरीत असर पड़ रहा है। उद्यमी सेल्स टैक्स नहीं दे रहे और सेल टैक्स विभाग ऐसे माल को आगे नहीं जाने दे रहा। जिससे फैक्टरी से निकला माल बार्डर पर गाड़ियों में पड़ा है। इसको देखते हुए ट्रांसपोर्टर दो दिन से माल नहीं उठा रहे। माल फैक्टरियों और दुकानों पर पड़ा है।
फेस्टिवल सीजन में बिगड़ सकते हैं हालात
उद्यमी और दुकानदार सेल्स टैक्स देने को तैयार नहीं हैं और इसके विरोध में अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने को तैयार हैं। यह मसला सप्ताह या 10 दिन में नहीं निपट पाता तो उद्यमियों और दुकानदारों समेत घर सजाने के सपने देखने वालों के लिए त्योहारी सीजन भारी पड़ सकता है। वे अपने घर या नजदीकियों को पसंदीदा सामान नहीं दे सकेंगे।