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सीपीसीबी के खिलाफ 11 दिसंबर को सड़कों पर उतरेंगे उद्यमियों और श्रमिक
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पानीपत। नीजी होटल में मीटिंग करते हुए उद्योगपति।
- फोटो : Panipat
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पानीपत। पाबंदी के चलते बुधवार को शहर के करीब पांच सौ डाइंग हाउस बंद रहे। इससे नाराज उद्यमियों ने केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के खिलाफ आंदोलन का बिगुल बजा दिया है। आंदोलन की रूपरेखा तैयार करने के लिए गोल्ड होटल में वीरवार को 36 एसोसिएशन बैठक करेंगी। इसके बाद 11 दिसंबर को करीब 60 हजार उद्यमी और श्रमिक सीपीसीबी के खिलाफ सड़कों पर उतरेंगे। जिम खाना पर एकत्रित होकर उद्यमी सड़कों से होते हुए लघु सचिवालय पहुंचेगे और वहां प्रदर्शन के बाद डीसी सुशील सारवान को ज्ञापन देंगे।
यह फैसला बुधवार शाम को गोल्ड होटल में हुई बैठक में 17 एसोसिएशन ने लिया। बैठक की अध्यक्षता अविनाश पालीवाल, अशोक गुप्ता, सुरेश वर्मा व व प्रीतम सचदेवा ने की। उन्होंने कहा कि पानीपत के उद्योगों पर करीब आठ लाख परिवार आश्रित हैं। सीपीसीबी ने उद्योगों के लिए संकट खड़ा कर दिया है। ऐसे में इन परिवारों पर भी रोटी के लिए संकट खड़ा हो गया है।
एक्सपोर्ट एसोसिएशन के प्रधान सुरेश वर्मा ने कहा कि केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के लिए उद्योगों को टॉरगेट बनाना आसान है। उन्होंने कहा कि प्रदूषण के असल कारकों को जानना चाहिए। रिपोर्ट के मुताबिक, पर्यावरण को उद्योगों से महज 11 प्रतिशत प्रभाव पड़ता है, बाकी प्रभाव धूल व यातायात से पड़ता है। सरकार ने यातायात सुधारने के लिए कोई प्लानिंग नहीं बनाई। सिर्फ उद्योगों को टॉरगेट किया जा रहा है। पानीपत सरकार को हर साल 12 हजार करोड़ रुपये टैक्स देता है। लाखों लोगों को रोजगार देता है, ऐसे में सीपीसीबी को इन बातों का ध्यान रखना चाहिए। अब फैसले के विरोध में उद्यमी शनिवार को सड़कों पर उतरेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि सीपीसीबी हमें परेशान कर रही है। मजबूरी में हमें पंजाब और उत्तराखंड की ओर पलायन करना होगा।
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यह फैसला बुधवार शाम को गोल्ड होटल में हुई बैठक में 17 एसोसिएशन ने लिया। बैठक की अध्यक्षता अविनाश पालीवाल, अशोक गुप्ता, सुरेश वर्मा व व प्रीतम सचदेवा ने की। उन्होंने कहा कि पानीपत के उद्योगों पर करीब आठ लाख परिवार आश्रित हैं। सीपीसीबी ने उद्योगों के लिए संकट खड़ा कर दिया है। ऐसे में इन परिवारों पर भी रोटी के लिए संकट खड़ा हो गया है।
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एक्सपोर्ट एसोसिएशन के प्रधान सुरेश वर्मा ने कहा कि केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के लिए उद्योगों को टॉरगेट बनाना आसान है। उन्होंने कहा कि प्रदूषण के असल कारकों को जानना चाहिए। रिपोर्ट के मुताबिक, पर्यावरण को उद्योगों से महज 11 प्रतिशत प्रभाव पड़ता है, बाकी प्रभाव धूल व यातायात से पड़ता है। सरकार ने यातायात सुधारने के लिए कोई प्लानिंग नहीं बनाई। सिर्फ उद्योगों को टॉरगेट किया जा रहा है। पानीपत सरकार को हर साल 12 हजार करोड़ रुपये टैक्स देता है। लाखों लोगों को रोजगार देता है, ऐसे में सीपीसीबी को इन बातों का ध्यान रखना चाहिए। अब फैसले के विरोध में उद्यमी शनिवार को सड़कों पर उतरेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि सीपीसीबी हमें परेशान कर रही है। मजबूरी में हमें पंजाब और उत्तराखंड की ओर पलायन करना होगा।
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